“विशेष बच्चों के हाथों बने तोहफों ने जीत लिया मंत्री का दिल”
नोएडा: जन्मदिन के अवसर पर आमतौर पर नेताओं को फूल-मालाएं, गुलदस्ते और स्मृति चिन्ह भेंट किए जाते हैं, लेकिन केंद्रीय राज्य मंत्री, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के मंत्री बीएल वर्मा के लिए इस बार सबसे अनमोल उपहार वे थे, जिन्हें विशेष बच्चों ने अपने हाथों से तैयार किया था। इन उपहारों में केवल रंग और कलाकारी ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, मेहनत, आत्मनिर्भरता और स्नेह की ऐसी झलक थी जिसने मंत्री का दिल जीत लिया।
शुक्रवार को नोएडा सेक्टर-70 स्थित फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन के दिव्यांग बच्चे अपने अभिभावकों और संस्था की टीम के साथ नई दिल्ली स्थित केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा के आवास पहुंचे। बच्चों ने मंत्री को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए अपने हाथों से तैयार किए गए विशेष उपहार भेंट किए। इस भावनात्मक मुलाकात ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया।
बच्चों के हाथों बने उपहार बने सबसे अनमोल तोहफा
फाउंडेशन के बच्चों ने मंत्री को लिप पेन आर्ट, हाथों से तैयार किए गए आकर्षक फूल, स्वयं निर्मित हैंडवॉश तथा एक विशेष स्मारिका (मैगजीन) भेंट की। इन सभी उपहारों को बच्चों ने अपनी मेहनत, कल्पनाशक्ति और प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में तैयार किया था।
हर उपहार यह संदेश दे रहा था कि यदि दिव्यांग बच्चों को सही अवसर, प्रशिक्षण और प्रोत्साहन मिले तो वे समाज के लिए प्रेरणा बन सकते हैं। बच्चों के चेहरे पर खुशी और आत्मविश्वास साफ दिखाई दे रहा था, जबकि मंत्री बीएल वर्मा भी इन उपहारों को देखकर बेहद भावुक नजर आए।
मंत्री ने बच्चों को लगाया गले, बढ़ाया आत्मविश्वास
उपहार स्वीकार करने के बाद केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा ने सभी बच्चों को अपने पास बुलाया। उन्होंने एक-एक बच्चे को गले लगाया, उनकी पीठ थपथपाई और उनसे बातचीत की। बच्चों के साथ उन्होंने सहज और आत्मीय व्यवहार करते हुए उनका उत्साह बढ़ाया।
मंत्री ने कहा कि इन बच्चों की रचनात्मकता और मेहनत वास्तव में प्रेरणादायक है। समाज तभी आगे बढ़ सकता है जब हर व्यक्ति को समान अवसर मिले और विशेष बच्चों को सम्मान तथा सहयोग का वातावरण प्राप्त हो।
उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास समाज को अधिक संवेदनशील और समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इन बच्चों के भीतर अपार प्रतिभा है और उचित मार्गदर्शन मिलने पर वे किसी भी क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं।
‘समावेशी समाज की पहचान हैं ऐसे प्रयास’
अपने संबोधन में बीएल वर्मा ने कहा कि दिव्यांगजन किसी भी प्रकार से समाज पर बोझ नहीं हैं, बल्कि वे समाज की शक्ति हैं। आवश्यकता केवल उनकी क्षमता को पहचानने और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देने की है।
उन्होंने कहा कि विशेष बच्चों द्वारा अपने हाथों से तैयार किए गए उपहार मेरे लिए किसी भी महंगे तोहफे से अधिक मूल्यवान हैं। इनमें उनका स्नेह, परिश्रम और आत्मनिर्भर बनने का संदेश छिपा है।
मंत्री ने कहा कि सरकार दिव्यांगजनों के अधिकारों, शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता के लिए लगातार कार्य कर रही है और समाज की भागीदारी इस अभियान को और मजबूत बनाएगी।
फाउंडेशन ने बताया सेवा का उद्देश्य
फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन की टीम और संस्था से जुड़े डॉ. महिपाल सिंह ने बताया कि संस्था का उद्देश्य केवल दिव्यांग बच्चों का उपचार या प्रशिक्षण देना नहीं है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा का दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के प्रति समर्पण पूरे देश के लिए प्रेरणा है। उनके मार्गदर्शन और सहयोग से संस्था को लगातार नई ऊर्जा और दिशा मिलती रही है।
उन्होंने कहा कि जब देश का एक केंद्रीय मंत्री विशेष बच्चों के बीच समय बिताता है, उनके काम की सराहना करता है और उन्हें सम्मान देता है, तो इससे बच्चों का आत्मविश्वास कई गुना बढ़ जाता है।
बच्चों के साथ बिताया लंबा समय, साथ किया भोजन
कार्यक्रम का सबसे भावुक पल तब आया जब केंद्रीय मंत्री ने औपचारिक मुलाकात तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने बच्चों को अपने घर पर काफी समय तक अपने साथ बैठाया, उनसे बातचीत की, उनके शौक और भविष्य के सपनों के बारे में जाना।
इसके बाद मंत्री ने सभी बच्चों और उनके साथ आए लोगों के साथ भोजन भी किया। बच्चों के लिए यह अनुभव किसी सम्मान से कम नहीं था। मंत्री के साथ एक ही मेज पर बैठकर भोजन करना उनके लिए जीवनभर की याद बन गया।
बच्चों ने भी खुलकर मंत्री से बातचीत की और अपने अनुभव साझा किए। पूरे कार्यक्रम के दौरान आत्मीयता, अपनापन और सम्मान का वातावरण बना रहा।
अभिभावकों की आंखों में दिखी खुशी
अपने बच्चों को सम्मान मिलता देख अभिभावकों की आंखें भी खुशी से चमक उठीं। कई अभिभावकों ने कहा कि समाज में अक्सर दिव्यांग बच्चों को अलग नजर से देखा जाता है, लेकिन जब देश का एक केंद्रीय मंत्री स्वयं उन्हें अपने घर बुलाकर सम्मान देता है तो यह पूरे समाज के लिए सकारात्मक संदेश है।
उन्होंने कहा कि ऐसे अवसर बच्चों के मन में आत्मविश्वास पैदा करते हैं और उन्हें यह एहसास दिलाते हैं कि वे भी समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
रचनात्मकता से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन लंबे समय से विशेष बच्चों को कला, हस्तशिल्प, दैनिक जीवन कौशल और व्यावसायिक प्रशिक्षण से जोड़ने का कार्य कर रहा है। संस्था का प्रयास है कि बच्चे केवल शिक्षा तक सीमित न रहें बल्कि अपने हुनर के माध्यम से आत्मनिर्भर भी बनें।
बच्चों द्वारा तैयार किए गए लिप पेन आर्ट, सजावटी फूल, हैंडवॉश और अन्य उत्पाद इसी दिशा में उनकी सफलता की कहानी बयां करते हैं। ये उत्पाद यह साबित करते हैं कि प्रतिभा किसी शारीरिक सीमा की मोहताज नहीं होती।
समाज के लिए प्रेरणा बना यह जन्मदिन
बीएल वर्मा का यह जन्मदिन केवल शुभकामनाओं का कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह दिव्यांगजनों के सम्मान, आत्मनिर्भरता और सामाजिक समावेशन का संदेश देने वाला एक प्रेरक आयोजन बन गया। विशेष बच्चों के हाथों से बने उपहारों ने यह साबित कर दिया कि सच्चे उपहार वही होते हैं जिनमें प्रेम, परिश्रम और आत्मीयता शामिल हो।
केंद्रीय मंत्री का बच्चों के साथ समय बिताना, उन्हें सम्मान देना और उनके साथ भोजन करना इस बात का प्रमाण है कि समावेशी समाज केवल नीतियों से नहीं, बल्कि संवेदनशील व्यवहार और मानवीय रिश्तों से बनता है। यही संदेश इस पूरे आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धि रहा।














