“महाप्रबंधक (सिविल) के औचक निरीक्षण में सामने आई गंभीर अनियमितताएं”
नोएडा: नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर बड़ा और सख्त कदम उठाया है। बुधवार को महाप्रबंधक (सिविल) एस.पी. सिंह ने वर्क सर्किल-3 के अंतर्गत चल रहे महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सेक्टर-51 और सेक्टर-52 मेट्रो स्टेशन के बीच बन रहे फुटओवर ब्रिज (स्काईवॉक) तथा सेक्टर-50 और 51 के बीच निर्माणाधीन आरसीसी नाले में इस्तेमाल हो रही स्टील की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हुए। इसके बाद प्राधिकरण ने तत्काल तकनीकी जांच के आदेश देते हुए संबंधित निर्माण एजेंसियों के भुगतान पर रोक लगा दी है।
यह निरीक्षण वर्क सर्किल-3 के वरिष्ठ प्रबंधक आर.के. शर्मा, टेक्निकल ऑडिट सेल के वरिष्ठ प्रबंधक राजकमल सिंह तथा टीएसी (टेक्निकल ऑडिट कमेटी) की टीम की मौजूदगी में किया गया।
फुटओवर ब्रिज और आरसीसी नाले का हुआ निरीक्षण
निरीक्षण के दौरान महाप्रबंधक ने सबसे पहले सेक्टर-51 और सेक्टर-52 मेट्रो स्टेशन के बीच बन रहे आधुनिक फुटओवर ब्रिज (स्काईवॉक) के निर्माण कार्य का जायजा लिया। इसके बाद सेक्टर-50 और 51 के बीच बन रहे आरसीसी नाले का भी निरीक्षण किया गया।
जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि आरसीसी नाले के निर्माण में यूरोथर्म (राठी स्टील) तथा SAIL स्टील का उपयोग किया जा रहा है, जबकि फुटओवर ब्रिज के निर्माण में SAIL स्टील का इस्तेमाल हो रहा है।
हालांकि निरीक्षण के दौरान स्टील की गुणवत्ता को लेकर संदेह उत्पन्न होने पर प्राधिकरण ने बिना देरी किए तकनीकी जांच कराने का निर्णय लिया।
IIT दिल्ली, IIT रुड़की या श्रीराम इंस्टीट्यूट करेगा स्टील का परीक्षण
महाप्रबंधक एस.पी. सिंह ने टेक्निकल ऑडिट सेल को निर्देश दिए कि निर्माण स्थल से स्टील के सैंपल लेकर उनकी गुणवत्ता की जांच देश की प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थाओं—आईआईटी दिल्ली, आईआईटी रुड़की अथवा श्रीराम इंस्टीट्यूट जैसी मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं से कराई जाए।
प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि परीक्षण रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि इस्तेमाल की गई स्टील निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप है या नहीं।
रिपोर्ट आने तक ठेकेदारों का भुगतान पूरी तरह रोका गया
नोएडा प्राधिकरण ने निर्माण एजेंसियों के खिलाफ भी सख्त रुख अपनाया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जब तक गुणवत्ता जांच रिपोर्ट प्राप्त नहीं हो जाती, तब तक संबंधित ठेकेदारों को किसी भी प्रकार का भुगतान नहीं किया जाएगा।
प्राधिकरण का मानना है कि सार्वजनिक परियोजनाओं में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता और भुगतान तभी होगा जब सामग्री पूरी तरह मानकों पर खरी उतरेगी।
मानकों पर खरी नहीं उतरी स्टील तो होगी कड़ी कार्रवाई
प्राधिकरण ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जांच में स्टील की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई, तो संबंधित ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी प्रशासनिक एवं अनुबंधीय कार्रवाई की जाएगी।
इतना ही नहीं, दोषी पाए जाने पर ब्लैकलिस्टिंग सहित अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
अधिकारियों से तीन कार्य दिवस में मांगा गया स्पष्टीकरण
निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्यों में निम्न गुणवत्ता वाली सामग्री इस्तेमाल होने की आशंका के मद्देनजर संबंधित प्रबंधकों की जिम्मेदारी भी तय की गई है।
महाप्रबंधक ने संबंधित अधिकारियों को तीन कार्य दिवस के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। प्राधिकरण यह भी जांच करेगा कि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की निगरानी में कहीं लापरवाही तो नहीं बरती गई।
वर्क सर्किल-1 से 5 तक जारी हुए नए निर्देश
इस पूरे मामले के बाद नोएडा प्राधिकरण ने केवल वर्क सर्किल-3 तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रखी, बल्कि वर्क सर्किल-1 से लेकर वर्क सर्किल-5 तक के सभी वरिष्ठ प्रबंधकों को भी नए निर्देश जारी किए हैं।
निर्देशों में कहा गया है कि भविष्य में सभी निर्माण कार्यों में सीमेंट, स्टील, बिटुमिन तथा अन्य निर्माण सामग्री का उपयोग केवल निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप ही किया जाए।
प्रयोगशाला जांच के बाद ही होगा भुगतान
प्राधिकरण ने यह भी तय किया है कि अब बड़े निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की जांच प्रतिष्ठित संस्थानों से कराना अनिवार्य होगा। जांच रिपोर्ट संतोषजनक आने के बाद ही संबंधित निर्माण कार्यों का भुगतान किया जाएगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य निर्माण गुणवत्ता में पारदर्शिता बढ़ाना और भविष्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर रोक लगाना है।
गुणवत्ता से समझौते पर जीरो टॉलरेंस की नीति
नोएडा प्राधिकरण ने साफ संकेत दिया है कि शहर में चल रही विकास परियोजनाओं में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि करोड़ों रुपये की सार्वजनिक परियोजनाओं में उपयोग होने वाली निर्माण सामग्री पूरी तरह मानक गुणवत्ता की होनी चाहिए। यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारी, अभियंता और ठेकेदार सभी जिम्मेदार माने जाएंगे।
नोएडा प्राधिकरण की यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पहली बार किसी निर्माणाधीन परियोजना में इस्तेमाल हो रही स्टील की गुणवत्ता पर संदेह होने के बाद तत्काल IIT जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं से जांच कराने, भुगतान रोकने, अधिकारियों से जवाब-तलब करने और दोषियों पर कार्रवाई की प्रक्रिया एक साथ शुरू की गई है।
यदि जांच में अनियमितता साबित होती है तो यह मामला केवल एक निर्माण परियोजना तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नोएडा की अन्य विकास परियोजनाओं की गुणवत्ता पर भी व्यापक जांच का रास्ता खोल सकता है।














