“पहली बार केंद्र ने माना—E20 से 2 से 6 प्रतिशत तक कम हो सकती है फ्यूल एफिशिएंसी, लेकिन इंजन फेल होने या वाहन की उम्र घटने का कोई प्रमाण नहीं”
नई दिल्ली। देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्र सरकार ने संसद में एक महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित स्पष्टीकरण दिया है। सरकार ने पहली बार स्वीकार किया है कि 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) के उपयोग से वाहनों की माइलेज में 2 से 6 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। हालांकि सरकार ने साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि करोड़ों वाहनों पर किए गए वैज्ञानिक परीक्षणों और वर्षों के उपयोग के अनुभव में E20 से इंजन खराब होने, असामान्य घिसावट, जंग लगने या वाहन की उम्र कम होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है।
लोकसभा में लिखित जवाब देते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि वाहन की श्रेणी, इंजन तकनीक और उसकी उम्र के आधार पर माइलेज में कुछ कमी देखी जा सकती है, लेकिन इससे इंजन की विश्वसनीयता और प्रदर्शन पर कोई गंभीर नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। सरकार का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश के विभिन्न हिस्सों में वाहन मालिकों और उपभोक्ता संगठनों द्वारा E20 पेट्रोल को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे थे।
संसद में सरकार ने रखा वैज्ञानिक परीक्षणों का पूरा ब्यौरा
सरकार ने अपने जवाब में बताया कि E20 पेट्रोल के प्रभावों का व्यापक अध्ययन ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इन संस्थाओं ने BS-III, BS-IV और BS-VI मानकों वाले दोपहिया और चारपहिया वाहनों पर विस्तृत परीक्षण किए।
इन परीक्षणों में इंजन की कार्यक्षमता, ईंधन खपत, उत्सर्जन स्तर, इंजन के पुर्जों पर प्रभाव और लंबी अवधि तक उपयोग के बाद होने वाले बदलावों का अध्ययन किया गया। सरकार के अनुसार डायनेमोमीटर टेस्ट और वास्तविक सड़क परिस्थितियों में किए गए परीक्षणों में E20 पेट्रोल सुरक्षित पाया गया।
सरकार ने कहा कि यदि E20 से इंजन को कोई गंभीर नुकसान होता तो इतने बड़े पैमाने पर उपयोग के दौरान इसके स्पष्ट प्रमाण सामने आते, लेकिन अब तक ऐसा कोई सत्यापित मामला दर्ज नहीं हुआ है।
माइलेज कम होने की बात सरकार ने पहली बार खुलकर स्वीकार की
E20 पेट्रोल को लेकर सबसे बड़ा सवाल हमेशा माइलेज का रहा है। पेट्रोल में एथेनॉल की ऊर्जा क्षमता सामान्य पेट्रोल की तुलना में थोड़ी कम होती है। इसी कारण वाहन विशेषज्ञ लंबे समय से यह कहते रहे हैं कि E20 के इस्तेमाल से माइलेज प्रभावित हो सकता है।
अब सरकार ने भी संसद में स्वीकार किया है कि E20 पेट्रोल के उपयोग से वाहन की श्रेणी और तकनीक के आधार पर माइलेज में 2 से 6 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। हालांकि सरकार का कहना है कि यह कमी बहुत अधिक नहीं है और इसके बदले पर्यावरणीय तथा आर्थिक लाभ कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई वाहन सामान्य पेट्रोल पर 20 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देता है तो E20 पेट्रोल पर यह लगभग 19 से 19.5 किलोमीटर प्रति लीटर तक आ सकता है। आम उपभोक्ता के लिए यह अंतर बहुत बड़ा नहीं माना जा रहा है।
23 करोड़ से अधिक वाहनों के अनुभव का हवाला
सरकार ने संसद में जो आंकड़े पेश किए, वे E20 को लेकर उसकी सबसे बड़ी दलील माने जा रहे हैं। सरकार के अनुसार देश में 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें E15+ तथा E19-E20 मिश्रित पेट्रोल का उपयोग कर चुकी हैं।
इतने बड़े स्तर पर उपयोग के बावजूद वाहन निर्माताओं या सर्विस नेटवर्क के पास इंजन खराब होने, जंग लगने या असामान्य घिसावट जैसी शिकायतों का कोई असाधारण रिकॉर्ड नहीं मिला है। सरकार का कहना है कि यदि E20 वास्तव में इंजन के लिए हानिकारक होता तो करोड़ों वाहनों के उपयोग के बाद इसके स्पष्ट और व्यापक प्रमाण सामने आ जाते।
2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग में नहीं मिला कोई बड़ा तकनीकी दोष
सरकार ने एक प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी के आंकड़ों का भी हवाला दिया। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान लगभग 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की गई। इनमें से करीब 1.5 करोड़ वाहन ऐसे थे जो मूल रूप से E20 ईंधन के लिए प्रमाणित नहीं थे।
इसके बावजूद सर्विस रिकॉर्ड में E20 से जुड़ी कोई असामान्य तकनीकी समस्या दर्ज नहीं हुई। सरकार का कहना है कि यह तथ्य स्वयं साबित करता है कि E20 पेट्रोल को लेकर फैलाई जा रही कई आशंकाओं का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।
पर्यावरण के लिए क्यों महत्वपूर्ण है E20?
सरकार E20 को केवल एक ईंधन नहीं बल्कि ऊर्जा और पर्यावरण नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रही है। संसद में बताया गया कि E20 के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में लगभग 30 प्रतिशत तक कमी लाने में मदद मिलती है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देशों में शामिल है और अपनी पेट्रोलियम जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का उद्देश्य केवल प्रदूषण कम करना नहीं बल्कि तेल आयात पर निर्भरता घटाना भी है।
विशेषज्ञों के अनुसार एथेनॉल एक नवीकरणीय ईंधन है जो गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। इससे किसानों को अतिरिक्त बाजार मिलता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है।
पश्चिम एशिया संकट के बीच ऊर्जा सुरक्षा का हथियार
सरकार ने संसद में यह भी कहा कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया में अस्थिरता के बावजूद भारत में पेट्रोल की कीमतों पर अपेक्षाकृत सीमित असर पड़ा है। इसके पीछे एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को भी एक महत्वपूर्ण कारण बताया गया।
सरकार का दावा है कि एथेनॉल मिश्रण बढ़ने से कच्चे तेल के आयात पर खर्च कम हुआ है और विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। यही वजह है कि केंद्र सरकार आने वाले वर्षों में भी एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को और मजबूत करने की योजना पर काम कर रही है।
विपक्ष और उपभोक्ता संगठनों की चिंताएं बरकरार
हालांकि सरकार के दावों के बावजूद विपक्षी दलों और कुछ उपभोक्ता संगठनों की चिंताएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। उनका कहना है कि पुराने वाहनों की E20 के साथ दीर्घकालिक अनुकूलता पर और अधिक स्वतंत्र अध्ययन किए जाने चाहिए।
कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि पुराने इंजन और ईंधन पाइपलाइन वाले वाहनों में लंबे समय के बाद प्रभावों का आकलन अभी पूरी तरह नहीं हुआ है। इसके अलावा माइलेज में कमी का आर्थिक असर भी लाखों वाहन मालिकों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
फिर भी सरकार का कहना है कि E20 को लागू करने से पहले व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन किए गए हैं और नीति आयोग, ARAI, SIAM, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (IIP), तेल विपणन कंपनियों तथा वाहन निर्माताओं की भागीदारी से यह कार्यक्रम तैयार किया गया है।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
केंद्र सरकार का मानना है कि E20 कार्यक्रम भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। एक ओर इससे प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी ओर कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी और किसानों की आय बढ़ाने में भी योगदान मिलेगा।
संसद में दिए गए जवाब के बाद इतना स्पष्ट हो गया है कि सरकार E20 को लेकर पीछे हटने के मूड में नहीं है। माइलेज में मामूली कमी को स्वीकार करते हुए भी सरकार का दावा है कि इंजन सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के बड़े लक्ष्यों के सामने यह एक स्वीकार्य समझौता है। आने वाले वर्षों में E20 भारत की ईंधन नीति का प्रमुख आधार बनने जा रहा है और करोड़ों वाहन मालिकों को इसके साथ आगे बढ़ना होगा।














