Thursday, July 30, 2026
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भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर शशि थरूर समिति का बड़ा ब्लूप्रिंट: स्थिर ढाका, मजबूत संवाद और सुरक्षित क्षेत्रीय भविष्य पर जोर

नई दिल्ली: भारत और बांग्लादेश के बीच बदलते राजनीतिक एवं सामरिक समीकरणों के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली विदेश मामलों संबंधी संसदीय समिति ने दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने वाला एक व्यापक ब्लूप्रिंट संसद में पेश किया है। समिति ने अपनी कार्रवाई रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा है कि भारत को एक लोकतांत्रिक, स्थिर, शांतिपूर्ण और समावेशी बांग्लादेश के समर्थन की नीति जारी रखनी चाहिए। रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि पड़ोसी देश में राजनीतिक परिस्थितियां चाहे जैसी हों, भारत को सभी राजनीतिक दलों, सिविल सोसायटी संगठनों और अन्य प्रमुख हितधारकों के साथ संवाद बनाए रखना चाहिए।

रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब दक्षिण एशिया में भू-राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को अधिक मजबूत एवं व्यावहारिक बनाने की दिशा में काम कर रहा है। समिति का मानना है कि बांग्लादेश के साथ स्थिर और भरोसेमंद संबंध न केवल दोनों देशों के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और आर्थिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण हैं।

भारत विरोधी दुष्प्रचार से निपटने के लिए नई रणनीति का सुझाव

समिति ने अपनी रिपोर्ट में भारत विरोधी दुष्प्रचार और गलत सूचनाओं को एक गंभीर चुनौती बताया है। इसके लिए ट्रैक-2 कूटनीति, सॉफ्ट पावर, मीडिया सहयोग और आधुनिक तकनीक आधारित संचार तंत्र को मजबूत करने की सिफारिश की गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित रणनीतिक संचार तंत्र विकसित किया जाना चाहिए, ताकि गलत सूचनाओं का समय रहते जवाब दिया जा सके। समिति का मानना है कि दोनों देशों के बीच सकारात्मक संवाद को बढ़ावा देकर आपसी विश्वास को और मजबूत किया जा सकता है।

1971 की साझा विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर

रिपोर्ट में भारत और बांग्लादेश के ऐतिहासिक संबंधों को मजबूत आधार बताते हुए 1971 के मुक्ति संग्राम की साझा विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।

समिति ने सुझाव दिया कि शैक्षणिक आदान-प्रदान, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और जन-से-जन संपर्क को बढ़ावा दिया जाए। इसके जरिए दोनों देशों के युवाओं को इतिहास, संस्कृति और साझा संघर्षों की जानकारी मिलेगी, जिससे भविष्य में संबंध और अधिक मजबूत होंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि सांस्कृतिक और सामाजिक जुड़ाव राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बावजूद रिश्तों को स्थिर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।

सीमा संबंधी लंबित मुद्दों को जल्द सुलझाने की सिफारिश

समिति ने भारत-बांग्लादेश सीमा से जुड़े लंबित मुद्दों के समाधान में तेजी लाने की आवश्यकता जताई है। रिपोर्ट में सीमा निर्धारण के शेष कार्यों को प्राथमिकता देने और सीमा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने का सुझाव दिया गया है।

इसके साथ ही संयुक्त आयोगों और सचिव स्तर की बैठकों को नियमित करने की सिफारिश की गई है ताकि विभिन्न मुद्दों पर संवाद की प्रक्रिया लगातार चलती रहे और विवादों के समाधान में देरी न हो।

रिपोर्ट के अनुसार, संस्थागत संवाद व्यवस्था जितनी मजबूत होगी, दोनों देशों के बीच सहयोग उतना ही अधिक प्रभावी और टिकाऊ बनेगा।

बिम्सटेक के जरिए क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने की पैरवी

समिति ने क्षेत्रीय मंच बिम्सटेक (BIMSTEC) को भारत-बांग्लादेश सहयोग का महत्वपूर्ण माध्यम बताया है। रिपोर्ट में संपर्क, व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए बिम्सटेक की भूमिका को और मजबूत करने का सुझाव दिया गया है।

विशेष रूप से परिवहन, ऊर्जा, समुद्री संपर्क और डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने की सिफारिश की गई है। समिति का मानना है कि क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण दक्षिण एशिया और बंगाल की खाड़ी क्षेत्र की समृद्धि के लिए आवश्यक है।

वैश्विक तनाव के बीच सरकार की सुरक्षा और सप्लाई चेन पर नजर

इसी बीच केंद्र सरकार भी वैश्विक परिस्थितियों पर लगातार नजर बनाए हुए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वरिष्ठ मंत्रियों के समूह के साथ मौजूदा वैश्विक सुरक्षा हालात और विभिन्न क्षेत्रों में जारी संघर्षों के भारत पर संभावित प्रभावों की समीक्षा की।

सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट समिति ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

करीब दो घंटे चली बैठक में वैश्विक संघर्षों के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार, समुद्री मार्गों और सप्लाई चेन पर पड़ने वाले प्रभावों पर विस्तार से चर्चा हुई। साथ ही विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों और समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की गई।

आयात और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता पर विशेष फोकस

बैठक में पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, उर्वरक और अन्य आवश्यक वस्तुओं के आयात को निर्बाध बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी गई। सरकार का फोकस यह सुनिश्चित करने पर है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर देश की अर्थव्यवस्था और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता पर न पड़े।

सूत्रों के मुताबिक विभिन्न मंत्रालयों ने अपनी तैयारियों और वैकल्पिक व्यवस्थाओं को लेकर विस्तृत प्रस्तुति दी। बैठक में वैश्विक राजनीतिक और सुरक्षा परिदृश्य की भी व्यापक समीक्षा की गई।

दक्षिण एशिया में स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत

शशि थरूर समिति की रिपोर्ट और केंद्र सरकार की उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा को एक साथ देखें तो यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि भारत पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों को मजबूत करने के साथ-साथ बदलती वैश्विक चुनौतियों के प्रति भी सतर्क है। बांग्लादेश के साथ स्थिर और भरोसेमंद संबंधों को भारत की पड़ोसी नीति का अहम स्तंभ माना जा रहा है।

रिपोर्ट यह संदेश देती है कि कूटनीति, सांस्कृतिक जुड़ाव, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय साझेदारी के जरिए भारत और बांग्लादेश न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई दे सकते हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र में शांति, स्थिरता और विकास का नया अध्याय भी लिख सकते हैं।

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VIKAS TRIPATHI
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