नोएडा: माननीय सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. महेश शर्मा के कार्यालय में कंप्यूटर संबंधी कार्यों का दायित्व संभाल रहे आदरणीय विमलेश के आकस्मिक निधन से पूरे राजनीतिक, सामाजिक और कार्यकर्ता परिवार में गहरा शोक व्याप्त है। उनके असमय निधन का समाचार जैसे ही लोगों तक पहुँचा, हर कोई स्तब्ध रह गया। वर्षों से पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ कार्यालय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाने वाले विमलेश जी का यूँ अचानक दुनिया छोड़ जाना सभी के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।
उनकी कार्यशैली, व्यवहार-कुशलता और सादगी ने उन्हें केवल एक कर्मचारी नहीं, बल्कि हर व्यक्ति के लिए परिवार का सदस्य बना दिया था। उनके निधन से कार्यालय में शोक का वातावरण है और हर किसी की जुबान पर उनके व्यक्तित्व और कार्यों की चर्चा है।
कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल थे विमलेश जी
विमलेश जी लंबे समय से सांसद डॉ. महेश शर्मा के कार्यालय में कंप्यूटर एवं तकनीकी कार्यों का दायित्व संभाल रहे थे। आधुनिक तकनीकी कार्यों को सहजता से पूरा करने के साथ-साथ वे कार्यालय के प्रत्येक कार्य में पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी का परिचय देते थे। चाहे कोई जरूरी दस्तावेज तैयार करना हो, जनसमस्याओं से जुड़े पत्राचार का कार्य हो या फिर कार्यालय की तकनीकी व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना—हर जिम्मेदारी को वे पूरी तत्परता और गंभीरता से निभाते थे।
उनके सहयोगी बताते हैं कि वे हमेशा समय की पाबंदी, अनुशासन और कार्य के प्रति समर्पण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते थे। यही कारण था कि कार्यालय में उन्हें अत्यंत विश्वसनीय और जिम्मेदार सहयोगी के रूप में देखा जाता था।
मधुर व्यवहार ने बनाया सबका प्रिय
विमलेश की सबसे बड़ी पहचान उनका सरल, विनम्र और मिलनसार स्वभाव था। वे छोटे-बड़े सभी लोगों से समान आत्मीयता और सम्मान के साथ मिलते थे। किसी भी व्यक्ति की समस्या सुनना और यथासंभव उसका समाधान कराने का प्रयास करना उनके व्यक्तित्व की विशेषता थी।
कार्यालय में आने वाले आम नागरिकों से लेकर वरिष्ठ पदाधिकारियों तक, हर कोई उनके व्यवहार से प्रभावित रहता था। उनकी मुस्कुराहट, सहज संवाद और सहयोग की भावना ने उन्हें हर वर्ग के लोगों के बीच लोकप्रिय बना दिया था।
सांसद कार्यालय और कार्यकर्ताओं में शोक की लहर
विमलेश के निधन की खबर मिलते ही सांसद कार्यालय, भाजपा कार्यकर्ताओं तथा सामाजिक संगठनों में शोक की लहर दौड़ गई। अनेक जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों ने उनके निधन पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए इसे व्यक्तिगत क्षति बताया।
सभी ने कहा कि विमलेश जी जैसे कर्मठ, ईमानदार और सरल व्यक्तित्व बहुत कम देखने को मिलते हैं। उन्होंने अपने व्यवहार और कार्यशैली से हर व्यक्ति के दिल में एक विशेष स्थान बनाया था। उनका जाना केवल एक कार्यालय का नहीं, बल्कि पूरे सामाजिक परिवार का नुकसान है।
श्रद्धांजलि के साथ ईश्वर से प्रार्थना
विमलेश के निधन पर अनेक लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। सभी ने भगवान से प्रार्थना की कि वे पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिवार को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति, धैर्य और साहस दें।
शोक संदेशों में कहा गया कि जीवन अनिश्चित है, लेकिन कुछ लोग अपने व्यवहार, कर्म और मानवीय मूल्यों के कारण हमेशा लोगों की स्मृतियों में जीवित रहते हैं। विमलेश जी भी ऐसे ही व्यक्तित्व थे, जिनकी सादगी, समर्पण और आत्मीयता को सदैव याद रखा जाएगा।
यादों में हमेशा जीवित रहेंगे विमलेश जी
जीवन की यात्रा भले ही समय से पहले समाप्त हो गई हो, लेकिन अपने पीछे वे सेवा, समर्पण और मानवीय मूल्यों की ऐसी विरासत छोड़ गए हैं, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी। जिन्होंने भी उनके साथ काम किया या उन्हें करीब से जाना, वे आज उन्हें नम आँखों से याद कर रहे हैं।
उनका शांत स्वभाव, कर्तव्य के प्रति निष्ठा, सभी के प्रति सम्मान और बिना किसी अपेक्षा के सेवा करने की भावना उन्हें एक अलग पहचान देती थी। यही कारण है कि उनके निधन के बाद हर व्यक्ति यही कह रहा है कि “कुछ लोग पद से नहीं, अपने व्यवहार और कर्म से बड़े बनते हैं।”
विमलेश का आकस्मिक निधन निश्चित रूप से एक ऐसी रिक्तता छोड़ गया है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है। वे भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी सादगी, कर्मनिष्ठा और आत्मीय मुस्कान हमेशा सभी की स्मृतियों में जीवित रहेगी।
ॐ शांति।














