अफ्रीकी देश लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो (DR Congo) एक बार फिर घातक इबोला वायरस के बड़े प्रकोप का सामना कर रहा है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार केवल दो महीनों के भीतर 1000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों नए संक्रमित मरीज सामने आए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह हाल के वर्षों का सबसे तेजी से फैलने वाला इबोला प्रकोप बन सकता है।
स्थिति को और गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि इस बार संक्रमण फैलाने वाला बुन्डिबुग्यो (Bundibugyo) वैरिएंट है, जिसके लिए अभी तक व्यापक रूप से स्वीकृत वैक्सीन या प्रभावी उपचार उपलब्ध नहीं है। यही वजह है कि स्वास्थ्य एजेंसियों के सामने वायरस को नियंत्रित करना पहले की तुलना में कहीं अधिक कठिन साबित हो रहा है।
दो महीने में 1000 मौतें, चिंता बढ़ी
अफ्रीका सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Africa CDC) के अनुसार अब तक 1031 मौतों की पुष्टि हो चुकी है। वहीं हजारों संदिग्ध और पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि वास्तविक आंकड़े आधिकारिक रिकॉर्ड से कहीं अधिक हो सकते हैं क्योंकि कई प्रभावित इलाकों तक चिकित्सा टीमें पहुंच ही नहीं पा रही हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी चेतावनी दी है कि संक्रमण और मौतों की वास्तविक संख्या रिपोर्ट किए गए आंकड़ों से दो से चार गुना तक अधिक हो सकती है।
क्यों खतरनाक है नया वैरिएंट?
इबोला वायरस के कई प्रकार पहले भी सामने आ चुके हैं, लेकिन इस बार बुन्डिबुग्यो वैरिएंट ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। इसके खिलाफ न तो पर्याप्त वैक्सीन उपलब्ध है और न ही कोई व्यापक रूप से स्वीकृत दवा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यही कारण है कि संक्रमण को रोकने के लिए केवल आइसोलेशन, संपर्क ट्रेसिंग और सामुदायिक जागरूकता जैसे उपायों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
संघर्ष और हिंसा से बिगड़ रही स्थिति
कांगो के कई प्रभावित क्षेत्र लंबे समय से विद्रोही गतिविधियों और आंतरिक संघर्षों से जूझ रहे हैं। इन इलाकों में स्वास्थ्यकर्मियों के लिए काम करना बेहद कठिन हो गया है।
कई जगहों पर चिकित्सा टीमों और राहतकर्मियों पर हमले किए गए हैं। कुछ स्वास्थ्य केंद्रों को बंद करना पड़ा है जबकि कई स्वास्थ्यकर्मियों ने वेतन न मिलने के कारण काम रोक दिया है। इससे वायरस के प्रसार को रोकने के प्रयास कमजोर पड़ रहे हैं।
समुदायों का विरोध भी चुनौती
स्वास्थ्य एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक स्थानीय समुदायों का अविश्वास है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में लोग सरकारी और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य टीमों पर भरोसा नहीं कर रहे हैं।
इबोला से मरने वाले लोगों के शवों को सुरक्षित तरीके से दफनाने की प्रक्रिया का भी विरोध किया जा रहा है। कई समुदाय पारंपरिक अंतिम संस्कार पद्धतियों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमित शवों के संपर्क में आने से वायरस तेजी से फैल सकता है।
इबोला कैसे फैलता है?
इबोला एक अत्यंत गंभीर और अक्सर जानलेवा वायरल बीमारी है। यह संक्रमित व्यक्ति के खून, उल्टी, पसीने, लार, वीर्य और अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क से फैलता है।
संक्रमण के सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:
तेज बुखार
अत्यधिक कमजोरी
सिरदर्द
मांसपेशियों में दर्द
उल्टी और दस्त
आंतरिक या बाहरी रक्तस्राव
समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी घातक साबित हो सकती है।
दुनिया के लिए क्यों चिंता की बात?
हालांकि वर्तमान प्रकोप मुख्य रूप से कांगो तक सीमित है, लेकिन वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे केवल एक स्थानीय समस्या नहीं मान रहे। अंतरराष्ट्रीय यात्रा और सीमापार आवाजाही के कारण संक्रमण के अन्य देशों तक पहुंचने का खतरा बना रहता है।
कोविड-19 महामारी के बाद दुनिया संक्रामक रोगों के खतरों को लेकर अधिक सतर्क हो गई है। ऐसे में इबोला जैसे उच्च मृत्यु दर वाले वायरस का तेजी से फैलना वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
WHO और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की अपील
विश्व स्वास्थ्य संगठन, Africa CDC और कई अंतरराष्ट्रीय सहायता संस्थाओं ने तत्काल वित्तीय सहायता, चिकित्सा उपकरण, दवाइयों और स्वास्थ्यकर्मियों की जरूरत पर जोर दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले हफ्तों में बड़े पैमाने पर संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए, तो संक्रमण और मौतों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है।
कांगो में फैल रहा नया इबोला प्रकोप केवल एक क्षेत्रीय स्वास्थ्य संकट नहीं बल्कि वैश्विक चिंता का विषय बनता जा रहा है। दो महीनों में 1000 से अधिक मौतें, वैक्सीन की कमी, आंतरिक संघर्ष, स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले और तेजी से फैलता संक्रमण स्थिति को बेहद गंभीर बना रहे हैं। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और प्रभावी स्वास्थ्य हस्तक्षेप ही इस संकट को नियंत्रित करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।














