ग्रेटर नोएडा: ग्रेटर नोएडा की प्रतिष्ठित और हाई-प्रोफाइल रिहायशी सोसाइटियों में गिनी जाने वाली पैरामाउंट गोल्फ फॉरेस्ट एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सुर्खियों में है। एक ही दिन में हुई दो गंभीर आपराधिक घटनाओं ने न केवल सोसाइटी में रहने वाले हजारों परिवारों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि बिल्डर, मेंटेनेंस एजेंसी, JLL प्रबंधन और हाल ही में नियुक्त नई सिक्योरिटी एजेंसी की कार्यप्रणाली को भी कठघरे में ला खड़ा किया है।
तड़के सुबह एक महिला के साथ कथित रूप से बंदूक की नोक पर चेन स्नैचिंग की घटना और कुछ ही घंटों बाद एक मकान से करीब 1.5 लाख रुपये की चोरी ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर जिस सोसाइटी में निवासी हर महीने लाखों रुपये मेंटेनेंस शुल्क देते हैं, वहां उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन निभा रहा है।
सुबह चार बजे महिला के साथ हथियार के बल पर चेन स्नैचिंग
निवासियों के अनुसार पहली घटना सी-ब्लॉक में सुबह लगभग चार बजे हुई। बताया जा रहा है कि एक महिला जब परिसर में मौजूद थी, तभी एक बदमाश ने कथित तौर पर उसकी कनपटी पर बंदूक तान दी। हथियार के भय से महिला कुछ समझ पाती, उससे पहले आरोपी उसके गले से सोने की चेन छीनकर मौके से फरार हो गया।
घटना के बाद पूरे परिसर में भय और असुरक्षा का माहौल फैल गया। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इतनी सख्त सुरक्षा व्यवस्था के दावों के बावजूद हथियारबंद बदमाश सोसाइटी के भीतर कैसे पहुंचा और वारदात को अंजाम देकर आसानी से निकल भी गया।
दूसरी घटना ने बढ़ाई चिंता, मकान से डेढ़ लाख रुपये चोरी
पहली घटना से लोग अभी उबर भी नहीं पाए थे कि उसी दिन दूसरी वारदात सामने आ गई। ए-222 स्थित एक मकान से करीब 1.5 लाख रुपये की चोरी की सूचना ने पूरे परिसर में सनसनी फैला दी।
लगातार दो गंभीर घटनाओं ने निवासियों के मन में यह आशंका पैदा कर दी है कि यदि अपराधियों को सोसाइटी में बिना किसी रोक-टोक के प्रवेश मिल रहा है, तो भविष्य में इससे भी बड़ी घटनाएं हो सकती हैं। लोगों का कहना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था प्रभावी होती तो इतनी कम अवधि में दो बड़ी वारदातें संभव नहीं थीं।
तीन दिन पहले बदली गई थी सिक्योरिटी एजेंसी, अब उसी पर सवाल
सोसाइटी निवासी हरबीर सिंह का कहना है कि हाल ही में कमांडो सिक्योरिटी एजेंसी को सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और उसे कार्यभार संभाले अभी महज तीन दिन ही हुए थे कि दो बड़ी आपराधिक घटनाएं सामने आ गईं।
उनका कहना है कि इससे नई एजेंसी की कार्यक्षमता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है। कई निवासियों ने आरोप लगाया कि विजिटर वेरिफिकेशन और एंट्री सिस्टम बेहद कमजोर है। बिना पर्याप्त पहचान और सत्यापन के लोगों को परिसर में प्रवेश दिया जा रहा है, जिससे अपराधियों के लिए सोसाइटी तक पहुंचना आसान हो गया है।
मेंटेनेंस और JLL प्रबंधन भी निशाने पर
पैरामाउंट गोल्फ फॉरेस्ट टीम के सदस्य अशोक चौधरी ने दोनों घटनाओं को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल सिक्योरिटी एजेंसी की विफलता नहीं है, बल्कि मेंटेनेंस व्यवस्था और JLL प्रबंधन की भी गंभीर जिम्मेदारी बनती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षा मानकों का पालन प्रभावी ढंग से नहीं किया जा रहा है। यदि गेट मैनेजमेंट, सीसीटीवी निगरानी, गश्त और प्रवेश नियंत्रण जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं मजबूत होतीं, तो अपराधियों के लिए वारदात करना इतना आसान नहीं होता।
‘हाई-प्रोफाइल सोसाइटी में ऐसी घटनाएं बेहद चिंताजनक’
एडवोकेट गौरव शर्मा ने कहा कि जिस सोसाइटी को सुरक्षित और आधुनिक आवासीय परिसर के रूप में प्रचारित किया जाता है, वहां इस तरह की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं।
उन्होंने कहा कि सुबह चार बजे महिला के साथ कथित रूप से हथियार दिखाकर चेन छीनी जाना और उसी दिन बड़ी चोरी होना सुरक्षा तंत्र की गंभीर कमजोरी को उजागर करता है। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में और भी गंभीर अपराध हो सकते हैं।
AOA गठन की मांग ने पकड़ा जोर
शिव मंदिर समिति के अध्यक्ष अरविंद अहलावत ने कहा कि केवल सिक्योरिटी एजेंसी बदल देने से समस्या का समाधान नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि हर बड़ी घटना के बाद नई एजेंसी नियुक्त कर दी जाती है, लेकिन मूल समस्याएं जस की तस बनी रहती हैं। उन्होंने मांग की कि बिल्डर तत्काल Apartment Owners Association (AOA) के गठन की औपचारिक घोषणा करे और चुनाव की स्पष्ट समय-सीमा सार्वजनिक करे।
उनका कहना है कि जब तक सोसाइटी का संचालन और निर्णय लेने की शक्ति निवासियों के चुने हुए प्रतिनिधियों के हाथ में नहीं आएगी, तब तक सुरक्षा व्यवस्था में स्थायी सुधार संभव नहीं है।
एफआईआर में जिम्मेदार अधिकारियों के नाम जोड़ने की मांग
सोसाइटी निवासी इंदु सोनी ने कहा कि यदि इस मामले में भी केवल औपचारिक कार्रवाई हुई और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय नहीं की गई, तो एफआईआर में बिल्डर कंपनी के जिम्मेदार निदेशकों और संबंधित अधिकारियों के नाम भी शामिल किए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि जवाबदेही तय किए बिना सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की उम्मीद करना व्यर्थ होगा।
निष्पक्ष जांच और सुरक्षा ऑडिट की मांग
निवासी राजश्री विष्ट और गौरव सिंह ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि कहीं किसी स्तर पर गंभीर लापरवाही या संभावित मिलीभगत तो नहीं रही।
उन्होंने कहा कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस और निर्णायक कार्रवाई की आवश्यकता है। यदि सुरक्षा व्यवस्था की निष्पक्ष समीक्षा नहीं हुई तो भविष्य में और बड़ी घटनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता।
निवासियों में बढ़ी असुरक्षा, बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा
लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद पैरामाउंट गोल्फ फॉरेस्ट के निवासी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा किसी भी रिहायशी सोसाइटी की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
निवासियों का मानना है कि यदि मुख्य गेट पर कड़ी निगरानी, डिजिटल विजिटर वेरिफिकेशन, सभी सीसीटीवी कैमरों की नियमित मॉनिटरिंग, 24 घंटे प्रभावी पेट्रोलिंग और सुरक्षा कर्मियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए तो ऐसी घटनाओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।
अब पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
दो बड़ी घटनाओं के बाद अब पूरे मामले पर पुलिस और प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। सोसाइटी के लोगों ने मांग की है कि दोनों मामलों की गंभीरता से जांच कर जल्द से जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए। साथ ही पूरी सुरक्षा व्यवस्था का स्वतंत्र ऑडिट कर यह भी तय किया जाए कि आखिर चूक कहां हुई और उसकी जिम्मेदारी किसकी है।
फिलहाल पैरामाउंट गोल्फ फॉरेस्ट में फैली दहशत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल ऊंची इमारतें, आधुनिक सुविधाएं और हाई-प्रोफाइल पहचान किसी सोसाइटी को सुरक्षित नहीं बना सकतीं। सुरक्षा तभी प्रभावी मानी जाएगी जब निवासी स्वयं को निडर महसूस करें। एक ही दिन में हुई दो गंभीर वारदातों ने यह संदेश दे दिया है कि अब केवल दावों से काम नहीं चलेगा, बल्कि जवाबदेही तय करते हुए सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह मजबूत करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुकी है।














