“वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में भारत का नया विकास मॉडल”
फ्रांस के एवियन में आयोजित G7 Summit 2026 के मंच से प्रधानमंत्री Narendra Modi ने वैश्विक विकास, आर्थिक सहयोग और मानव-केंद्रित प्रगति के लिए भारत का नया ‘IMPACT Vision’ प्रस्तुत किया। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब दुनिया भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान, ऊर्जा सुरक्षा, बढ़ती संरक्षणवादी नीतियों और कौशल असंतुलन जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट संदेश दिया कि 21वीं सदी में विकास का मूल्यांकन केवल सकल घरेलू उत्पाद (GDP), निर्यात या व्यापारिक आंकड़ों के आधार पर नहीं किया जा सकता। वास्तविक विकास वही है, जिसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और जो वैश्विक स्तर पर समावेशी, टिकाऊ तथा न्यायसंगत आर्थिक अवसरों का निर्माण करे।
क्या है IMPACT Vision?
IMPACT (International Mobilisation Partnership for Accelerating Connectivity and Trade) एक प्रस्तावित वैश्विक ढांचा है, जिसका उद्देश्य देशों, क्षेत्रों और महाद्वीपों के बीच आर्थिक, तकनीकी और मानवीय जुड़ाव को मजबूत करना है।
इस पहल के पांच प्रमुख स्तंभ हैं:
वैश्विक व्यापार गलियारों का विस्तार
ऊर्जा और डिजिटल कनेक्टिविटी को बढ़ावा
निवेश और विनिर्माण सहयोग को प्रोत्साहन
रोजगार सृजन और कौशल विकास
सुरक्षित एवं विविधीकृत आपूर्ति श्रृंखलाओं का निर्माण
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था केवल वस्तुओं के आदान-प्रदान पर आधारित नहीं होगी, बल्कि डेटा, डिजिटल सेवाओं, हरित ऊर्जा, प्रतिभा और नवाचार के निर्बाध प्रवाह पर निर्भर करेगी।
IMEC: वैश्विक कनेक्टिविटी का नया मॉडल
प्रधानमंत्री मोदी ने India-Middle East-Europe Economic Corridor (IMEC) को भविष्य के आर्थिक गलियारों का आदर्श मॉडल बताया।
यह परियोजना भारत, मध्य पूर्व और यूरोप को रेल, बंदरगाह, डिजिटल नेटवर्क, ऊर्जा अवसंरचना और लॉजिस्टिक्स श्रृंखलाओं के माध्यम से जोड़ने की परिकल्पना करती है।
भारत का मानना है कि IMEC केवल एक परिवहन परियोजना नहीं, बल्कि यह:
वैश्विक व्यापार लागत को कम करेगा।
आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक लचीला बनाएगा।
ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा।
हरित हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा सहयोग को गति देगा।
वैश्विक दक्षिण के देशों को नए आर्थिक अवसर प्रदान करेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस गलियारे को अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और प्रशांत द्वीपीय देशों तक विस्तारित करने का सुझाव भी दिया, जिससे विकास के लाभ व्यापक स्तर पर साझा किए जा सकें।
भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता: रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय
G7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने António Costa और Ursula von der Leyen के साथ उच्चस्तरीय बैठक की।
बैठक में भारत और European Union के बीच संपन्न मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया गया।
दोनों पक्षों ने इस समझौते पर शीघ्र हस्ताक्षर और प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया।
विशेषज्ञों के अनुसार यह समझौता:
भारत और यूरोप के बीच व्यापार को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।
विनिर्माण, प्रौद्योगिकी और सेवाओं में निवेश बढ़ाएगा।
रोजगार के नए अवसर सृजित करेगा।
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के विविधीकरण को गति देगा।
भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच आर्थिक स्थिरता को मजबूत करेगा।
भारत को वैश्विक विनिर्माण और निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।
At the G7 Summit in Evian, addressed the Outreach Session on ‘Reviving a Balanced, Shared and Sustainable Economic Growth for All.’ It is good that the French G7 Presidency has given importance to this topic.
The reality today is- when it comes to growth, the question should… pic.twitter.com/qGQpCLbQPA
— Narendra Modi (@narendramodi) June 17, 2026
Global Skills Partnership: जनसांख्यिकीय संतुलन का समाधान
प्रधानमंत्री मोदी ने विकसित देशों में बढ़ती वृद्ध आबादी और वैश्विक दक्षिण के युवा कार्यबल के बीच बढ़ती खाई को पाटने के लिए ‘Global Skills Partnership’ का प्रस्ताव भी रखा।
इस पहल के तहत:
वैश्विक स्तर पर कौशल मानकों का समन्वय किया जाएगा।
प्रतिभा मैपिंग और कौशल प्रमाणन को बढ़ावा मिलेगा।
प्रशिक्षित मानव संसाधनों की सुरक्षित और व्यवस्थित अंतरराष्ट्रीय आवाजाही सुनिश्चित होगी।
स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी, विनिर्माण और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में कौशल की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाया जाएगा।
भारत, दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में से एक होने के कारण, इस पहल में केंद्रीय भूमिका निभाने की स्थिति में है।
वैश्विक दक्षिण की आवाज के रूप में उभरता भारत
G7 के मंच से भारत ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि वह केवल दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक नहीं, बल्कि वैश्विक चुनौतियों के समाधान में सक्रिय भागीदार भी है।
IMPACT Vision भारत की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत देश:
वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं को प्रमुखता दे रहा है।
बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार की मांग कर रहा है।
विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण में योगदान दे रहा है।
डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और हरित विकास मॉडल को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा दे रहा है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि IMPACT Vision को व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिलता है, तो यह वैश्विक आर्थिक व्यवस्था को अधिक संतुलित, समावेशी और टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
ऐसे समय में, जब दुनिया व्यापारिक प्रतिस्पर्धा, भू-राजनीतिक ध्रुवीकरण और आर्थिक अनिश्चितताओं से जूझ रही है, भारत ने G7 मंच से विकास का एक वैकल्पिक मॉडल प्रस्तुत किया है—एक ऐसा मॉडल, जिसमें कनेक्टिविटी, कौशल, साझेदारी और मानव कल्याण को आर्थिक प्रगति का केंद्र बनाया गया है।














