#BuxarBridge: बिहार के बक्सर में करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित इताढ़ी रोड ओवरब्रिज (ROB) उद्घाटन के मात्र चार दिन बाद ही गंभीर संरचनात्मक विफलता का शिकार हो गया। पुल के एक पियर (स्तंभ) में क्षति आने के बाद प्रशासन को तत्काल यातायात रोकना पड़ा और क्षतिग्रस्त हिस्से को प्लेट लगाकर अस्थायी रूप से सुरक्षित करने का प्रयास किया गया। यह घटना केवल एक तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि सरकारी परियोजनाओं की गुणवत्ता, निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
26.40 करोड़ रुपये की परियोजना पर बड़े सवाल
बक्सर, इताढ़ी और धनसोई क्षेत्र की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के उद्देश्य से लगभग 26.40 करोड़ रुपये की लागत से इस पुल का निर्माण कराया गया था। लेकिन उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद इसकी संरचनात्मक कमजोरी सामने आना इस बात का संकेत है कि निर्माण कार्य, गुणवत्ता परीक्षण और सुरक्षा मानकों में कहीं न कहीं गंभीर चूक हुई है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि परियोजना वर्षों तक देरी का शिकार रही और इसके दौरान कई बार शिलान्यास एवं उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित किए गए। अब पुल की यह स्थिति लोगों के उस संदेह को और मजबूत कर रही है कि परियोजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और गुणवत्ता नियंत्रण की कमी रही हो सकती है।
क्या यह भ्रष्टाचार, घटिया निर्माण सामग्री या लापरवाही का परिणाम है?
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी पुल का उद्घाटन के कुछ दिनों के भीतर क्षतिग्रस्त होना सामान्य घटना नहीं मानी जा सकती। ऐसे मामलों में निम्नलिखित बिंदुओं की जांच अत्यंत आवश्यक है:
✔ निर्माण सामग्री की गुणवत्ता क्या निर्धारित मानकों के अनुरूप थी?
✔ क्या निर्माण कार्य का स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट कराया गया था?
✔ क्या कार्य पूर्ण होने के बाद पर्याप्त लोड टेस्टिंग और सुरक्षा परीक्षण किए गए?
✔ ठेकेदार, निर्माण एजेंसी और निगरानी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई या नहीं?
✔ क्या परियोजना में वित्तीय अनियमितता अथवा भ्रष्टाचार की कोई भूमिका रही?
बक्सर: जिले में हाल ही में शुरू हुए इटाढ़ी गुमटी रेल ओवरब्रिज का एक स्लैब धंस गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, ओवरब्रिज के पांचवें पाये के ऊपर का स्लैब अचानक नीचे धंस गया, जिससे निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।#Buxar #BiharNews #RailOverBridge #BreakingNews… pic.twitter.com/kIEmFOUny2
— FirstBiharJharkhand (@firstbiharnews) June 5, 2026
जनता की सुरक्षा सबसे बड़ा प्रश्न
पुल के क्षतिग्रस्त होने से हजारों लोगों की दैनिक आवाजाही प्रभावित हुई है। यदि यह घटना पुल पर भारी यातायात के दौरान होती, तो बड़ा जान-माल का नुकसान भी हो सकता था। यही कारण है कि यह मामला केवल एक निर्माण परियोजना की विफलता नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन गया है।
उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग
अब स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों की ओर से इस पूरे मामले की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज हो रही है। लोगों का कहना है कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में जनता के पैसे और लोगों की सुरक्षा के साथ इस प्रकार का खिलवाड़ न हो।
बड़ा सवाल
जब करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए पुल उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद जवाब देने लगें, तो यह केवल एक निर्माण दोष नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था की जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न बन जाता है।
क्या बिहार और देशभर में बन रही आधारभूत संरचना परियोजनाओं की गुणवत्ता जांच के लिए और अधिक कठोर व्यवस्था की आवश्यकता है?
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