Sunday, May 31, 2026
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राजीव कृष्ण: इंजीनियरिंग के छात्र से उत्तर प्रदेश के स्थायी DGP तक, जानिए पूरा जीवन परिचय और प्रशासनिक सफर

लखनऊ : करीब चार वर्षों के इंतजार के बाद उत्तर प्रदेश को आखिरकार अपना पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक (DGP) मिल गया है। वर्ष 1991 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण को उत्तर प्रदेश का स्थायी डीजीपी नियुक्त किया गया है। उन्होंने कार्यवाहक व्यवस्था की लंबी अवधि का अंत करते हुए प्रदेश पुलिस की कमान संभाल ली है। इससे पहले वे लगभग एक वर्ष तक कार्यवाहक डीजीपी के रूप में जिम्मेदारी निभा रहे थे।

राजीव कृष्ण का नाम उत्तर प्रदेश पुलिस के उन अधिकारियों में गिना जाता है जिन्होंने फील्ड पुलिसिंग, प्रशासनिक नेतृत्व, भर्ती प्रक्रिया, विजिलेंस और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे लगभग हर महत्वपूर्ण क्षेत्र में अपनी कार्यकुशलता का परिचय दिया है। तीन दशक से अधिक लंबे अनुभव और साफ-सुथरी छवि के कारण उन्हें प्रदेश पुलिस का सर्वोच्च पद सौंपा गया है।

शुरुआती जीवन और शिक्षा

राजीव कृष्ण का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ जहां शिक्षा और प्रशासनिक सेवाओं को विशेष महत्व दिया जाता था। बचपन से ही उनकी रुचि विज्ञान और तकनीक में रही। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री प्राप्त की।

कई रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने IIT रुड़की (तत्कालीन यूनिवर्सिटी ऑफ रुड़की) से इंजीनियरिंग शिक्षा हासिल की। तकनीकी विषयों में गहरी रुचि रखने वाले राजीव कृष्ण ने कॉर्पोरेट क्षेत्र की बजाय देश सेवा का रास्ता चुना और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा की तैयारी शुरू की।

UPSC में सफलता और IPS में चयन

कड़ी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने वर्ष 1991 में UPSC सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए चयनित हुए। उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर आवंटित किया गया।

एक युवा पुलिस अधिकारी के रूप में उन्होंने शुरुआत से ही अपराध नियंत्रण, अनुशासन और प्रभावी प्रशासनिक कार्यशैली की छाप छोड़ी। वरिष्ठ अधिकारियों के बीच उनकी पहचान एक मेहनती और परिणाम देने वाले अधिकारी के रूप में बनने लगी।

पारिवारिक पृष्ठभूमि

राजीव कृष्ण का परिवार प्रशासनिक सेवाओं से जुड़ा माना जाता है। उनकी पत्नी मीनाक्षी सिंह भारतीय राजस्व सेवा (IRS) की वरिष्ठ अधिकारी हैं। परिवार का प्रशासनिक अनुभव और शैक्षणिक वातावरण उनके व्यक्तित्व और कार्यशैली में भी झलकता है।

पुलिस सेवा का लंबा और प्रभावशाली सफर

करीब 35 वर्षों के करियर में राजीव कृष्ण ने उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण जिलों और विभागों में जिम्मेदारी संभाली।

प्रमुख पद और जिम्मेदारियां

SSP आगरा

SSP नोएडा

SSP लखनऊ

DIG लखनऊ रेंज

IG लखनऊ जोन

ADG आगरा जोन

IG (ऑपरेशन), BSF

DG विजिलेंस

अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड

कार्यवाहक DGP, उत्तर प्रदेश

पूर्णकालिक DGP, उत्तर प्रदेश

आगरा में अपराधियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई

वर्ष 2004 में आगरा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के रूप में उनकी तैनाती के दौरान उन्होंने अपहरण, गैंगवार और संगठित अपराध के खिलाफ बड़े अभियान चलाए।

चंबल और बीहड़ क्षेत्रों में सक्रिय अपराधियों पर की गई कार्रवाई ने उन्हें एक मजबूत फील्ड अधिकारी की पहचान दिलाई। अपराध नियंत्रण के उनके मॉडल की उस समय काफी चर्चा हुई थी।

नोएडा और लखनऊ में प्रशासनिक दक्षता

नोएडा और लखनऊ जैसे संवेदनशील जिलों में कप्तान रहते हुए उन्होंने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ पुलिसिंग में कई सुधारात्मक कदम उठाए।

वीआईपी मूवमेंट, बड़े धार्मिक आयोजनों, संवेदनशील मामलों और अपराध नियंत्रण के दौरान उनकी प्रशासनिक क्षमता खुलकर सामने आई। यही अनुभव बाद में उनके करियर की बड़ी ताकत बना।

BSF में राष्ट्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारी

राजीव कृष्ण ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) में IG (ऑपरेशन) के रूप में भी सेवाएं दीं। इस दौरान उन्होंने सीमा सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों पर काम किया।

इस अनुभव ने उन्हें राज्य पुलिसिंग से आगे बढ़कर राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक दृष्टिकोण से सोचने का अवसर दिया।

विजिलेंस विभाग में अहम भूमिका

DG विजिलेंस के रूप में उन्होंने भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की निगरानी और जांच प्रणाली को मजबूत करने का प्रयास किया। प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी गई।

भर्ती परीक्षा को निष्पक्ष कराने से बढ़ा कद

उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में राजीव कृष्ण की भूमिका बेहद अहम रही।

पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा पेपर लीक विवाद के बाद सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती निष्पक्ष परीक्षा कराने की थी। राजीव कृष्ण के नेतृत्व में भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी, व्यवस्थित और तकनीकी रूप से सुरक्षित बनाया गया।

लाखों अभ्यर्थियों वाली इस परीक्षा को सफलतापूर्वक सम्पन्न कराना उनकी सबसे बड़ी प्रशासनिक उपलब्धियों में गिना जाता है। इसी सफलता ने उन्हें डीजीपी पद का सबसे मजबूत दावेदार बना दिया।

तकनीक आधारित पुलिसिंग के समर्थक

इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि होने के कारण राजीव कृष्ण हमेशा तकनीक आधारित पुलिसिंग के पक्षधर रहे हैं।

वे लगातार इन विषयों पर जोर देते रहे हैं—

साइबर अपराध नियंत्रण

डिजिटल जांच प्रणाली

फोरेंसिक साइंस का उपयोग

स्मार्ट पुलिसिंग

डेटा आधारित अपराध विश्लेषण

आधुनिक पुलिस प्रशिक्षण

उनका मानना है कि भविष्य की पुलिसिंग केवल बल प्रयोग नहीं बल्कि तकनीकी दक्षता पर आधारित होगी।

सम्मान और उपलब्धियां

राजीव कृष्ण को उत्कृष्ट पुलिस सेवा के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।

प्रमुख सम्मान

राष्ट्रपति पुलिस पदक (विशिष्ट सेवा)

पुलिस वीरता पदक (Gallantry Medal)

उत्कृष्ट सेवा सम्मान

विभिन्न प्रशस्ति एवं सराहना पदक

4 साल बाद मिला उत्तर प्रदेश को स्थायी DGP

वर्ष 2022 में तत्कालीन डीजीपी मुकुल गोयल के पद से हटने के बाद उत्तर प्रदेश लंबे समय तक कार्यवाहक डीजीपी व्यवस्था के सहारे चलता रहा।

इस मुद्दे पर विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठाता रहा। ऐसे में राजीव कृष्ण की स्थायी नियुक्ति को प्रशासनिक स्थिरता और पुलिस नेतृत्व के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री योगी की प्राथमिकताएं और नई जिम्मेदारी

राजीव कृष्ण ऐसे समय डीजीपी बने हैं जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार कानून-व्यवस्था को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बता रहे हैं।

हाल के दिनों में हुई कई सनसनीखेज हत्याओं और आपराधिक घटनाओं पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर सख्त नाराजगी जताई थी। ऐसे में नए डीजीपी के सामने अपराध नियंत्रण सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है।

नए DGP के सामने प्रमुख चुनौतियां

महिला सुरक्षा को और मजबूत बनाना

साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण

संगठित अपराध और माफिया नेटवर्क पर कार्रवाई

पुलिस आधुनिकीकरण

पुलिस बल में तकनीकी दक्षता बढ़ाना

जनता और पुलिस के बीच भरोसा मजबूत करना

बढ़ती आपराधिक घटनाओं पर त्वरित नियंत्रण

इंजीनियरिंग के छात्र से लेकर भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी और फिर उत्तर प्रदेश पुलिस के सर्वोच्च पद तक पहुंचने का राजीव कृष्ण का सफर मेहनत, अनुशासन, ईमानदारी और प्रशासनिक दक्षता की मिसाल माना जाता है।

आगरा के बीहड़ों से लेकर नोएडा और लखनऊ की कानून-व्यवस्था, BSF में राष्ट्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारी, विजिलेंस विभाग का नेतृत्व और भर्ती परीक्षा जैसी बड़ी चुनौती को सफलतापूर्वक संभालने के बाद अब उनके हाथ में देश के सबसे बड़े राज्य की पुलिस व्यवस्था की कमान है।

अब पूरे प्रदेश की नजर इस बात पर है कि स्थायी DGP के रूप में राजीव कृष्ण कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने तथा आधुनिक पुलिसिंग के अपने विजन को किस तरह जमीन पर उतारते हैं।

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VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
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