केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने भारत-पाकिस्तान सीमा की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए बड़े बदलावों का ऐलान किया है। गुजरात के भुज में भारत-पाक सीमा पर स्थित G-7 बॉर्डर आउट पोस्ट पहुंचकर उन्होंने BSF जवानों से मुलाकात की और G-7 तथा G-13 बॉर्डर आउट पोस्ट का लोकार्पण किया। इस दौरान गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, राज्य के गृह मंत्री हर्ष संघवी और कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
BSF के शौर्य को किया नमन
BSF जवानों को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि देश की 140 करोड़ जनता के मन में सीमा सुरक्षा बल के प्रति अपार सम्मान है। उन्होंने बताया कि पिछले 60 वर्षों में BSF ने -45 डिग्री की बर्फीली चोटियों से लेकर कच्छ के +45 डिग्री तापमान वाले रेगिस्तानी क्षेत्रों, सरक्रीक और हरामी नाला जैसे दुर्गम इलाकों तक देश की सीमाओं की रक्षा की है।
उन्होंने कहा कि सीमा की सुरक्षा करते हुए करीब 2000 BSF जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया है, जिसे देश कभी नहीं भूल सकता।
Glad to have shared some time with the valiant personnel of the BSF during high-tea at the G-7 Border Outpost, in Gujarat. pic.twitter.com/i2ZppSUsXA
— Amit Shah (@AmitShah) May 29, 2026
सीमा सुरक्षा में बड़ा बदलाव, लागू होगा टेरिटोरियल सुरक्षा मॉडल
अमित शाह ने घोषणा की कि अब पारंपरिक बॉर्डर सिक्योरिटी की जगह “टेरिटोरियल सुरक्षा” का नया मॉडल लागू किया जाएगा। इसके तहत सीमा सुरक्षा को केवल BSF तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि स्थानीय जनता, प्रशासन और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को भी इसमें शामिल किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह मॉडल सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और मजबूत बनाएगा।
क्या है चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड?
गृह मंत्री ने बताया कि जल्द ही सीमा पर “चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड” तैयार किया जाएगा। इस ग्रिड में चार प्रमुख स्तंभ होंगे—
सीमा सुरक्षा बल (BSF)
स्थानीय नागरिक
सिविल प्रशासन और राज्य पुलिस
भारतीय सेना
इन सभी के समन्वय से सीमा पर हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जाएगी और किसी भी घुसपैठ या सुरक्षा चुनौती का तुरंत जवाब दिया जा सकेगा।
ड्रोन, रडार और सेंसर से होगी हाई-टेक निगरानी
अमित शाह ने कहा कि “स्मार्ट बॉर्डर सिक्योरिटी प्रोजेक्ट” के तहत हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस परियोजना के माध्यम से सीमा पर अत्याधुनिक तकनीकों को तैनात किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि ड्रोन, रडार, सेंसर, वॉच टावर और हाई-टेक सर्विलांस सिस्टम के जरिए एक लीक-प्रूफ सुरक्षा नेटवर्क तैयार किया जा रहा है, जिससे घुसपैठ और तस्करी जैसी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लग सके।
हरामी नाला और सरक्रीक में मजबूत हुआ सुरक्षा ढांचा
गृह मंत्री ने कहा कि उनके कार्यकाल की शुरुआत में हरामी नाला और सरक्रीक क्षेत्र सुरक्षा की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण माने जाते थे। लेकिन अब इन इलाकों में सुरक्षा सुविधाओं का व्यापक विस्तार किया गया है।
उन्होंने बताया कि यहां तकनीकी निगरानी प्रणाली, कनेक्टिंग रोड, वॉच टावर, जवानों के लिए बेहतर आवास और पेयजल जैसी सुविधाओं को मजबूत किया गया है।
बंगाल सीमा पर फेंसिंग का रास्ता साफ
अमित शाह ने पश्चिम बंगाल सीमा पर अधूरी फेंसिंग का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि अब जमीन उपलब्ध कराने को लेकर सहमति बन चुकी है और कुछ जमीन पहले ही उपलब्ध कराई जा चुकी है।
उन्होंने विश्वास जताया कि फेंसिंग पूरी होने के बाद बंगाल सीमा से होने वाली अवैध घुसपैठ पर काफी हद तक रोक लग जाएगी। साथ ही नदी, नालों और जंगलों के रास्ते होने वाली घुसपैठ रोकने के लिए तकनीकी फेंसिंग का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
BSF केंद्र के प्रति लोगों में बढ़ा आकर्षण
Visited the Harami Nala Area, along the India-Pakistan border, a strategically significant and sensitive zone in Gujarat. Inspected the security framework and interacted with the BSF personnel. pic.twitter.com/554OfWmFSj
— Amit Shah (@AmitShah) May 29, 2026
बनासकांठा में आम लोगों के लिए बनाए गए BSF केंद्र का उल्लेख करते हुए गृह मंत्री ने बताया कि पिछले एक महीने में 2.5 लाख से अधिक लोग इस केंद्र का दौरा कर चुके हैं।
उन्होंने कहा कि फीडबैक फॉर्म में बड़ी संख्या में महिलाओं ने यह इच्छा जताई है कि उनके बच्चे भविष्य में BSF में भर्ती होकर देश सेवा करें। जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अब इस फीडबैक सिस्टम को ऑनलाइन भी कर दिया गया है।
सीमा सुरक्षा को नई दिशा देने की तैयारी
अमित शाह के इस ऐलान को भारत की सीमा सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। आधुनिक तकनीक, स्थानीय सहभागिता और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय के जरिए सरकार सीमाओं को और अधिक सुरक्षित तथा अभेद्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।














