लखनऊ। उत्तर प्रदेश बीजेपी संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी तेज हो गई है। पार्टी के प्रदेश संगठन में नए चेहरों को जिम्मेदारी देने, क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को साधने तथा आगामी राजनीतिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए व्यापक संगठनात्मक पुनर्गठन पर चर्चा चल रही है। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश संगठन में महामंत्री, उपाध्यक्ष और मंत्रियों के पदों को लेकर मंथन अंतिम दौर में पहुंच चुका है।
बताया जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व संगठन को अधिक प्रभावी, संतुलित और चुनावी दृष्टि से मजबूत बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसी कड़ी में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और सामाजिक संतुलन को प्राथमिकता दी जा रही है।
6 क्षेत्रीय अध्यक्षों के नाम लगभग तय, जल्द हो सकती है घोषणा
सूत्रों के अनुसार बीजेपी संगठन में इस बार सात की बजाय छह महामंत्री बनाए जाने की चर्चा है। इसके साथ ही प्रदेश के छह क्षेत्रीय अध्यक्षों के नाम भी लगभग तय बताए जा रहे हैं।
पार्टी संगठन में बदलाव का उद्देश्य अलग-अलग सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व देकर संगठनात्मक मजबूती बढ़ाना माना जा रहा है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि पार्टी आने वाले समय में संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाने के लिए नई टीम तैयार कर रही है।
25 कार्यकर्ताओं के नामों पर मंथन, निगम और आयोगों में भी समायोजन संभव
सूत्रों के मुताबिक करीब 25 बीजेपी कार्यकर्ताओं के नामों पर विस्तार से चर्चा हुई है। इसके अलावा विभिन्न निगमों, आयोगों और बोर्डों में भी समायोजन को लेकर विचार-विमर्श जारी है।
माना जा रहा है कि लंबे समय से संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देकर कार्यकर्ताओं के मनोबल को मजबूत करने की रणनीति अपनाई जा सकती है।
क्षेत्रीय समीकरणों पर खास फोकस, पश्चिम से पूर्वांचल तक सामाजिक संतुलन की तैयारी
जानकारी के मुताबिक पश्चिम उत्तर प्रदेश में गुर्जर और वैश्य समाज को अधिक प्रतिनिधित्व देने पर चर्चा हुई है।
वहीं अवध क्षेत्र में ब्राह्मण चेहरों को संगठन में प्रमुख जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
ब्रज क्षेत्र में शाक्य और लोध समाज के नेताओं को अवसर मिलने की चर्चा तेज है। दूसरी तरफ वाराणसी और गोरखपुर क्षेत्र से जुड़े नामों पर भी लगभग सहमति बनने की बात सामने आ रही है।
98 संगठनात्मक जिलों में दिखेगा बदलाव, नई टीम के जरिए चुनावी तैयारी
बीजेपी प्रदेश संगठन के 98 संगठनात्मक जिलों में भी नए पदाधिकारियों की नियुक्ति होने की संभावना है। इससे बूथ स्तर से लेकर जिला स्तर तक संगठन को नई ऊर्जा देने की रणनीति दिखाई दे रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव केवल संगठन विस्तार तक सीमित नहीं होगा, बल्कि आगामी चुनावी रणनीति, सामाजिक समीकरणों और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखकर बड़ा संदेश देने की कोशिश भी हो सकती है।
अब निगाहें पार्टी नेतृत्व के अंतिम फैसले पर टिकी हैं। यदि चर्चा के अनुरूप बदलाव होते हैं, तो उत्तर प्रदेश बीजेपी संगठन में आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक संदेश देखने को मिल सकता है।














