चंद्रनाथ रथ मर्डर केस में बंगाल पुलिस की कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल
कोलकाता/अयोध्या। पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़े हाई-प्रोफाइल चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में अब एक ऐसा मोड़ आया है, जिसने बंगाल पुलिस की शुरुआती जांच पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीजेपी नेता और पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में गिरफ्तार किए गए उत्तर प्रदेश के राज सिंह को अब कोर्ट ने रिहा करने का आदेश दे दिया है।
सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि जिस समय बंगाल में चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या की गई, उस वक्त राज सिंह उत्तर प्रदेश में मौजूद था और उसके पास इसे साबित करने के लिए कई सबूत भी थे।
सीबीआई ने कोर्ट में साफ कहा कि बंगाल पुलिस ने गलत व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। इसके बाद अदालत ने राज सिंह की रिहाई का आदेश दे दिया।
क्या है पूरा मामला? चुनावी तनाव के बीच हुई थी हत्या
6 मई की रात पश्चिम बंगाल में बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी के करीबी और उनके पीए चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह हत्या उस समय हुई जब बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके थे और राज्य में राजनीतिक तनाव चरम पर था।
बताया जाता है कि यह घटना शुभेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण से ठीक तीन दिन पहले हुई थी। हत्या के बाद बंगाल पुलिस पर जल्द से जल्द आरोपियों को पकड़ने का भारी दबाव था।
इसी बीच 11 मई को बंगाल पुलिस की एक विशेष टीम ने उत्तर प्रदेश से राज सिंह, मयंक मिश्रा और विक्की मौर्य को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का दावा था कि ये लोग हत्या की साजिश और वारदात में शामिल थे।
CBI जांच में पलट गई पूरी कहानी
बाद में कोर्ट ने इस संवेदनशील मामले की जांच राज्य पुलिस से लेकर Central Bureau of Investigation (CBI) को सौंप दी।
सीबीआई ने जब मोबाइल लोकेशन, यात्रा रिकॉर्ड, होटल एंट्री, सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयान खंगाले तो मामला पूरी तरह बदल गया।
जांच एजेंसी को पता चला कि हत्या के समय राज सिंह पश्चिम बंगाल में था ही नहीं। उसके यूपी में मौजूद होने के कई ठोस प्रमाण मिले।
सीबीआई ने अदालत में याचिका दाखिल कर कहा कि बंगाल पुलिस ने जल्दबाजी में गलत व्यक्ति को आरोपी बना दिया। कोर्ट ने सीबीआई की दलील स्वीकार करते हुए राज सिंह को तुरंत रिहा करने का आदेश दे दिया।
“मेरा बेटा निर्दोष है…” — मां ने बताई गिरफ्तारी की पूरी कहानी
राज सिंह की मां जमवंती सिंह ने बेटे की गिरफ्तारी के बाद मीडिया से बातचीत में भावुक बयान दिया।
उन्होंने बताया कि 7 मई को पूरा परिवार उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य पप्पू सिंह की बेटी की शादी में शामिल होने के लिए लखनऊ गया था। शादी समारोह के बाद वे लोग एक गेस्ट हाउस में रुके थे।
परिवार के अनुसार अगली सुबह वे अंबेडकर नगर पहुंचे, जहां मखदूम अशरफ बाबा के मंदिर में दर्शन किए गए। इसके बाद परिवार अयोध्या पहुंचा।
जमवंती सिंह के मुताबिक:
“हम लोग अयोध्या में दर्शन करके लौट रहे थे। रास्ते में खाना खाने के लिए रुके थे। तभी पुलिस आई और राज को अपने साथ ले गई। हमें समझ ही नहीं आया कि आखिर उसे क्यों पकड़ा गया।”
परिवार लगातार दावा करता रहा कि राज सिंह को राजनीतिक दबाव और जल्दबाजी में फंसाया गया।
यूपी में मजबूत राजनीतिक पकड़ की भी चर्चा
सूत्रों के मुताबिक राज सिंह का परिवार उत्तर प्रदेश के कई राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में प्रभाव रखता है।
बताया जा रहा है कि परिवार ने न्याय की मांग को लेकर कई वरिष्ठ अधिकारियों और नेताओं से संपर्क किया था। इसके बाद यूपी पुलिस की खुफिया शाखा और स्पेशल टास्क फोर्स ने भी परिवार के दावों की जांच की।
प्रारंभिक स्तर पर उन्हें भी यह लगा कि राज सिंह हत्या के समय उत्तर प्रदेश में मौजूद था।
अब किन लोगों पर है CBI का फोकस?
सीबीआई फिलहाल इस हत्याकांड की गहराई से जांच कर रही है। एजेंसी ने हाल ही में बलिया से राजकुमार सिंह और वाराणसी से विनय राय उर्फ पंपम को गिरफ्तार किया है।
सूत्रों का कहना है कि एजेंसी अब हत्या की साजिश, राजनीतिक कनेक्शन और शूटर नेटवर्क की जांच कर रही है।
यह भी जांच की जा रही है कि क्या शुरुआती जांच को जानबूझकर भटकाया गया था या फिर राजनीतिक दबाव में जल्दबाजी में गिरफ्तारियां की गईं।
बंगाल पुलिस पर उठे बड़े सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल बंगाल पुलिस की जांच प्रक्रिया पर खड़ा हो गया है।
क्या राजनीतिक दबाव में जल्दबाजी में गिरफ्तारियां हुईं?
क्या बिना पर्याप्त सबूत के यूपी से लोगों को उठाया गया?
अगर सीबीआई जांच नहीं होती तो क्या एक निर्दोष व्यक्ति लंबे समय तक जेल में रहता?
इन सवालों ने अब इस हत्याकांड को सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि राजनीतिक और जांच एजेंसियों की विश्वसनीयता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बना दिया है।
राजनीतिक गलियारों में तेज हुई हलचल
चंद्रनाथ रथ हत्याकांड पहले से ही बंगाल की राजनीति में बड़ा मुद्दा बना हुआ था। अब राज सिंह की रिहाई के बाद विपक्ष बंगाल पुलिस और राज्य सरकार को घेरने की तैयारी में है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले समय में बंगाल की राजनीति में बड़ा विवाद बन सकता है, क्योंकि इसमें जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली और राजनीतिक हस्तक्षेप दोनों पर सवाल उठ रहे हैं।














