Thursday, May 21, 2026
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“काफिला रुका, मंत्री उतरे, बच्चों को उठाया…” — हाईवे हादसे के बीच कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान की संवेदनशीलता ने जीता दिल

झांसी जाते समय हाईवे पर दिखा हादसा, मंत्री ने रोका काफिला और खुद पहुंचे घायल बच्चों के बीच

झांसी/उत्तर प्रदेश। सत्ता और संवेदनशीलता साथ-साथ चलें तो तस्वीरें सिर्फ खबर नहीं बनतीं, मिसाल बन जाती हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान ने ऐसा ही एक उदाहरण पेश किया, जब झांसी जाते समय रास्ते में एक दर्दनाक सड़क हादसा देखकर उन्होंने अपना काफिला रुकवा दिया और सीधे घायल बच्चों के बीच पहुंच गए।

बताया जा रहा है कि मंत्री दारा सिंह चौहान झांसी की ओर जा रहे थे। इसी दौरान सिंगूर नदी के पास मावर गांव के नजदीक हाईवे पर एक स्कूली बस दुर्घटनाग्रस्त हालत में खड़ी दिखाई दी। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल था। घायल बच्चे दर्द से चीख-पुकार कर रहे थे और आसपास मौजूद लोग मदद की कोशिश कर रहे थे।

ऐसे हालात देखकर मंत्री ने बिना देर किए अपना काफिला रुकवा दिया।

गाड़ी से उतरकर पैदल पहुंचे घटनास्थल तक

मंत्री दारा सिंह चौहान ने सिर्फ दूर से जानकारी लेने तक खुद को सीमित नहीं रखा। वह अपनी गाड़ी से उतरे और पैदल चलकर घटनास्थल तक पहुंचे।

हाईवे पार करके वह उस तरफ गए जहां घायल बच्चे मौजूद थे। बताया जा रहा है कि उन्होंने मौके की स्थिति का खुद जायजा लिया और अधिकारियों को तुरंत राहत कार्य तेज करने के निर्देश दिए।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मंत्री ने अपने सुरक्षाकर्मियों से साफ कहा कि घायल बच्चों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जाए ताकि इलाज में देरी न हो।


DM-SP को दिए तत्काल निर्देश

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मंत्री ने जिला प्रशासन को भी सक्रिय किया।

उन्होंने जिला अधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) को मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य तेज करने, घायलों के इलाज की व्यवस्था करने और हर जरूरी मदद उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

सूत्रों के अनुसार प्रशासनिक अमला भी इसके बाद तेजी से हरकत में आया और घायलों को चिकित्सा सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया तेज की गई।


‘संवेदनशीलता की तस्वीर’ बन गया यह घटनाक्रम

अक्सर सड़क हादसों के दौरान बड़े काफिले गुजर जाते हैं और लोग सिर्फ अफसोस जताकर आगे बढ़ जाते हैं। लेकिन इस घटना में लोगों की चर्चा इस बात को लेकर ज्यादा रही कि मंत्री चाहते तो अपनी गाड़ी में बैठे-बैठे जानकारी लेकर आगे निकल सकते थे। वह चाहें तो अधिकारियों को फोन कर आगे बढ़ जाते। धूप से बचने के लिए गाड़ी से बाहर न निकलना भी उनके लिए आसान विकल्प था। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। वह खुद घायल बच्चों तक पहुंचे, हालात देखे और राहत कार्य की निगरानी की।

सोशल मीडिया पर हो रही चर्चा

घटना के बाद स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर मंत्री की इस संवेदनशीलता की चर्चा तेज हो गई। कई लोगों ने इसे ‘जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी निभाने का उदाहरण’ बताया।

लोगों का कहना है कि संकट के समय संवेदनशील व्यवहार ही जनप्रतिनिधियों को जनता से जोड़ता है।

हादसे में घायल बच्चों का इलाज जारी है। प्रशासन की ओर से राहत कार्य और मामले की जांच भी आगे बढ़ाई जा रही है।

यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि कभी-कभी संवेदनशीलता का एक छोटा कदम लोगों के दिलों में बड़ी जगह बना देता है।

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