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‘साइलेंट टेररिज्म’ पर एलजी का युद्धघोष: मनोज सिन्हा बोले—नशे के सौदागर देश के दुश्मन, अब एक-एक नेटवर्क होगा ध्वस्त

जम्मू-कश्मीर में ड्रग माफिया के खिलाफ आर-पार की लड़ाई, 22 दिन में जनआंदोलन बना ‘नशा मुक्त अभियान’; 500 से ज्यादा तस्कर गिरफ्त में

श्रीनगर,: जम्मू-कश्मीर में तेजी से फैलते नशे के कारोबार के खिलाफ उपराज्यपाल Manoj Sinha ने अब तक का सबसे कड़ा और निर्णायक संदेश देते हुए ड्रग तस्करी को “साइलेंट टेररिज्म” करार दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि नशीले पदार्थों का यह अवैध धंधा केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि युवाओं, परिवारों और पूरे समाज को भीतर से खोखला करने की सुनियोजित साजिश है।

रविवार को TRC Football Ground में ‘नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान’ के तहत आयोजित विशाल जनसभा और पदयात्रा में एलजी सिन्हा ने घोषणा की—
“नशे के तस्कर देश के दुश्मन हैं। इन्हें आतंकियों की तरह देखा जाएगा और किसी को बख्शा नहीं जाएगा।”


‘बहुत हुआ, अब और नहीं’—नशे के खिलाफ जनता का उफान

एलजी सिन्हा ने कहा कि 11 अप्रैल से शुरू किया गया 100 दिन का ‘नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान’ महज सरकारी कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि 22 दिनों के भीतर यह जनांदोलन का रूप ले चुका है।
उन्होंने बताया कि हर जिला, हर कस्बा, हर मोहल्ला और हर गांव में अब लोग खुलकर नशे के खिलाफ खड़े हो रहे हैं। माता-पिता, शिक्षक, धार्मिक नेता, महिलाएं, युवा क्लब और सामाजिक संगठन इस मुहिम में जुड़ चुके हैं।

सिन्हा ने भावुक स्वर में कहा—

“यह सिर्फ शपथ नहीं, उन मां-बाप की चीख है जिन्होंने अपने बच्चों को नशे में बर्बाद होते देखा है। यह समाज का सामूहिक संकल्प है—बहुत हुआ, अब और नहीं होगा।”

प्रशासन के अनुसार इस अभियान में अब तक लाखों लोगों तक सीधा जनसंपर्क किया जा चुका है और हजारों नागरिक पदयात्राओं, जागरूकता कार्यक्रमों तथा नशामुक्ति शपथ में शामिल हुए हैं।


ड्रग्स नहीं, ‘नार्को-टेरर’ का जाल: आतंक की फंडिंग से जोड़ा सीधा संबंध

एलजी मनोज सिन्हा ने इस पूरे मामले को सिर्फ नशे की बिक्री तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने चेतावनी दी कि जम्मू-कश्मीर में ड्रग तस्करी के पीछे नार्को-टेरर नेटवर्क सक्रिय है, जिसका पैसा सीमा पार बैठे दुश्मनों तक पहुंचता है और वही धन आतंकवाद, हथियारों और विध्वंसक गतिविधियों को ईंधन देता है।

उन्होंने कहा—

“नशे का हर पैकेट सिर्फ एक युवक को बर्बाद नहीं करता, बल्कि आतंक की एक और गोली खरीदता है।”

प्रशासन का मानना है कि पड़ोसी क्षेत्र से संचालित नेटवर्क नए-नए तरीकों से घाटी और जम्मू संभाग के युवाओं को टारगेट कर रहे हैं।
हाल के महीनों में पुलिस और एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स द्वारा पंजाब और बाहरी राज्यों से जुड़े कई तस्करी नेटवर्क पकड़े जाने के बाद यह आशंका और मजबूत हुई है।


100 दिन का मिशन: 78 दिन बाकी, लेकिन कार्रवाई ने पकड़ी रफ्तार

11 अप्रैल से 9 जुलाई तक चलने वाले इस विशेष 100 दिवसीय मिशन के तहत प्रशासन ने तीन मोर्चों पर फोकस किया है—

1.सप्लाई चेन ध्वस्त करना

2.जनजागरण और सामुदायिक भागीदारी

3.नशे के शिकार युवाओं का पुनर्वास

एलजी ने कहा कि केवल पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी।
जब तक समाज खुद प्रशासन की आंख और कान बनकर तस्करों की सूचना नहीं देगा, तब तक यह लड़ाई अधूरी रहेगी।

उन्होंने धार्मिक नेताओं, इमामों, शिक्षकों, पंचायत प्रतिनिधियों और महिला समूहों से खुलकर सामने आने की अपील की।


सिर्फ 22 दिन में बड़ा एक्शन: सैकड़ों FIR, 500+ तस्कर गिरफ्तार

उपराज्यपाल ने अभियान की उपलब्धियों के जो आंकड़े रखे, उन्होंने इस कार्रवाई की गंभीरता स्पष्ट कर दी।

11 अप्रैल से 2 मई के बीच—

481 से अधिक FIR दर्ज

518 नशीले पदार्थ तस्कर गिरफ्तार

24 ड्रग्स से जुड़ी संपत्तियां जब्त

325 वाहन सीज

लगभग 300 ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित

5 पासपोर्ट रद्द

3000 से अधिक मेडिकल/दवा दुकानों का निरीक्षण

107 लाइसेंस सस्पेंड

इससे पहले भी प्रशासनिक सूत्रों ने बताया था कि NDPS एक्ट के तहत सैकड़ों मामलों में वित्तीय संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और ड्रग्स से बने आलीशान मकानों की पहचान की जा रही है, जिन्हें एलजी ने “Narco Palaces” कहा।


‘नार्को पैलेस’ ढहेंगे, बैंक खाते फ्रीज होंगे, फोटो गैलरी लगेगी

मनोज सिन्हा ने संकेत दिया कि अब कार्रवाई केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी।
उन्होंने कहा—

तस्करों की संपत्तियां जब्त होंगी

बैंक खातों की निगरानी होगी

आर्थिक लेनदेन की चेन तोड़ी जाएगी

फरार आरोपियों के लुकआउट नोटिस जारी होंगे

पुलिस थानों में तस्करों की फोटो गैलरी लगाई जाएगी

उनका संदेश साफ था—
“जो नशे से साम्राज्य बना रहे हैं, उनके महल भी गिरेंगे और नेटवर्क भी।”


नशेड़ी अपराधी नहीं, पीड़ित; असली निशाना तस्कर

एलजी ने एक अहम मानवीय पक्ष भी रखा।
उन्होंने कहा कि जो युवा नशे के जाल में फंस चुके हैं, उन्हें अपराधी नहीं बल्कि पीड़ित मानकर इलाज, काउंसलिंग और पुनर्वास दिया जाएगा।
असली सख्ती उन लोगों पर होगी जो युवाओं की जिंदगी बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं।

यानी प्रशासन की नीति दोहरी है—

पीड़ित को सहारा,
तस्कर को प्रहार।


जनता से सीधी अपील: ‘प्रशासन की आंख और कान बनें’

एलजी सिन्हा ने कहा कि अब यह केवल पुलिस की लड़ाई नहीं रही।
उन्होंने लोगों से मोहल्ला स्तर पर नशा बेचने वालों की सूची तैयार करने, संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देने और सामाजिक बहिष्कार का माहौल बनाने की अपील की।

उनका कहना था—

“जम्मू-कश्मीर को बचाना है तो समाज को चुप्पी तोड़नी होगी।”

यह संदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जमीनी स्तर पर कई परिवार नशे की वजह से आर्थिक बर्बादी, घरेलू हिंसा, अपराध और सामाजिक विघटन झेल रहे हैं।


जम्मू-कश्मीर में अब नशे के खिलाफ निर्णायक जंग

मनोज सिन्हा के ताजा बयान ने स्पष्ट कर दिया है कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन अब ड्रग्स को सिर्फ स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि सुरक्षा और सामाजिक अस्तित्व के संकट के रूप में देख रहा है।

“साइलेंट टेररिज्म” शब्द का प्रयोग बताता है कि सरकार इस लड़ाई को उसी गंभीरता से लड़ना चाहती है, जैसी आतंकवाद के खिलाफ लड़ी जाती है।

यदि यह अभियान जनभागीदारी के साथ इसी रफ्तार से चला, तो जम्मू-कश्मीर में नशे के नेटवर्क पर पहली बार इतना व्यापक और संरचनात्मक प्रहार संभव है।

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VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
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