“बीजेपी-जेडीयू बराबरी पर, सहयोगी दलों को भी हिस्सेदारी; बंगाल चुनाव नतीजों के बाद कभी भी हो सकती है नई टीम की घोषणा”
पटना/नई दिल्ली, : बिहार की बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। मुख्यमंत्री Samrat Choudhary की शनिवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के साथ हुई अहम बैठक के बाद राज्य की नई कैबिनेट के स्वरूप पर लगभग अंतिम सहमति बन गई है। सूत्रों के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (यू) के बीच 15-15 मंत्रियों के प्रतिनिधित्व के फार्मूले पर सहमति बनी है, जबकि NDA के अन्य सहयोगी दलों को भी मंत्रिमंडल में समुचित स्थान दिया जाएगा।
दिल्ली में हाईलेवल बैठकों से तेज हुई सियासी हलचल
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की दिल्ली यात्रा को बिहार की राजनीति में बेहद अहम माना जा रहा है।
गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात से पहले जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन के बीच भी अलग बैठक हो चुकी थी। इसके अतिरिक्त सम्राट चौधरी ने दिल्ली रवाना होने से पहले पूर्व मुख्यमंत्री Nitish Kumar से भी लंबी चर्चा की थी। राजनीतिक जानकार इसे कैबिनेट विस्तार से पहले अंतिम रणनीतिक समन्वय मान रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि दिल्ली में भाजपा शीर्ष नेतृत्व के साथ मंत्रियों के नाम, क्षेत्रीय संतुलन, जातीय समीकरण और सहयोगी दलों की हिस्सेदारी पर विस्तार से चर्चा हुई है।
क्या है 15-15 का फॉर्मूला?
NDA सूत्रों के मुताबिक प्रस्तावित कैबिनेट विस्तार में:
भाजपा को 15 सीटों का कोटा,
जदयू को 15 सीटों का कोटा,
जबकि शेष में सहयोगी दलों को प्रतिनिधित्व
दिया जाएगा।
हालांकि इनमें कुछ स्थान पहले से शपथ ले चुके शीर्ष पदों के समायोजन के आधार पर तकनीकी रूप से 13-12 या अन्य संख्या में भी दिख सकते हैं, लेकिन राजनीतिक संदेश साफ रहेगा—
बीजेपी और जेडीयू बराबरी की साझेदारी में सरकार चलाएंगे।
यह फॉर्मूला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नई सरकार के गठन के बाद से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 29 विभाग अपने पास रखे हुए हैं और कई मंत्रालय अभी आवंटन की प्रतीक्षा में हैं।
किन सहयोगी दलों को मिलेगा मौका?
सूत्रों के अनुसार NDA के घटक दल—
Lok Janshakti Party (Ram Vilas)
Hindustani Awam Morcha
Rashtriya Lok Morcha
को भी मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।
इससे सरकार केवल भाजपा-जदयू की साझेदारी तक सीमित न रहकर व्यापक सामाजिक समीकरण का संदेश दे सकेगी। खासकर दलित, महादलित, कुशवाहा, अतिपिछड़ा और युवा वोटबैंक को साधने की रणनीति इसमें प्रमुख मानी जा रही है।
सोशल इंजीनियरिंग और 2027 की तैयारी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कैबिनेट विस्तार केवल रिक्त पद भरने की प्रशासनिक कवायद नहीं, बल्कि आने वाले चुनावी संघर्ष की जमीन तैयार करने वाला कदम है।
नई टीम में इन बिंदुओं पर खास ध्यान दिया जा रहा है—
क्षेत्रीय संतुलन (सीमांचल, मिथिलांचल, मगध, भोजपुर, तिरहुत),
जातीय प्रतिनिधित्व,
युवा चेहरे बनाम अनुभवी नेता,
महिला भागीदारी,
पिछड़ा-अतिपिछड़ा समीकरण।
सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद भाजपा पहली बार बिहार में शीर्ष नेतृत्व की भूमिका में है, इसलिए पार्टी कोई राजनीतिक असंतुलन नहीं चाहती।
रक्षा मंत्री और केंद्रीय नेताओं से भी मुलाकात के मायने
दिल्ली प्रवास के दौरान सम्राट चौधरी ने Rajnath Singh सहित अन्य केंद्रीय नेताओं से भी मुलाकात की। आधिकारिक तौर पर इसे “विकसित बिहार विजन” पर चर्चा बताया गया, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे केंद्र-राज्य समन्वय और नई सरकार की प्रशासनिक प्राथमिकताओं से भी जोड़ा जा रहा है।
इससे संकेत मिलता है कि कैबिनेट विस्तार के साथ-साथ विकास परियोजनाओं, इंफ्रास्ट्रक्चर और केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तेज क्रियान्वयन की रूपरेखा भी तैयार की जा रही है।
कब हो सकती है घोषणा?
सूत्रों का कहना है कि पश्चिम बंगाल चुनाव परिणामों के बाद किसी भी समय नई कैबिनेट की औपचारिक घोषणा की जा सकती है। कुछ रिपोर्टों में 6 मई के आसपास शपथ ग्रहण की भी सुगबुगाहट बताई गई है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
राजनीतिक संदेश क्या होगा?
इस विस्तार के बाद तीन बड़े संदेश जाएंगे—
1.NDA में सब कुछ नियंत्रण में है
बीजेपी-जेडीयू के बीच तालमेल पर लग रही अटकलों को विराम।
2.सम्राट चौधरी की टीम को पूर्ण आकार
नई सरकार को प्रशासनिक गति मिलेगी।
3.बिहार में चुनावी सोशल इंजीनियरिंग की शुरुआत
हर वर्ग को प्रतिनिधित्व देकर विपक्ष के जातीय नैरेटिव को चुनौती।
दिल्ली में अमित शाह और सम्राट चौधरी की बैठक ने यह साफ कर दिया है कि बिहार मंत्रिमंडल विस्तार अब केवल समय का सवाल है। 15-15 फॉर्मूले के जरिए भाजपा और जदयू बराबरी की साझेदारी का संदेश देंगे, जबकि सहयोगी दलों को शामिल कर NDA व्यापक राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश करेगा।
यानी बिहार की नई सत्ता टीम लगभग तय है—अब बस औपचारिक घोषणा बाकी है।














