गौतम बुद्ध नगर में आसमान छूती इमारतों के बीच रहने वाले लाखों लोगों की सुरक्षा को लेकर अब चिंता खुलकर सड़क से प्रशासनिक दफ्तरों तक पहुंच गई है। लगातार बढ़ते हाई-राइज निर्माण, हालिया अग्निकांडों और फायर सिस्टम की जमीनी हकीकत को देखते हुए गौतम बुद्ध नगर विकास समिति ने शनिवार को उत्तर प्रदेश अग्निशमन एवं आपात सेवा विभाग के अधिकारियों तथा सांसद Mahesh Sharma के कार्यालय में एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर जिले की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। समिति ने सांसद प्रतिनिधि संजय बाली के माध्यम से यह मांग रखी कि गौतम बुद्ध नगर के हजारों परिवारों की जान केवल कागजी फायर NOC के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती, बल्कि तत्काल व्यापक निरीक्षण, जवाबदेही और आधुनिक रेस्क्यू सिस्टम लागू किए जाएं। सांसद कार्यालय की ओर से आश्वासन दिया गया है कि इस पूरे मुद्दे को कमिश्नर स्तर पर उठाया जाएगा।
कागजों में NOC, जमीन पर खतरा!
समिति द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में सबसे बड़ा आरोप यह लगाया गया कि नोएडा एक्सटेंशन, ग्रेटर नोएडा वेस्ट, गौर सिटी और जिले की अधिकांश हाई-राइज सोसाइटियों में फायर NOC तो मौजूद है, लेकिन जमीनी स्तर पर फायर सेफ्टी सिस्टम या तो अधूरे हैं या गैर-कार्यात्मक। ऊपरी मंजिलों पर स्प्रिंकलर सिस्टम काम नहीं करते, फायर हाइड्रेंट में पर्याप्त जल दबाव नहीं है, फायर अलार्म अक्सर निष्क्रिय पाए जाते हैं, फायर टेंडर के रास्तों पर अतिक्रमण है और आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए उपलब्ध उपकरण 25 से 40 मंजिला इमारतों की जरूरत के मुकाबले बेहद कम हैं। यह वही चिंता है जिसे गौतम बुद्ध नगर फायर विभाग की पूर्व ऑडिट रिपोर्ट्स भी बार-बार रेखांकित कर चुकी हैं—सैकड़ों हाई-राइज इमारतों में गंभीर फायर सेफ्टी खामियां पहले भी सामने आ चुकी हैं।
ड्रोन रेस्क्यू से हाई-रीच मशीन तक, आधुनिक समाधान की मांग
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि हाई-राइज आपदाओं से निपटने के लिए पारंपरिक फायर टेंडर और सामान्य सीढ़ियां अब पर्याप्त नहीं हैं। 30 से 40 मंजिल तक पहुंचने वाली इमारतों में आग लगने की स्थिति में बचाव कार्य के लिए हाई-रीच हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म, अत्याधुनिक स्मोक कंट्रोल सिस्टम और ड्रोन आधारित सर्विलांस व रेस्क्यू तकनीक की तत्काल आवश्यकता है। समिति ने विशेष रूप से ड्रोन बेस्ड फायर कंट्रोल एवं रेस्क्यू पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की मांग उठाई ताकि ऊपरी मंजिलों में फंसे लोगों तक तेज निगरानी, थर्मल लोकेशन और इमरजेंसी सहायता संभव हो सके। हालिया हाई-राइज आग की घटनाओं ने यह साबित किया है कि पारंपरिक संसाधनों से हर मंजिल तक समय पर पहुंचना मुश्किल हो रहा है।

समिति की 8 बड़ी मांगें, प्रशासन से टाइम-बाउंड एक्शन की अपील
गौतम बुद्ध नगर विकास समिति ने प्रशासन के सामने कई ठोस मांगें रखीं—सभी हाई-राइज सोसाइटियों का सरप्राइज निरीक्षण, फायर NOC की पारदर्शी समीक्षा रिपोर्ट, नियम तोड़ने वाली सोसाइटियों की NOC निरस्त करना, थर्ड पार्टी फायर सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य करना, ग्रेटर नोएडा वेस्ट/गौर सिटी में अलग फायर स्टेशन बनाना, 30+ मंजिल तक पहुंचने वाले उपकरण उपलब्ध कराना, ड्रोन रेस्क्यू प्रोजेक्ट शुरू करना और नागरिकों के लिए शिकायत व जागरूकता प्लेटफॉर्म तैयार करना। समिति ने RWA, बिल्डर्स और सोसाइटी प्रबंधन के लिए मासिक फायर ड्रिल, उपकरणों का नियमित मेंटेनेंस, फायर मार्ग से अतिक्रमण हटाने और प्रशिक्षित फायर सेफ्टी अधिकारियों की नियुक्ति भी जरूरी बताई।
रश्मि पाण्डेय और अनूप सोनी ने दी चेतावनी
समिति की अध्यक्ष रश्मि पाण्डेय ने साफ कहा कि तेजी से बढ़ती आबादी और कंक्रीट के जंगल के बीच यदि अग्नि सुरक्षा को शीर्ष प्राथमिकता नहीं दी गई तो आने वाले समय में किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं समिति के सचिव अनूप कुमार सोनी ने चेतावनी दी कि हजारों परिवारों की जान केवल कागजी NOC से सुरक्षित नहीं होती, बल्कि हर पाइप, हर अलार्म, हर स्प्रिंकलर और हर निकासी मार्ग का वास्तविक रूप से कार्यशील होना जरूरी है। उनका कहना है कि प्रशासन को अब निरीक्षण से आगे बढ़कर जवाबदेही तय करनी होगी—किस बिल्डर ने अधूरा सिस्टम दिया, किस सोसाइटी ने मेंटेनेंस नहीं कराया और किस अधिकारी ने आंखें मूंदी रखीं।
बड़ा सवाल: क्या हाई-राइज टावर बन रहे हैं ‘आग के जाल’?
दरअसल, गौतम बुद्ध नगर में पिछले दो वर्षों में जिला प्रशासन को बार-बार हाई-राइज सुरक्षा पर विशेष अभियान चलाने पड़े हैं। फायर सेफ्टी के लिए हाई-लेवल कमेटी गठित हुई, मॉक ड्रिल्स हुईं, नोटिस जारी हुए, लेकिन इसके बावजूद जमीनी कमियां लगातार सामने आती रहीं। इससे साफ है कि समस्या केवल नियमों की नहीं, बल्कि उनके सख्त क्रियान्वयन की है।
नोएडा और ग्रेटर नोएडा की चमकदार टावर लाइफ के पीछे अब सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा है—क्या यहां रहने वाले लोग वास्तव में सुरक्षित हैं, या वे कंक्रीट के ऐसे ऊंचे पिंजरों में रह रहे हैं जहां आग लगने पर बचाव की उम्मीद सिस्टम से ज्यादा किस्मत पर टिकी है? गौतम बुद्ध नगर विकास समिति का यह ज्ञापन प्रशासन के लिए साफ चेतावनी है—अगर अभी नहीं चेते, तो अगला हादसा केवल एक खबर नहीं बल्कि हजारों परिवारों की त्रासदी बन सकता है।














