नई दिल्ली: प्रधानमंत्री Narendra Modi ने शनिवार को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस Mohammed bin Salman से फोन पर महत्वपूर्ण बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव, ऊर्जा अवसंरचना पर हमलों और समुद्री मार्गों की सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव बना चिंता का विषय
Middle East में Iran और United States-Israel के बीच 28 फरवरी से जारी संघर्ष के चलते हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। एक महीने से जारी इस टकराव ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी है, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
ऊर्जा ढांचे पर हमलों की भारत ने की निंदा
प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान क्षेत्र में ऊर्जा और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने दोहराया कि भारत इस तरह की गतिविधियों के खिलाफ है और क्षेत्र में शांति व स्थिरता बनाए रखने के पक्ष में है।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि भारत का स्पष्ट रुख है कि ऊर्जा अवसंरचना को निशाना बनाना वैश्विक हितों के खिलाफ है और इससे पूरी दुनिया प्रभावित होती है।
समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर सहमति
दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों को सुरक्षित और खुला रखना बेहद जरूरी है। खासकर खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भारतीय समुदाय के हितों पर भी चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी ने सऊदी अरब में रह रहे भारतीय समुदाय के कल्याण के लिए क्राउन प्रिंस का आभार भी जताया। उन्होंने कहा कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा और हितों को लेकर हमेशा सजग रहता है।
Spoke with Crown Prince and PM of Saudi Arabia, HRH Prince Mohammed bin Salman and discussed the ongoing conflict in West Asia.
I reiterated India’s condemnation of attacks on regional energy infrastructure.
We agreed on the need to ensure freedom of navigation and keeping…
— Narendra Modi (@narendramodi) March 28, 2026
कूटनीतिक स्तर पर भारत की सक्रियता
पश्चिम एशिया संकट को लेकर भारत लगातार कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय बना हुआ है। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने Donald Trump से भी बातचीत की थी, जिसमें क्षेत्रीय हालातों और शांति बहाली के प्रयासों पर चर्चा हुई थी।
भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह तनाव कम करने, संवाद को बढ़ावा देने और जल्द से जल्द शांति स्थापित करने के पक्ष में है।
वैश्विक प्रभाव और आगे की राह
विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकता है। ऊर्जा कीमतों, आपूर्ति श्रृंखला और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।
ऐसे समय में भारत और सऊदी अरब के बीच हुई यह उच्चस्तरीय बातचीत क्षेत्र में स्थिरता और सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।














