लैंड-फॉर-जॉब घोटाले से जुड़े मामले में Lalu Prasad Yadav को बड़ा कानूनी झटका लगा है। Delhi High Court ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने इस मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी। अदालत ने कहा कि याचिका में कोई दम नहीं है और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए इस मामले पर लागू नहीं होती।
कोर्ट ने क्या कहा
जस्टिस रविंदर डुडेजा ने फैसला सुनाते हुए कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में जोड़ी गई धारा 17ए वर्ष 2018 में लागू हुई थी और यह केवल भविष्य के मामलों पर लागू होती है। चूंकि यह मामला वर्ष 2004 से 2009 के बीच कथित तौर पर हुए अपराधों से जुड़ा है, इसलिए इस प्रावधान का लाभ इस मामले में नहीं दिया जा सकता।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 17ए के तहत पहले से मंजूरी न होने का असर प्रारंभिक जांच, एफआईआर दर्ज होने, जांच प्रक्रिया या विशेष अदालत द्वारा लिए गए संज्ञान पर नहीं पड़ता। इसी आधार पर अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया।
CBI ने 2022 में दर्ज की थी FIR
इस मामले में Central Bureau of Investigation ने 18 मई 2022 को एफआईआर दर्ज की थी। सुनवाई के दौरान लालू यादव की ओर से वरिष्ठ वकील Kapil Sibal ने दलील दी थी कि जांच एजेंसी ने बिना जरूरी सरकारी मंजूरी के मामला दर्ज किया, जो कानूनन गलत है।
हालांकि अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और कहा कि यह प्रावधान पूर्वव्यापी नहीं है, इसलिए इस मामले में लागू नहीं होता।
पहले भी ट्रायल पर रोक से इनकार
इससे पहले भी दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। बाद में Supreme Court of India ने भी हाईकोर्ट के इस फैसले को बरकरार रखा था।
क्या है लैंड-फॉर-जॉब मामला
यह मामला उस आरोप से जुड़ा है कि जब लालू प्रसाद यादव वर्ष 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री थे, तब उन्होंने रेलवे में ग्रुप-डी पदों पर नियुक्तियों के बदले जमीन लेने का कथित घोटाला किया।
सीबीआई के अनुसार कई नौकरी चाहने वालों या उनके रिश्तेदारों ने पटना समेत अन्य स्थानों पर यादव परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी संस्थाओं को जमीन कम कीमत पर बेची या गिफ्ट की। बदले में उन्हें रेलवे में नौकरी दिलाई गई।
हालांकि लालू यादव और उनके परिवार ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक साजिश बताया है।
इस फैसले के बाद लैंड-फॉर-जॉब मामले में कानूनी प्रक्रिया आगे जारी रहेगी, जिससे आरजेडी सुप्रीमो की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।














