गाजीपुर – विकास भवन में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष दुर्गेश कुमार श्रीवास्तव ने की, जिसमें कर्मचारियों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण समस्याओं पर चर्चा की गई।
कर्मचारियों के अधिकारों के हनन का आरोप
जिलाध्यक्ष ने कहा कि जिले के कई कार्यालयों में कर्मचारियों के मूल अधिकारों का हनन किया जा रहा है। चरित्र पंजिका और वेतन भुगतान जैसी बुनियादी सुविधाओं में भी लापरवाही बरती जा रही है। विशेष रूप से आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का शोषण हो रहा है। उन्होंने बताया कि इन समस्याओं को लेकर परिषद का प्रतिनिधिमंडल जल्द ही जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी से मुलाकात करेगा।
कैशलेस इलाज योजना का लाभ नहीं मिल रहा
बैठक में दीनदयाल उपाध्याय कैशलेस इलाज योजना का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। बताया गया कि सरकार द्वारा यह सुविधा उपलब्ध कराए जाने के बावजूद अधिकांश कर्मचारियों के कार्ड अब तक नहीं बन पाए हैं। वहीं, जिन कर्मचारियों के पास आयुष्मान कार्ड है, उन्हें भी चिन्हित अस्पतालों में इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
आठवें वेतन आयोग और पेंशन को लेकर नाराजगी
परिषद ने कहा कि 1 जनवरी 2026 से आठवें वेतन आयोग को लागू करने और पेंशन में सुधार का वादा किया गया था, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इससे कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है। साथ ही आउटसोर्सिंग, ठेका और संविदा कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन और अन्य सुविधाएं देने की मांग भी उठाई गई।
सरकारी फैसलों पर मिश्रित प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कर्मचारियों के वेतन निवेश संबंधी कैबिनेट फैसले का परिषद ने स्वागत किया, लेकिन साथ ही मांग की कि इस व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए।
बैठक में अरविंद सिंह, ओंकार नाथ पांडेय, आलोक राय, राकेश पांडेय, रोशन लाल, अखिलेश सिंह, अभय सिंह, जय प्रकाश बिंद, गिरजा कुशवाहा समेत कई कर्मचारी उपस्थित रहे।














