नोएडा शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर चल रहा विवाद अब कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर गंभीर रूप ले चुका है। “नोएडा प्राधिकरण” ने सफाई कर्मचारियों को कथित रूप से उकसाकर हड़ताल कराने और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने के आरोप में सफाई कर्मचारी यूनियन से जुड़े छह नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। इस कार्रवाई के बाद सफाई कर्मचारियों में भारी नाराजगी देखने को मिली और गुरुवार सुबह बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने शहर के प्रसिद्ध Dalit Prerna Sthal के बाहर एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान सफाई कर्मियों ने नोएडा प्राधिकरण के जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और कार्रवाई को अन्यायपूर्ण बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया, ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।
अवर अभियंता की शिकायत पर दर्ज हुआ मुकदमा
मामले की शुरुआत नोएडा प्राधिकरण में तैनात अवर अभियंता हरेंद्र सिंह मलिक की ओर से दी गई शिकायत से हुई। उनकी तहरीर के आधार पर नोएडा पुलिस ने के थाना फेस-1 पुलिस में सफाई कर्मचारी यूनियन से जुड़े छह नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि यूनियन नेता सतबीर मकवाना, साधु मकवाना, बबलू पारचा, रवि पारचा, राधे पारचा और सुनील टोंक लगातार अपनी मांगों को लेकर प्राधिकरण कार्यालय पहुंचते रहे और कई बार बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारियों को साथ लेकर अधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश की।
अधिकारियों का आरोप है कि इन नेताओं ने कर्मचारियों को काम बंद करने, धरना देने और हड़ताल करने के लिए उकसाया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि कर्मचारियों को प्रभावित करने के लिए कथित तौर पर व्हाट्सएप के माध्यम से उत्तेजक वॉइस नोट और संदेश प्रसारित किए गए, जिसके बाद कई सफाई कर्मचारी काम छोड़कर हड़ताल पर चले गए।
11 मार्च की घटना बनी कार्रवाई का आधार
प्राधिकरण के अनुसार, 11 मार्च को हुई घटना ने इस पूरे मामले को गंभीर बना दिया। शिकायत में कहा गया है कि उस दिन सेक्टर-8, सेक्टर-10, सेक्टर-11, सेक्टर-12, सेक्टर-63 और आसपास के कई सर्किल क्षेत्रों में तैनात सफाई कर्मचारियों को काम करने से रोका गया।
अधिकारियों का आरोप है कि यूनियन नेताओं ने कर्मचारियों को भड़काकर सामूहिक रूप से काम बंद कराने की कोशिश की, जिससे शहर की सफाई व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई। कई स्थानों पर कूड़े का उठान नहीं हो सका और सफाई कार्य बाधित हो गया।
प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि अगर इस तरह की गतिविधियां जारी रहती हैं तो शहर में गंदगी बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है। साथ ही, इससे शहर की छवि पर भी असर पड़ता है, क्योंकि नोएडा को देश के प्रमुख और व्यवस्थित शहरों में गिना जाता है।
पुलिस ने शुरू की जांच
अवर अभियंता की शिकायत के आधार पर नोएडा पुलिस ने नामजद आरोपियों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जाएगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सफाई कर्मचारियों का विरोध और बढ़ता तनाव
दूसरी ओर, मुकदमा दर्ज होने के बाद सफाई कर्मचारियों में असंतोष बढ़ गया है। बड़ी संख्या में कर्मचारी दलित प्रेरणास्थल के बाहर एकत्र हुए और कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन किया। कर्मचारियों का कहना है कि यूनियन नेताओं पर लगाया गया आरोप गलत है और यह कार्रवाई उनकी मांगों को दबाने के लिए की गई है।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने प्रशासन से मुकदमा वापस लेने और उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करने की मांग की। स्थिति को देखते हुए पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर मौजूद रहे और कर्मचारियों से शांति बनाए रखने की अपील की।
शहर में सफाई व्यवस्था और प्रशासन पर उठे सवाल
इस पूरे विवाद ने नोएडा में सफाई व्यवस्था, कर्मचारियों की कार्य परिस्थितियों और प्रशासन के रवैये को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक ओर प्राधिकरण का कहना है कि शहर की सफाई व्यवस्था को बाधित करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी, वहीं दूसरी ओर कर्मचारी संगठन इसे कर्मचारियों की आवाज दबाने की कार्रवाई बता रहे हैं।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और आने वाले दिनों में इस विवाद को लेकर और भी घटनाक्रम सामने आने की संभावना है। इस बीच, शहर में सफाई व्यवस्था को सुचारू बनाए रखना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।














