नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में स्थायी पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति में हो रही देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सरकार DGP की नियुक्ति से अधिक अपने अधिकारियों को राज्यसभा भेजने में व्यस्त नजर आ रही है।
दरअसल, पश्चिम बंगाल के पूर्व डीजीपी राजीव कुमार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया था और वे निर्विरोध निर्वाचित भी हो चुके हैं। राजीव कुमार 31 जनवरी 2026 को डीजीपी पद से सेवानिवृत्त हुए थे।
नियमित DGP की नियुक्ति में देरी पर कोर्ट सख्त
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि कई राज्य सरकारें, खासकर पश्चिम बंगाल, नियमित डीजीपी की नियुक्ति के लिए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को समय पर प्रस्ताव नहीं भेजती हैं। इससे योग्य और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के अवसर प्रभावित होते हैं।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि डीजीपी की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार ही की जानी चाहिए और इसमें अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
TMC ने राज्यसभा के लिए चार नाम घोषित किए
तृणमूल कांग्रेस ने आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए चार उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की है। इनमें पूर्व डीजीपी राजीव कुमार का नाम भी शामिल है, जिन्हें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का करीबी माना जाता है।
टीएमसी द्वारा घोषित उम्मीदवारों में शामिल हैं:
बाबुल सुप्रियो
राजीव कुमार
मेनका गुरुस्वामी
कोएल मल्लिक
बताया जा रहा है कि इन चारों नामों को पार्टी ने रणनीतिक रूप से चुना है। उल्लेखनीय है कि देशभर में 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए 16 मार्च 2026 को चुनाव होने हैं।
फिलहाल कार्यवाहक DGP संभाल रहे जिम्मेदारी
पश्चिम बंगाल में फिलहाल पीयूष पांडे कार्यवाहक डीजीपी के रूप में जिम्मेदारी निभा रहे हैं। वे 1993 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और राजीव कुमार के सेवानिवृत्त होने के बाद 31 जनवरी 2026 को उन्होंने पदभार ग्रहण किया था। इससे पहले वे महानिदेशक (जेल) के पद पर कार्यरत थे।
UPSC और राज्य सरकार के बीच खींचतान
स्थायी डीजीपी की नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के बीच मतभेद की स्थिति बनी हुई है। हाल ही में UPSC ने राज्य सरकार द्वारा भेजे गए अधिकारियों के पैनल को यह कहते हुए वापस लौटा दिया था कि यह सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं है।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद पश्चिम बंगाल में प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि अब राज्य सरकार पर जल्द से जल्द नियमित डीजीपी की नियुक्ति करने का दबाव बढ़ सकता है।
कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने न केवल डीजीपी नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि प्रशासनिक नियुक्तियों में पारदर्शिता और नियमों के पालन की जरूरत को भी एक बार फिर उजागर किया है।














