कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति और पुलिस महकमे में उस वक्त बड़ा भूचाल आ गया, जब कोलकाता पुलिस के पूर्व DCP शांतनु सिन्हा बिस्वास को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के बाद गिरफ्तार कर लिया गया। उनके खिलाफ पहले ही ‘लुक आउट नोटिस’ जारी किया गया था और एजेंसियों को आशंका थी कि वह देश छोड़कर फरार हो सकते हैं।
शांतनु सिन्हा बिस्वास पर आरोप है कि उन्होंने एक निष्पक्ष पुलिस अधिकारी की तरह नहीं, बल्कि “सत्ता के करीबी कार्यकर्ता” की तरह काम किया। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग, जमीन कब्जाने, रंगदारी वसूली और बालू तस्करी से जुड़े वित्तीय लेन-देन में संलिप्तता के गंभीर आरोप लगे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, ED ने पिछले महीने उनके आवास और कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। जांच एजेंसियों को कथित तौर पर ऐसे दस्तावेज और लेन-देन के सुराग मिले, जिनका संबंध चर्चित ‘सोना पप्पू’ नेटवर्क से बताया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि शांतनु सिन्हा बिस्वास पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के बेहद करीबी माने जाते रहे हैं। हाल ही में उन्हें राज्य सरकार के धरना मंच पर भी देखा गया था, जिसके बाद विपक्ष लगातार उनकी भूमिका पर सवाल उठा रहा था।
क्या है ‘सोना पप्पू’ गैंग का पूरा मामला?
फरवरी 2026 में कोलकाता के गोलपार्क इलाके में दो गुटों के बीच खूनी गैंगवार हुई थी। इलाके में बमबाजी, फायरिंग और पथराव से दहशत फैल गई थी। पुलिस ने इस मामले में अब तक 10 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है।
जांच में सामने आया कि यह संघर्ष इलाके में दबदबा कायम करने की लड़ाई का हिस्सा था। स्थानीय लोगों के मुताबिक, “सोना पप्पू” उर्फ पप्पू लंबे समय से इलाके में अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहता था और उसी के तहत इस हमले की साजिश रची गई थी।
पप्पू ने 2010-11 में कंस्ट्रक्शन कारोबार में कदम रखा था, लेकिन जल्द ही उसका नाम अवैध वसूली, जमीन कब्जाने और अपराध जगत से जुड़ने लगा।
साल 2015 में उसने बालीगंज रेल यार्ड पर कब्जा करने की कोशिश की थी, जिसके बाद उसकी दुश्मनी कुख्यात अपराधी मुन्ना पांडे से हो गई। इसके बाद कई बार दोनों गुटों के बीच तनाव और हिंसा की घटनाएं सामने आईं।
वहीं, 2017 में स्विन्हो लेन इलाके में कब्जे की लड़ाई के दौरान पलाश जाना नामक व्यक्ति की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने पप्पू को जलपाईगुड़ी से गिरफ्तार किया था, हालांकि बाद में उसे अदालत से जमानत मिल गई थी।
राजनीतिक गलियारों में बढ़ी बेचैनी
पूर्व DCP की गिरफ्तारी के बाद बंगाल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। विपक्ष का दावा है कि यह मामला सिर्फ एक अधिकारी की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि “सिस्टम और सत्ता के गठजोड़” को उजागर करता है।
दूसरी ओर, सत्तारूढ़ दल के नेताओं का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
फिलहाल ED और अन्य एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि ‘सोना पप्पू’ नेटवर्क और कथित राजनीतिक संरक्षण के बीच आखिर कितनी गहरी सांठगांठ थी। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।














