नोएडा/गौतमबुद्धनगर। सेक्टर-44 स्थित एमिटी इंटरनेशनल स्कूल में परिवहन व्यवस्था की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। यूकेजी में पढ़ने वाला एक मासूम छात्र सुबह रोज की तरह स्कूल बस में बैठा, लेकिन रास्ते में ही सीट पर सो गया। स्कूल पहुंचने के बाद बस चालक और सहायक द्वारा अनिवार्य जांच नहीं किए जाने के कारण बच्चा बस में ही छूट गया और वाहन को करीब 25 किलोमीटर दूर एक सुनसान यार्ड में खड़ा कर दिया गया।
कैसे हुई चूक?
सूत्रों के अनुसार, बस के स्कूल परिसर पहुंचने के बाद ड्राइवर और परिचालक ने बस की अंतिम जांच (फाइनल चेक) नहीं की। आमतौर पर नियमों के तहत हर बस को खाली करने के बाद सीटों के नीचे और पीछे तक देखना अनिवार्य होता है, ताकि कोई बच्चा छूट न जाए। लेकिन इस मामले में यह प्रक्रिया पूरी तरह नजर अंदाज कर दी गई।
बस को स्कूल से दूर एक यार्ड में ले जाकर खड़ा कर दिया गया। इसी दौरान बच्चा अंदर ही बंद रह गया। बताया जा रहा है कि मासूम करीब 6 से 7 घंटे तक बस के अंदर अकेला रहा।
परिजनों की चिंता से खुला मामला
दोपहर में जब बच्चा घर नहीं पहुंचा तो परिवार की चिंता बढ़ गई। परिजनों ने तुरंत स्कूल प्रशासन से संपर्क किया। शुरुआत में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई, जिससे हड़कंप मच गया। आनन-फानन में स्कूल प्रशासन और परिवहन विभाग ने खोजबीन शुरू की।
काफी तलाश के बाद बच्चा उसी बस में मिला, जो सुनसान यार्ड में खड़ी थी। समय रहते बच्चे को सुरक्षित निकाल लिया गया, जिससे एक बड़ी अनहोनी टल गई।
सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल
यह घटना स्कूल की परिवहन और सुरक्षा प्रणाली पर कई गंभीर प्रश्न खड़े करती है:
क्या बसों की नियमित और अनिवार्य जांच की जाती है?
बच्चों की उपस्थिति की पुष्टि का कोई डिजिटल या मैन्युअल सिस्टम है?
ड्राइवर और परिचालक की जवाबदेही तय करने के लिए क्या प्रोटोकॉल है?
अभिभावकों में घटना को लेकर भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी लापरवाही बच्चों की जान को जोखिम में डाल सकती थी। उन्होंने जिम्मेदार कर्मचारियों और प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन द्वारा जांच की संभावना जताई जा रही है। यदि लापरवाही साबित होती है तो स्कूल प्रबंधन और परिवहन से जुड़े जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो सकती है।
यह घटना एक बार फिर स्कूल परिवहन सुरक्षा मानकों की सख्ती से समीक्षा की आवश्यकता को रेखांकित करती है, ताकि भविष्य में किसी भी बच्चे की सुरक्षा से खिलवाड़ न हो।














