नई दिल्ली: ₹1.86 करोड़ के ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर फ्रॉड मामले में Central Bureau of Investigation (सीबीआई) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए छह राज्यों में एक साथ छापेमारी की और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह ठगी केरल के कोट्टायम जिले के एक वरिष्ठ नागरिक से की गई थी। जांच एजेंसी का दावा है कि इस मामले की तह तक पहुंचते हुए एक संगठित और बहु-राज्यीय नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसके अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन भी सामने आ रहे हैं।
छह राज्यों में एकसाथ छापेमारी
सीबीआई ने गोवा, बेंगलुरु (कर्नाटक), पलक्कड़ (केरल), नागपुर (महाराष्ट्र), हैदराबाद (तेलंगाना) और दिल्ली में सर्च ऑपरेशन चलाया। छापेमारी के दौरान डिजिटल डिवाइस, डेबिट कार्ड, बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज, मोबाइल सिम और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद किए गए हैं।
जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की डिजिटल फॉरेंसिक जांच जारी है। एजेंसी का कहना है कि लेन-देन के ट्रेल और क्रिप्टोकरेंसी ट्रांसफर की गहन जांच के बाद नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुईं।
कैसे काम करता था गिरोह?
जांच में सामने आया कि यह संगठित गिरोह दो मुख्य तरीकों से ठगी को अंजाम देता था:
1.म्यूल बैंक अकाउंट नेटवर्क
फर्जी या किराए के बैंक खातों (म्यूल अकाउंट) के जरिए ठगी की रकम को तेजी से एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर किया जाता था। इसके लिए शेल कंपनियों और अस्थायी खातों का इस्तेमाल किया जाता था, ताकि ट्रांजैक्शन का असली स्रोत छिपाया जा सके।
2.फर्जी सिम और KYC दुरुपयोग
गिरोह 5G सिम अपग्रेड का लालच देकर लोगों से उनके KYC दस्तावेज हासिल करता था। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर नए सिम कार्ड एक्टिवेट कर साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल किए जाते थे।
सीबीआई के मुताबिक, इस तकनीक का इस्तेमाल “डिजिटल अरेस्ट” जैसे धोखाधड़ी मॉडल में किया जाता था, जहां पीड़ितों को फर्जी एजेंसियों या अधिकारियों के नाम पर डराकर मोटी रकम वसूली जाती थी।
तीन आरोपी गिरफ्तार
कार्रवाई के दौरान तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया:
ब्लेसिन जैकब अब्राहम – गोवा के एक होटल से गिरफ्तार। आरोप है कि यह म्यूल अकाउंट ऑपरेटर था और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए रकम ट्रांसफर करने में अहम भूमिका निभाता था।
मोहम्मद मुश्ताक – नागपुर से गिरफ्तार। यह कथित तौर पर शेल कंपनी के माध्यम से म्यूल अकाउंट संचालित कर रहा था और अपराध की राशि अपनी कंपनी के खाते में प्राप्त करता था।
मोहम्मद जुनैद – बेंगलुरु से पकड़ा गया। आरोप है कि यह फर्जी सिम कार्ड उपलब्ध कराने और KYC दस्तावेजों के दुरुपयोग में शामिल था।
एजेंसी के अनुसार, इन तीनों की भूमिका नेटवर्क के अलग-अलग हिस्सों में थी और इनके जरिए ठगी की रकम को व्यवस्थित रूप से इधर-उधर किया जाता था।
अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जांच
सीबीआई ने संकेत दिया है कि शुरुआती जांच में इस गिरोह के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों के संकेत मिले हैं। कुछ ट्रांजैक्शन विदेशी खातों और क्रिप्टो प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से किए जाने की आशंका है।
एजेंसी अब देश-विदेश में फैले अन्य संदिग्धों की पहचान करने में जुटी है और जरूरत पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से सहयोग लिया जा सकता है।
डिजिटल अरेस्ट मॉडल पर शिकंजा
जांच एजेंसी का दावा है कि यह ऑपरेशन संगठित साइबर ठगी गिरोहों की कमर तोड़ने की दिशा में अहम कदम है। ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे मामलों में अपराधी खुद को पुलिस, जांच एजेंसी या सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल या फोन के जरिए डराते हैं और गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर बड़ी रकम वसूलते हैं।
सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल सिस्टम में लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त और निरंतर कार्रवाई जारी रहेगी।
सावधानी ही बचाव
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अनजान कॉल, वीडियो कॉल या 5G अपग्रेड जैसी स्कीम के नाम पर मांगे जा रहे KYC दस्तावेज साझा करने से पहले पूरी जांच करें। बैंक या सरकारी एजेंसियां फोन पर इस तरह की जानकारी नहीं मांगतीं।
फिलहाल, सीबीआई की जांच जारी है और उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और बड़े खुलासे हो सकते हैं।














