नई दिल्ली: कोलिजियम प्रणाली के खिलाफ दायर याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस देखने को मिली। सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने वरिष्ठ वकील मैथ्यूज नेदुमपारा को उनके आचरण को लेकर कड़ी फटकार लगाई और भविष्य में सावधानी बरतने की चेतावनी दी।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, मैथ्यूज नेदुमपारा ने कोलिजियम व्यवस्था के खिलाफ दायर अपनी याचिका को जल्द सूचीबद्ध करने की मांग की थी। उन्होंने अदालत में यह आरोप भी लगाया कि उद्योगपतियों ‘अडानी-अंबानी’ से जुड़े मामलों के लिए विशेष बेंच गठित की जा रही हैं, जबकि उनकी याचिका पर सुनवाई नहीं हो रही है।
इन टिप्पणियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा,
“मेरी अदालत में जो कुछ भी आप पेश करें, उसके प्रति सावधान रहें। आपने मुझे चंडीगढ़ में देखा है, दिल्ली में देखा है। मैं आपको चेतावनी दे रहा हूं—सावधान रहें।”
सीजेआई ने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत में दुर्व्यवहार या गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियां स्वीकार नहीं की जाएंगी। उन्होंने कहा कि यह न समझें कि पहले जैसा व्यवहार आगे भी चलता रहेगा।
पहले भी लग चुकी है फटकार
यह पहली बार नहीं है जब मैथ्यूज नेदुमपारा को सुप्रीम कोर्ट में टोकाटाकी का सामना करना पड़ा हो। वर्ष 2024 में सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने उनकी याचिका को रजिस्टर करने से इनकार कर दिया था। अदालत का कहना था कि National Judicial Appointments Commission case (NJAC) के फैसले से पहले ही संबंधित मुद्दों का निपटारा हो चुका है, ऐसे में नई रिट याचिका मेंटेनेबल नहीं है।
पिछले वर्ष तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजिव खन्ना ने भी नेदुमपारा को पिटीशन सूचीबद्ध करने की मांग के दौरान फटकार लगाई थी। उस समय CJI खन्ना ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि अदालत में “पॉलिटिकल स्पीच” न दें।
कोलिजियम बनाम NJAC बहस फिर चर्चा में
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की कोलिजियम प्रणाली को लेकर समय-समय पर बहस होती रही है। 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने NJAC कानून को असंवैधानिक करार देते हुए कोलिजियम व्यवस्था को बरकरार रखा था। नेदुमपारा की याचिका इसी व्यवस्था को चुनौती देने से संबंधित बताई जा रही है।
न्यायालय की सख्त टिप्पणी
ताजा घटनाक्रम से स्पष्ट है कि सुप्रीम कोर्ट अदालत की गरिमा और अनुशासन को लेकर बेहद सतर्क है। CJI सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी को न्यायालय की कार्यप्रणाली और मर्यादा को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
अब देखना होगा कि कोलिजियम के खिलाफ दायर याचिका पर आगे क्या रुख अपनाया जाता है और क्या इसे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाता है या नहीं।














