कानपुर देहात: उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात में सामने आए कथित थर्मल पावर प्रोजेक्ट घोटाले ने प्रशासनिक और बैंकिंग सिस्टम की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 400 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन, 1500 करोड़ रुपये के बैंक लोन और डेढ़ दशक तक अधर में लटके प्रोजेक्ट को लेकर अब बड़ा प्रशासनिक एक्शन शुरू हो गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद मूसानगर थाने में पूर्व ADM, संबंधित कंपनियों के प्रतिनिधियों और कई बैंक अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मामला जालसाजी, धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और सरकारी प्रक्रिया के दुरुपयोग से जुड़ा बताया जा रहा है।
“रोजगार और विकास के सपने… लेकिन जमीन बन गई करोड़ों के खेल का जरिया”
सूत्रों के अनुसार, वर्षों पहले कानपुर देहात में निजी थर्मल पावर प्लांट लगाने के नाम पर बड़ी मात्रा में जमीन अधिग्रहित और आवंटित की गई थी। दावा किया गया था कि परियोजना से इलाके में औद्योगिक विकास होगा, हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा और बिजली उत्पादन बढ़ेगा।
लेकिन आरोप है कि प्रोजेक्ट शुरू करने के बजाय जमीन और उससे जुड़े दस्तावेजों का इस्तेमाल बैंकों से भारी-भरकम लोन हासिल करने के लिए किया गया।
जांच में सामने आया है कि कथित तौर पर IDBI Bank, Punjab National Bank और Canara Bank से लगभग 1500 करोड़ रुपये का ऋण लिया गया, जबकि जमीन का वास्तविक उपयोग परियोजना के लिए कभी नहीं हुआ।
“15 साल तक प्लांट नहीं बना… फिर भी चलता रहा फाइनेंशियल गेम?”
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर 15 वर्षों तक न तो प्लांट बना, न बिजली उत्पादन शुरू हुआ और न ही किसी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई हुई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस परियोजना को क्षेत्र की तस्वीर बदलने वाला बताया गया था, वह अब कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं की मिसाल बनती जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर इतने लंबे समय तक यह मामला दबा कैसे रहा और किन-किन स्तरों पर लापरवाही या मिलीभगत हुई।
पूर्व ADM और अधिकारियों की भूमिका जांच के घेरे में
एफआईआर में तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों, खासतौर पर पूर्व ADM स्तर के अधिकारियों की भूमिका को भी जांच के दायरे में लिया गया है।
आरोप है कि जमीन आवंटन, मूल्यांकन और दस्तावेजी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुईं। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि क्या सरकारी नियमों को नजरअंदाज कर कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
बताया जा रहा है कि कई अहम फाइलें और दस्तावेज अब जांच एजेंसियों के रडार पर हैं।
“बिना पर्याप्त जांच के कैसे पास हो गया 1500 करोड़ का लोन?”
मामले में IDBI Bank, Punjab National Bank और Canara Bank के संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।
आरोप है कि परियोजना की वास्तविक स्थिति, जमीन के उपयोग और प्रगति की पर्याप्त जांच किए बिना हजारों करोड़ रुपये का वित्तीय जोखिम लिया गया।
सूत्रों का कहना है कि यह मामला केवल जमीन घोटाले तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें बैंकिंग नियमों की अनदेखी, प्रशासनिक जवाबदेही और संभावित राजनीतिक संरक्षण जैसे पहलुओं की भी जांच हो सकती है।
योगी सरकार का सख्त संदेश — “भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस”
राज्य सरकार इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से देख रही है। मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जांच में यदि किसी अधिकारी, बैंक कर्मी या कंपनी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सरकार की ओर से इसे प्रदेश में वर्षों से दबे पड़े आर्थिक और भूमि घोटालों के खिलाफ बड़े अभियान की शुरुआत के तौर पर भी देखा जा रहा है।
अब सबकी नजर जांच एजेंसियों पर
कानपुर देहात में यह मामला अब चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर 400 करोड़ की जमीन और 1500 करोड़ के लोन का खेल इतने वर्षों तक कैसे चलता रहा।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच एजेंसियां इस कथित घोटाले में किन-किन चेहरों को बेनकाब करती हैं और क्या वास्तव में जिम्मेदार लोगों तक कार्रवाई पहुंचती है या नहीं।














