“डूब क्षेत्र में बढ़ते अतिक्रमण ने खड़ी की पर्यावरणीय और मानवीय चुनौती”
नोएडा में यमुना और हरनंदी (हिंडन) नदी के डूब क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहे अवैध निर्माणों ने न केवल नदी तंत्र के अस्तित्व पर गंभीर संकट खड़ा कर दिया है, बल्कि बाढ़ प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और शहरी नियोजन की चुनौतियों को भी और जटिल बना दिया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) कृष्णा करुणेश ने 20 जून तक विशेष अभियान चलाकर सभी अवैध पक्के निर्माणों को ध्वस्त करने के निर्देश जारी किए हैं।
सीईओ ने संबंधित वर्क सर्किल अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि निर्धारित समय सीमा तक कार्रवाई नहीं होने पर उनके खिलाफ जवाबदेही तय की जाएगी और उन्हें संबंधित क्षेत्रों से हटाया जा सकता है।
डूब क्षेत्र में निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध, फिर भी वर्षों से जारी है अतिक्रमण
यमुना-हरनंदी का डूब क्षेत्र नोएडा प्राधिकरण का अधिसूचित (नोटिफाइड) क्षेत्र है, जहां किसी भी प्रकार के स्थायी निर्माण की अनुमति नहीं है। इसके बावजूद वर्षों से यहां बड़े पैमाने पर अवैध फार्म हाउस, पक्के मकान, रिसॉर्टनुमा ढांचे, स्विमिंग पूल और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए स्थायी संरचनाएं खड़ी कर दी गई हैं।
प्राधिकरण ने निर्माणाधीन और पहले से बने सभी अवैध ढांचों की पहचान कर उन्हें हटाने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को चार दिनों के भीतर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।
क्यों संवेदनशील हैं नदी के डूब क्षेत्र?
विशेषज्ञों के अनुसार, डूब क्षेत्र किसी भी नदी का प्राकृतिक विस्तार क्षेत्र होता है, जहां बाढ़ के समय अतिरिक्त जल फैलता है। इन क्षेत्रों में निर्माण होने से कई गंभीर समस्याएं उत्पन्न होती हैं—
नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बाधा आती है।
बाढ़ का जोखिम बढ़ जाता है।
भूजल पुनर्भरण (ग्राउंडवॉटर रिचार्ज) प्रभावित होता है।
जैव विविधता और नदी पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचता है।
आसपास के शहरी क्षेत्रों में जलभराव और आपदा की आशंका बढ़ जाती है।
हर वर्ष बाढ़ के दौरान बढ़ती हैं राहत और बचाव की चुनौतियां
डूब क्षेत्र में अवैध बसावट के कारण बाढ़ के समय प्रशासन को बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाने पड़ते हैं। पिछले वर्षों में यमुना में आई बाढ़ के दौरान कई अवैध बस्तियों और निर्माणों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने में प्रशासन को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डूब क्षेत्रों को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया गया, तो भविष्य में बाढ़ का प्रभाव और अधिक विनाशकारी हो सकता है।
किन क्षेत्रों में सबसे अधिक अवैध निर्माण?
यमुना नदी नोएडा के सेक्टर-94, 124, 125, 127, 128, 131, 133, 134, 135, 150 और 168 के आसपास से गुजरती है। वहीं हरनंदी (हिंडन) नदी छिजारसी से प्रवेश कर सेक्टर-63ए, बेहलोलपुर, शहदरा, सुथियाना, गढ़ी चौखंडी, सेक्टर-115, 118, 123, 143, 143ए, 148 और 150 से होकर मोमनाथल के पास यमुना में मिलती है।
इन दोनों नदियों के किनारे स्थित डूब क्षेत्रों में बड़ी संख्या में अवैध फार्म हाउस, पक्के मकान और व्यावसायिक ढांचे खड़े हो चुके हैं।
बड़ा सवाल: अवैध निर्माणों के लिए जिम्मेदार कौन?
प्राधिकरण की इस कार्रवाई के साथ ही कई अहम सवाल भी उठ रहे हैं। यदि डूब क्षेत्र में वर्षों से अवैध निर्माण होते रहे, तो संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल ध्वस्तीकरण अभियान पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि निम्नलिखित पहलुओं पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा—
निर्माण के दौरान जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
डूब क्षेत्रों की नियमित ड्रोन और सैटेलाइट निगरानी की जाए।
अवैध निर्माणों को प्रारंभिक चरण में ही रोका जाए।
पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
नदी संरक्षण और शहरी विकास के बीच संतुलित नीति तैयार की जाए।
नदी बचाने की लड़ाई या प्रशासनिक चुनौती?
यमुना और हरनंदी के डूब क्षेत्रों से अवैध निर्माण हटाना केवल अतिक्रमण विरोधी अभियान नहीं, बल्कि नदी संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और लाखों लोगों की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है।
विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि नदियों के प्राकृतिक मार्ग और बाढ़ क्षेत्र को संरक्षित नहीं किया गया, तो भविष्य में नोएडा और आसपास के क्षेत्रों को गंभीर जलभराव, बाढ़ और पर्यावरणीय संकट का सामना करना पड़ सकता है।
नोएडा प्राधिकरण की यह कार्रवाई आने वाले समय में इस बात की कसौटी होगी कि क्या शहर विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित कर पाता है या नहीं।














