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नोएडा प्राधिकरण का अजब निजाम! मुख्यालय सेक्टर-96 में, लेकिन किसानों के कागजों की दौड़ अब भी सेक्टर-6 तक!

“बैंक के लिए नए भवन में जगह, मगर रिकॉर्ड रूम और ऑनलाइन केंद्र के लिए रास्ता साफ नहीं! ग्राम विकास संगठन ने उठाए तीखे सवाल, अशोक चौहान बोले—जनता की सुविधा पर भी हो फैसला”

नोएडा: सत्ता के गलियारों में भवन बदलने से लेकर कार्यालयों की नई व्यवस्था तक, प्रशासनिक फैसले अक्सर बड़े बदलाव के रूप में पेश किए जाते हैं। लेकिन असली सवाल तब खड़ा होता है, जब इमारत बदल जाती है, अधिकारी नई जगह बैठने लगते हैं और आम आदमी की परेशानी जस की तस बनी रहती है। नोएडा प्राधिकरण के सेक्टर-6 से सेक्टर-96 स्थित मुख्य प्रशासनिक भवन में स्थानांतरण के बाद रिकॉर्ड रूम और ऑनलाइन आवेदन केंद्र का पुरानी जगह पर संचालित होना इसी सवाल को जन्म दे रहा है। आखिर जब प्राधिकरण का मुख्यालय नए पते पर पहुंच गया, तो किसानों और आम नागरिकों के जरूरी दस्तावेजों से जुड़ी सुविधाएं अब तक पुराने ठिकाने पर क्यों हैं?

ग्राम विकास संगठन नोएडा ने इसी मुद्दे को लेकर प्राधिकरण की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। संगठन के संयोजक डीपी चौहान के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य कार्यपालक अधिकारी के नाम संबोधित ज्ञापन अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी वंदना त्रिपाठी को सेक्टर-96 स्थित मुख्य प्रशासनिक कार्यालय में सौंपा। संगठन के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अशोक चौहान ने मांग की कि सेक्टर-6 स्थित इंदिरा गांधी कला केंद्र में चल रहे रिकॉर्ड रूम और ऑनलाइन विभाग को तत्काल सेक्टर-96 में स्थानांतरित किया जाए।

मामला देखने में भले ही दो विभागों के स्थानांतरण का लगे, लेकिन इसके केंद्र में एक बड़ा सवाल है—क्या प्रशासनिक सुविधाओं का पुनर्गठन जनता की सुविधा को ध्यान में रखकर हो रहा है, या जनता से यह उम्मीद की जा रही है कि वह नए और पुराने कार्यालयों के बीच खुद ही तालमेल बैठाती रहे?

मुख्यालय नया, जनता की दौड़ पुरानी!

नोएडा प्राधिकरण का मुख्य प्रशासनिक कार्यालय सेक्टर-6 से सेक्टर-96 स्थानांतरित हो चुका है। संगठन के मुताबिक, प्राधिकरण के विभिन्न विभाग भी नए प्रशासनिक भवन में संचालित हो रहे हैं, लेकिन रिकॉर्ड रूम और दस्तावेजों को ऑनलाइन कराने की सुविधा अब भी सेक्टर-6 स्थित इंदिरा गांधी कला केंद्र में उपलब्ध है।

यानी प्रशासनिक व्यवस्था का एक हिस्सा नए पते पर है, जबकि जरूरी दस्तावेजों से जुड़े काम के लिए लोगों को पुराने पते का रुख करना पड़ रहा है। किसान को यदि किसी रिकॉर्ड या ऑनलाइन प्रक्रिया के लिए सेक्टर-6 जाना पड़े और दूसरे प्रशासनिक काम के लिए सेक्टर-96 पहुंचना पड़े, तो उसके समय, मेहनत और किराये का हिसाब कौन देगा?

सरकारी कार्यालयों का स्थानांतरण प्रशासनिक सुविधा के लिए किया जाता है। लेकिन यदि नई व्यवस्था के बावजूद नागरिकों को दो स्थानों के बीच चक्कर लगाने पड़ें, तो स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठेगा कि बदलाव की योजना बनाते समय आम आदमी की सुविधा को कितनी प्राथमिकता दी गई।

व्यंग्य की भाषा में कहें तो प्राधिकरण का पता बदल गया, लेकिन जनता की दौड़ का रास्ता नहीं बदला। अब सवाल यह है कि प्रशासनिक बदलाव का लाभ फाइलों और भवनों तक सीमित रहेगा या किसानों के दरवाजे तक भी पहुंचेगा?

बैंक के लिए जगह मिल गई, जनता के कागजों की बारी कब?

ग्राम विकास संगठन ने अपने ज्ञापन में एक ऐसा मुद्दा उठाया है, जिसका जवाब प्राधिकरण से अपेक्षित है। संगठन के मुताबिक, सेक्टर-96 स्थित मुख्य प्रशासनिक भवन में बैंक के संचालन के लिए जगह उपलब्ध कराई गई है। ऐसे में रिकॉर्ड रूम और ऑनलाइन आवेदन केंद्र के स्थानांतरण के लिए भी उपयुक्त व्यवस्था तलाशने की मांग उठ रही है।

यहां सवाल बैंक के संचालन पर आपत्ति का नहीं, बल्कि प्राथमिकताओं और नागरिक सुविधाओं के बीच संतुलन का है। बैंक की सुविधा भी जरूरी है और रिकॉर्ड रूम भी। लेकिन जब किसान और आम नागरिक अपने दस्तावेजों से जुड़े काम के लिए परेशान होने की बात कह रहे हैं, तो उनकी सुविधा को भी उसी गंभीरता से क्यों न देखा जाए?

यदि नए भवन में स्थान की कमी, तकनीकी बाधाएं, अभिलेखों की सुरक्षा या दूसरे प्रशासनिक कारण हैं, तो प्राधिकरण उन्हें सार्वजनिक रूप से स्पष्ट कर सकता है। लेकिन यदि समाधान संभव है, तो फिर उसकी दिशा में समयबद्ध कार्रवाई क्यों न हो?

यही वह सवाल है, जो अब संगठन के ज्ञापन के जरिए प्रशासन के सामने खड़ा किया गया है। जनता को केवल यह सुनना पर्याप्त नहीं कि कार्यालय स्थानांतरित हो गया है। उसे यह भी महसूस होना चाहिए कि प्रशासनिक बदलाव से उसका काम पहले की तुलना में आसान हुआ है।

पर्दे के पीछे की कहानी क्या है? सवाल प्राथमिकताओं का, आरोपों का नहीं

प्रशासनिक फैसलों के पीछे अक्सर भवन, बजट, विभागीय समन्वय और सुविधाओं की उपलब्धता जैसे कई पहलू होते हैं। लेकिन जनता के सामने परिणाम सबसे ज्यादा मायने रखते हैं। सेक्टर-96 में कार्यालयों के स्थानांतरण और सेक्टर-6 में रिकॉर्ड रूम व ऑनलाइन केंद्र के बने रहने की स्थिति पर भी अब यही कसौटी लागू होती है।

क्या स्थानांतरण की योजना बनाते समय सभी नागरिक सेवाओं को एक साथ स्थानांतरित करने की व्यवहार्यता का आकलन किया गया था? क्या संबंधित विभागों के बीच समन्वय की कोई समयसीमा तय की गई थी? क्या रिकॉर्ड रूम और ऑनलाइन केंद्र को नए परिसर में स्थानांतरित करने के लिए कोई प्रस्ताव विचाराधीन है? और यदि कोई बाधा है, तो उसे दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब तथ्यों और प्रशासनिक रिकॉर्ड के आधार पर दिया जाना चाहिए।

राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में फैसलों की चर्चा अक्सर इस बात पर केंद्रित रहती है कि कौन-सा कार्यालय कहां पहुंचा, किस भवन में कौन-सी सुविधा शुरू हुई और किस योजना को कितनी तेजी से आगे बढ़ाया गया। लेकिन आम नागरिक के लिए असली उपलब्धि तब होगी, जब उसका काम कम समय में और कम खर्च में हो सके।

इस मामले में किसी छिपी साजिश या जानबूझकर की गई अनदेखी का निष्कर्ष निकालना तथ्यों के बिना उचित नहीं होगा। मगर यह पूछना बिल्कुल जायज है कि यदि जनता की परेशानी पहले भी अधिकारियों के संज्ञान में लाई जा चुकी है, तो समाधान की स्थिति क्या है?

यही वह बिंदु है, जहां प्रशासनिक जवाबदेही की परीक्षा होती है। फाइल पर मांग दर्ज हो जाना एक बात है; उस मांग पर निर्णय लेकर जनता को राहत देना दूसरी।

पहले भी दिया गया मांगपत्र, अब फिर उठी आवाज

ग्राम विकास संगठन का कहना है कि रिकॉर्ड रूम और ऑनलाइन विभाग को सेक्टर-96 में स्थानांतरित कराने के संबंध में पहले भी अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी वंदना त्रिपाठी को सेक्टर-96 स्थित जनसुनवाई केंद्र में मांगपत्र सौंपा गया था। संगठन के मुताबिक, इसके बावजूद अब तक अपेक्षित कार्रवाई सामने नहीं आई है।

इसी वजह से संगठन ने दोबारा ज्ञापन देकर मांग को प्रमुखता से उठाया है। संगठन चाहता है कि इस बार मामला केवल ज्ञापन प्राप्त करने और आगे भेजने तक सीमित न रहे, बल्कि संबंधित विभागों से रिपोर्ट लेकर निर्णय की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।

यदि प्रस्ताव पर कार्रवाई लंबित है, तो उसकी वजह बताई जानी चाहिए। यदि स्थानांतरण संभव है, तो उसकी समयसीमा तय होनी चाहिए। और यदि तत्काल स्थानांतरण व्यावहारिक नहीं है, तो तब तक नागरिकों को राहत देने की वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।

आखिर जनता के लिए प्रशासन का मतलब केवल आदेश जारी करना नहीं, बल्कि उसकी समस्याओं का समाधान करना भी है।

किसानों के समय और जेब की कीमत कौन समझेगा?

प्राधिकरण से जुड़े भूमि अभिलेखों, दस्तावेजों और ऑनलाइन प्रक्रियाओं का महत्व उन लोगों के लिए सबसे अधिक है, जिन्हें अपने काम के सिलसिले में बार-बार कार्यालय जाना पड़ सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले किसानों और अन्य आवेदकों के लिए एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक जाना अतिरिक्त समय और खर्च का कारण बन सकता है।

हर नागरिक के पास निजी वाहन नहीं होता। हर व्यक्ति के लिए बार-बार यात्रा करना आसान नहीं होता। किसी किसान को अपने काम के लिए परिवार या दूसरे व्यक्ति की मदद लेनी पड़े, तो परेशानी और बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में प्रशासनिक सुविधाओं का बेहतर समन्वय केवल भवन प्रबंधन का मुद्दा नहीं, बल्कि नागरिकों के समय और संसाधनों का सम्मान करने का विषय भी है।

डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य भी यही है कि प्रक्रियाएं सरल हों, अनावश्यक भागदौड़ घटे और लोगों को सुविधाजनक सेवाएं मिलें। लेकिन ऑनलाइन आवेदन की सुविधा तक पहुंचने के लिए भी यदि नागरिक को पुराने कार्यालय का चक्कर लगाना पड़े, तो व्यवस्था की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

अब प्राधिकरण को देना होगा स्पष्ट जवाब

ग्राम विकास संगठन नोएडा की मांग स्पष्ट है कि सेक्टर-6 स्थित इंदिरा गांधी कला केंद्र से रिकॉर्ड रूम और ऑनलाइन विभाग को सेक्टर-96 स्थित मुख्य प्रशासनिक भवन में जल्द स्थानांतरित किया जाए। संगठन के संयोजक डीपी चौहान के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन के जरिए यह मुद्दा फिर प्रशासन के सामने रखा गया है।

राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अशोक चौहान ने किसानों और आम जनता की परेशानी को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि आवश्यक सुविधाएं एक ही प्रशासनिक परिसर में उपलब्ध होने से लोगों को राहत मिल सकती है। संगठन चाहता है कि प्राधिकरण इस मांग पर गंभीरता से विचार करे और अनावश्यक देरी के बजाय समाधान की दिशा में कार्रवाई करे।

अब देखने वाली बात यह होगी कि प्राधिकरण इस मांग पर क्या रुख अपनाता है। क्या रिकॉर्ड रूम और ऑनलाइन केंद्र को सेक्टर-96 में स्थानांतरित करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे? क्या संगठन को पहले दिए गए मांगपत्र पर हुई कार्रवाई की जानकारी मिलेगी? और क्या किसानों को कार्यालयों के बीच होने वाली अतिरिक्त दौड़ से राहत मिलेगी?

क्योंकि प्रशासनिक व्यवस्था की असली सफलता नए भवन, बड़े परिसर या बदले हुए पते से नहीं, बल्कि जनता के घटते चक्करों और आसान होते काम से तय होती है।

फिलहाल सवाल सीधा है—जब प्राधिकरण का मुख्यालय सेक्टर-96 पहुंच चुका है, तो किसानों के दस्तावेजों से जुड़ी जरूरी सुविधाएं वहां पहुंचने में और कितना समय लेंगी?

प्रमुख मांग: रिकॉर्ड रूम और ऑनलाइन आवेदन केंद्र को सेक्टर-96 स्थित मुख्य प्रशासनिक भवन में शीघ्र स्थानांतरित किया जाए तथा स्थानांतरण की प्रक्रिया, संभावित बाधाओं और समयसीमा के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जाए।

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VIKAS TRIPATHI
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