नोएडा प्राधिकरण ने अपने यहां कार्यरत लगभग 4800 श्रमशक्ति आपूर्ति कर्मियों के लिए एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए उन्हें मेडिकल इंश्योरेंस सुविधा प्रदान करने की स्वीकृति दे दी है। यह निर्णय प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) द्वारा लिया गया, जिसके तहत इन कर्मियों को अब बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी।
यह प्रस्ताव पहले ही नोएडा प्राधिकरण की 215वीं बोर्ड बैठक (दिनांक 26 अक्टूबर 2024) में अनुमोदित किया जा चुका था। अब इसे क्रियान्वित करते हुए SBI General Insurance के माध्यम से मेडिकल इंश्योरेंस सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
क्या है योजना की खासियत?
1.प्रत्येक कर्मी को सालाना ₹5 लाख तक का मेडिकल कवर मिलेगा
2.इस कवर में कर्मी के साथ उसके 5 आश्रित सदस्य भी शामिल होंगे
3.प्राधिकरण द्वारा प्रति कर्मी ₹10,000 वार्षिक प्रीमियम का भुगतान किया जाएगा
4.योजना के तहत गंभीर बीमारियों का इलाज भी कवर होगा
5.इलाज की सुविधा नोएडा और दिल्ली के कई बड़े अस्पतालों में उपलब्ध होगी
क्यों जरूरी था यह फैसला?
पहले इन कर्मियों को ESI (Employee State Insurance) योजना के तहत सीमित मेडिकल सुविधा मिलती थी, जिसकी अधिकतम सीमा ₹21,000 तक थी। इस सीमा के पार होने पर अधिकांश कर्मी मेडिकल सुविधा से वंचित हो जाते थे। लगातार उठ रही मांगों और कर्मचारियों की जरूरतों को देखते हुए प्राधिकरण ने यह बड़ा कदम उठाया।
कर्मियों को क्या होगा फायदा?
बेहतर और व्यापक स्वास्थ्य सुरक्षा
गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक राहत
परिवार के सदस्यों को भी मेडिकल सुरक्षा
निजी अस्पतालों में इलाज की सुविधा
कैसे काम करेगी योजना?
SBI General Insurance द्वारा दी जा रही इस योजना के तहत कर्मियों को इंश्योरेंस के पहले दिन से ही इलाज की सुविधा मिलेगी। यानी पॉलिसी शुरू होते ही वे कैशलेस या रिइम्बर्समेंट के जरिए इलाज करा सकेंगे।
समझौता और लागू होने की प्रक्रिया
23 अप्रैल 2026 को नोएडा प्राधिकरण और SBI जनरल इंश्योरेंस कंपनी के बीच इस योजना को लागू करने के लिए औपचारिक प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद जल्द ही सभी पात्र कर्मियों को इस योजना का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।
प्रशासन और कर्मचारियों की प्रतिक्रिया
इस फैसले को कर्मचारियों के हित में एक बड़ा और स्वागतयोग्य कदम माना जा रहा है। लंबे समय से मेडिकल सुविधाओं की मांग कर रहे श्रमिकों को अब राहत मिलेगी। साथ ही यह कदम प्राधिकरण की कर्मचारी-हितैषी नीतियों को भी दर्शाता है।
नोएडा प्राधिकरण का यह निर्णय न केवल श्रमिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाएगा, बल्कि उन्हें स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं से भी काफी हद तक मुक्त करेगा। आने वाले समय में यह मॉडल अन्य सरकारी संस्थानों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है, जहां अनुबंध या आउटसोर्स कर्मचारियों को भी समान सुविधाएं देने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं।














