“इजराइल-हिजबुल्लाह संघर्ष में शांति की उम्मीदों को झटका, दक्षिणी लेबनान में हवाई और ड्रोन हमले; बफर जोन से सेना न हटाने पर बढ़ा विवाद”
नई दिल्ली: इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष को रोकने के लिए जिस युद्धविराम (सीजफायर) पर शुक्रवार को सहमति बनी थी, वह कुछ ही घंटों में सवालों के घेरे में आ गया है। युद्धविराम लागू होने के बाद दक्षिणी लेबनान में इजराइली हवाई और ड्रोन हमलों में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घर और इमारतें मलबे में तब्दील हो गईं।
लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी NNA के अनुसार, शनिवार तड़के नबातियेह और उसके आसपास के इलाकों में इजराइली लड़ाकू विमानों तथा ड्रोन ने कई ठिकानों को निशाना बनाया। हमलों के साथ-साथ तोपों से भी गोलाबारी की गई, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई।
शांति समझौते को लगा बड़ा झटका
अमेरिकी मध्यस्थता से हुआ यह युद्धविराम शुक्रवार शाम से लागू हुआ था। इस समझौते को क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा था। हालांकि सीजफायर लागू होने के कुछ ही घंटों बाद हुए हमलों ने यह संकेत दे दिया है कि जमीनी स्तर पर हालात अब भी बेहद नाजुक बने हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों पक्ष एक-दूसरे पर उल्लंघन के आरोप लगाते रहे तो यह संघर्ष फिर बड़े युद्ध का रूप ले सकता है।
बफर जोन बना विवाद की जड़
युद्धविराम की सबसे बड़ी कमजोरी दक्षिणी लेबनान में मौजूद इजराइली सैन्य उपस्थिति मानी जा रही है। इजराइल ने अब तक अपने सुरक्षा क्षेत्र (बफर जोन) से सेना नहीं हटाई है। हिजबुल्लाह लगातार कह रहा है कि जब तक इजराइली सैनिक लेबनानी क्षेत्र में मौजूद रहेंगे, तब तक स्थायी शांति संभव नहीं है।
यही वजह है कि युद्धविराम के बावजूद दोनों पक्षों के बीच गहरा अविश्वास बना हुआ है।
पूरे मध्य पूर्व पर पड़ सकता है असर
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब क्षेत्र पहले से ही इजराइल, ईरान और उसके समर्थक संगठनों के बीच बढ़ते तनाव का सामना कर रहा है। अगर लेबनान मोर्चे पर संघर्ष दोबारा भड़कता है तो इसका असर पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा, वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर पड़ सकता है।
विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले 48 घंटे तय करेंगे कि यह सीजफायर टिकेगा या फिर क्षेत्र एक नए और बड़े संघर्ष की ओर बढ़ेगा।














