नई दिल्ली,: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर कालिंदी कुंज स्थित यमुना तट एवं श्मशान भूमि परिसर में एक विशेष योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, समाजसेवियों, युवाओं, वरिष्ठ नागरिकों तथा स्थानीय निवासियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम केवल योगाभ्यास तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह स्वास्थ्य जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक एकता और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का सशक्त मंच बनकर उभरा।
योग: भारत की प्राचीन धरोहर से वैश्विक जन-आंदोलन तक
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि योग भारत की हजारों वर्षों पुरानी आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक परंपरा का अभिन्न अंग है। आज यह विश्व के करोड़ों लोगों के जीवन का हिस्सा बन चुका है। इसके लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की विशेष सराहना की गई, जिनकी पहल पर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता प्रदान की।
वक्ताओं ने कहा कि योग ने भारत की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर नई प्रतिष्ठा दिलाई है तथा यह विश्व को स्वस्थ जीवन, मानसिक शांति और मानवीय संतुलन का मार्ग दिखा रहा है।
बढ़ती जीवनशैली संबंधी बीमारियों के बीच योग की प्रासंगिकता
कार्यक्रम में इस बात पर विशेष चिंता व्यक्त की गई कि आधुनिक जीवनशैली, तनाव, प्रदूषण, अनियमित खानपान और शारीरिक निष्क्रियता के कारण हृदय रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, अवसाद और मानसिक तनाव जैसी समस्याएँ तेजी से बढ़ रही हैं।
विशेषज्ञों और वक्ताओं ने बताया कि नियमित योगाभ्यास न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है बल्कि मानसिक एकाग्रता, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच को भी मजबूत करता है। योग आज के समय में एक सस्ती, सुलभ और प्रभावी स्वास्थ्य पद्धति के रूप में उभरकर सामने आया है।
यमुना तट पर योग: पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश
कालिंदी कुंज यमुना घाट पर आयोजित इस कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण संदेश पर्यावरण संरक्षण भी रहा। उपस्थित लोगों ने यमुना नदी की स्वच्छता, जल संरक्षण तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी निभाने का संकल्प लिया।
वक्ताओं ने कहा कि जिस प्रकार योग शरीर और मन को शुद्ध करता है, उसी प्रकार समाज का दायित्व है कि वह नदियों, जल स्रोतों और पर्यावरण को भी स्वच्छ एवं सुरक्षित बनाए रखे। यमुना केवल एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, संस्कृति और जीवन का आधार है।
जनप्रतिनिधियों के विचारों से मिला प्रेरणा का संदेश
इस अवसर पर दक्षिणी दिल्ली के सांसद रामबीर सिंह बिधूड़ी, निगम पार्षद ब्रह्म सिंह बिधूड़ी तथा पूर्व डिप्टी मेयर बीर सिंह के प्रेरणादायक विचारों का उल्लेख करते हुए वक्ताओं ने कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग को योग और स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों से जुड़ना चाहिए। स्वस्थ नागरिक ही सशक्त राष्ट्र की नींव होते हैं।
सामाजिक समरसता और सामूहिक चेतना का उदाहरण बना आयोजन
कार्यक्रम में विभिन्न आयु वर्ग के लोगों ने एक साथ योगाभ्यास कर सामाजिक एकता, भाईचारे और सामूहिक सहभागिता का परिचय दिया। यमुना घाट क्षेत्र के नागरिकों ने यह संदेश दिया कि स्वस्थ समाज का निर्माण केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि जनभागीदारी और सामूहिक संकल्प से संभव है।
आचार्य दीपक शर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका
इस आयोजन के सफल संचालन में समाजसेवी एवं कालिंदी कुंज यमुना घाट के संस्थापक एवं संरक्षक आचार्य दीपक शर्मा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने उपस्थित लोगों से योग को केवल एक दिवस का कार्यक्रम न मानकर दैनिक जीवन की दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि आज का समय हमें शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक संतुलन, आध्यात्मिक जागरूकता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भी सीख देता है, और योग इन सभी उद्देश्यों को प्राप्त करने का सर्वोत्तम माध्यम है।
स्वस्थ भारत के निर्माण का संकल्प
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने नियमित योग करने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, नशामुक्त समाज के निर्माण, पर्यावरण संरक्षण तथा सामाजिक सेवा के कार्यों में सक्रिय भागीदारी का सामूहिक संकल्प लिया।
“योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने वाली जीवन पद्धति है।”
“स्वस्थ व्यक्ति, स्वस्थ समाज और स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण का सबसे सशक्त आधार योग है।”














