पश्चिम बंगाल के चुनावी माहौल में Narendra Modi ने कृष्णनगर की रैली में तीखे और प्रतीकात्मक अंदाज़ में तृणमूल कांग्रेस पर हमला बोला। “झालमुड़ी मैंने खाई और झटका टीएमसी को लगा” जैसे बयान के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि जनता का मूड बदल रहा है और इसका सीधा असर चुनावी नतीजों में दिखेगा। यह बयान सिर्फ एक हल्की-फुल्की टिप्पणी नहीं था, बल्कि स्थानीय संस्कृति (झालमुड़ी) को जोड़कर राजनीतिक संदेश देने की रणनीति का हिस्सा था।
चुनावी संदर्भ और रणनीति
बंगाल में उस समय एक चरण की वोटिंग चल रही थी और दूसरे चरण (29 अप्रैल) के लिए जोरदार प्रचार हो रहा था। पीएम मोदी की रैली इसी कड़ी का हिस्सा थी, जहां उन्होंने मतदाताओं को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की कि इस बार चुनाव “जनता खुद लड़ रही है।” उनका दावा था कि जहां ज्यादा मतदान होगा, वहां भाजपा को फायदा मिलेगा—यह संकेत देता है कि पार्टी उच्च वोटिंग प्रतिशत को अपने पक्ष में मान रही है।
On 4 May, the Lotus is certain to bloom… pic.twitter.com/baElyyzhuV
— Narendra Modi (@narendramodi) April 23, 2026
टीएमसी और ‘जंगलराज’ का मुद्दा
मोदी ने Mamata Banerjee की सरकार पर सीधे निशाना साधते हुए “जंगलराज” का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब है, सिंडिकेट और भ्रष्टाचार का बोलबाला है, और आम जनता इससे परेशान है।
उनके भाषण के मुख्य आरोपों में शामिल थे:
घुसपैठ और उसका संरक्षण
भ्रष्टाचार और कथित लूट
राजनीतिक हिंसा और डर का माहौल
उन्होंने यह भी कहा कि “जिसने लूटा है, उसे लौटाना पड़ेगा,” जो कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई के वादे के रूप में पेश किया गया।
चुनावी हिंसा और बदलता माहौल
पीएम मोदी ने दावा किया कि इस बार बंगाल में 50 साल बाद चुनावी हिंसा में कमी आई है और इसे चुनाव आयोग की सफलता बताया। यह बयान महत्वपूर्ण है क्योंकि बंगाल के चुनाव लंबे समय से हिंसा के आरोपों के कारण चर्चा में रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अब “भय जा रहा है और भरोसा आ रहा है,” यानी मतदाता पहले की तुलना में अधिक स्वतंत्र महसूस कर रहे हैं।
10 guarantees for the Nari Shakti of West Bengal… pic.twitter.com/JRnVuWMzzR
— Narendra Modi (@narendramodi) April 23, 2026
विभिन्न वर्गों को संदेश
अपने भाषण में मोदी ने समाज के अलग-अलग वर्गों को संबोधित किया:
सरकारी कर्मचारी: डर से मुक्त होकर वोट करने की अपील
डॉक्टर और शिक्षक: बेहतर व्यवस्था और सुरक्षित संस्थानों के लिए वोट
वकील: न्याय के लिए मतदान
व्यापारी और मजदूर वर्ग: सिंडिकेट से मुक्ति की बात
इस तरह उन्होंने व्यापक सामाजिक समर्थन का दावा पेश किया।
महिलाओं के लिए वादे
रैली में महिलाओं को लेकर भी कई घोषणाएं की गईं, जैसे:
सालाना ₹36,000 की आर्थिक सहायता
₹20 लाख तक का मुद्रा लोन
यह सीधे महिला मतदाताओं को आकर्षित करने की कोशिश मानी जा सकती है, जो बंगाल की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाती हैं।
राजनीतिक संदेश और चुनावी नैरेटिव
मोदी का पूरा भाषण एक बड़े नैरेटिव पर केंद्रित था—
“भय बनाम भरोसा” , “जंगलराज बनाम विकास” , “भ्रष्टाचार बनाम जवाबदेही”
उन्होंने यह भी कहा कि कई जिलों में टीएमसी “खाता तक नहीं खोल पाएगी,” जो आत्मविश्वास दिखाने के साथ-साथ कार्यकर्ताओं को उत्साहित करने का प्रयास था।
कृष्णनगर की यह रैली सिर्फ एक चुनावी सभा नहीं थी, बल्कि बंगाल चुनाव के लिए भाजपा की व्यापक रणनीति का हिस्सा थी—स्थानीय प्रतीकों का इस्तेमाल, विपक्ष पर तीखा हमला, और विभिन्न वर्गों को लक्षित वादे।
अब असली परीक्षा वोटिंग और उसके बाद आने वाले नतीजों में होगी, जहां यह साफ होगा कि “झालमुड़ी वाला झटका” वास्तव में किसे लगा।














