“20 दिन तक जिंदगी और मौत से जूझती रहीं रूपी सोरेन, 78 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस; शिबू सोरेन परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़”
रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां और झारखंड आंदोलन के दिग्गज नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की पत्नी रूपी सोरेन का निधन हो गया। रांची के एक निजी अस्पताल में करीब 20 दिनों तक उपचार के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही पूरे झारखंड में शोक की लहर दौड़ गई। राजनीतिक गलियारों से लेकर सामाजिक और आदिवासी समुदाय तक लोगों ने गहरी संवेदना व्यक्त की।
रूपी सोरेन पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं। उन्हें सांस लेने में गंभीर परेशानी के बाद 18 सितंबर को रांची के हिल व्यू हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में भर्ती कराया गया था। हालत गंभीर होने के बाद चिकित्सकों ने उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा था। डॉक्टरों की निगरानी में उनका लगातार उपचार चल रहा था, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. नितेश प्रिया ने समाचार एजेंसी PTI को बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन का रात करीब 8:30 बजे निधन हो गया। उनके मुताबिक, उन्हें 18 सितंबर को सांस लेने में तकलीफ के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
वेंटिलेटर पर थीं रूपी सोरेन, डॉक्टरों की निगरानी में चल रहा था इलाज
रूपी सोरेन की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल सूत्रों और चिकित्सकों के मुताबिक उन्हें सांस लेने में काफी परेशानी थी। इसके अलावा अन्य स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण उनकी स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई थी।
स्थिति ज्यादा बिगड़ने पर चिकित्सकों ने उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट दिया। परिवार और शुभचिंतक लगातार उनकी सेहत को लेकर चिंतित थे। अस्पताल में इलाज के दौरान डॉक्टरों की टीम ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन करीब तीन सप्ताह तक बीमारी से जूझने के बाद उनका निधन हो गया।
78 वर्ष की उम्र में रूपी सोरेन का जाना सोरेन परिवार के लिए बेहद भावुक और अपूरणीय क्षति है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के लिए यह व्यक्तिगत तौर पर बेहद कठिन समय माना जा रहा है।
दिशोम गुरु शिबू सोरेन की जीवनसंगिनी थीं रूपी सोरेन
रूपी सोरेन सिर्फ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां ही नहीं थीं, बल्कि झारखंड की राजनीति और आदिवासी आंदोलन के लंबे इतिहास से जुड़े एक महत्वपूर्ण परिवार का हिस्सा थीं। वह झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज आदिवासी नेता ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन की पत्नी थीं।
शिबू सोरेन ने झारखंड की अलग राज्य की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। लंबे राजनीतिक संघर्ष और आदिवासी अस्मिता की लड़ाई के बीच सोरेन परिवार झारखंड की राजनीति का प्रमुख चेहरा बनकर उभरा। ऐसे परिवार की मातृशक्ति के रूप में रूपी सोरेन की अपनी एक अलग पहचान रही।
उनके निधन के साथ सोरेन परिवार ने न सिर्फ परिवार की एक बुजुर्ग सदस्य को खोया है, बल्कि उस पीढ़ी की एक महत्वपूर्ण कड़ी भी खो दी है, जिसने झारखंड के राजनीतिक और सामाजिक बदलावों को करीब से देखा था।
निधन की खबर से झारखंड में शोक, नेताओं ने जताई संवेदना
रूपी सोरेन के निधन की खबर सामने आते ही राजनीतिक दलों के नेताओं और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने शोक व्यक्त करना शुरू कर दिया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए नेताओं ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
बरकागांव की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर रूपी सोरेन के निधन पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माताजी रूपी सोरेन के निधन का समाचार बेहद दुखद है। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित पूरे शोकाकुल परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की।
अंबा प्रसाद ने अपनी श्रद्धांजलि में कहा कि यह परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है और उन्होंने दिवंगत आत्मा के प्रति विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।
केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने भी जताया गहरा दुख
रूपी सोरेन के निधन पर केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने भी शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि झारखंड के मुख्यमंत्री की पूज्य माताजी के निधन का समाचार बेहद पीड़ादायक है।
संजय सेठ ने शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए ईश्वर से दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने की प्रार्थना की। उन्होंने परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति मिलने की कामना की और अंत में ‘ओम शांति’ कहा।
राजनीतिक मतभेदों से अलग हटकर इस दुख की घड़ी में नेताओं की संवेदनाएं बताती हैं कि व्यक्तिगत क्षति के समय राजनीतिक सीमाएं पीछे छूट जाती हैं।
मुख्यमंत्री के लिए बेहद कठिन घड़ी
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के लिए मां का निधन निश्चित तौर पर निजी जीवन का बेहद दुखद और भावुक क्षण है। सार्वजनिक जीवन में लगातार सक्रिय रहने वाले हेमंत सोरेन के लिए मां का जाना ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई संभव नहीं।
एक ओर राज्य की जिम्मेदारियां हैं और दूसरी ओर परिवार के भीतर गहरा दुख। ऐसे समय में मुख्यमंत्री के सामने निजी शोक और सार्वजनिक दायित्वों के बीच संतुलन की चुनौती भी होगी।
रूपी सोरेन लंबे समय से सोरेन परिवार की महत्वपूर्ण सदस्य थीं। परिवार के राजनीतिक सफर और सामाजिक जीवन में उनकी भूमिका एक मां और पत्नी के रूप में रही। उनके निधन से परिवार में जो खालीपन पैदा हुआ है, उसे भर पाना आसान नहीं होगा।
अस्पताल में 20 दिन तक चली जिंदगी की जंग
18 सितंबर को अस्पताल में भर्ती होने के बाद से रूपी सोरेन लगातार चिकित्सकीय निगरानी में थीं। सांस लेने में परेशानी के कारण उन्हें अस्पताल लाया गया था। बाद में स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण उनकी स्थिति गंभीर होती चली गई।
चिकित्सकों ने उनकी स्थिति को देखते हुए वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा। परिवार और शुभचिंतक उनकी हालत में सुधार की उम्मीद कर रहे थे। लेकिन करीब 20 दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच चली जंग के बाद आखिरकार रूपी सोरेन ने दुनिया को अलविदा कह दिया।
उनकी उम्र 78 वर्ष थी।
सोरेन परिवार के लिए अपूरणीय क्षति
झारखंड की राजनीति में सोरेन परिवार का नाम बेहद महत्वपूर्ण रहा है। शिबू सोरेन के लंबे राजनीतिक संघर्ष से लेकर हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने के सफर में परिवार ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं।
रूपी सोरेन ने परिवार के इन तमाम दौरों को करीब से देखा। राजनीतिक संघर्ष, सत्ता का उतार-चढ़ाव, सार्वजनिक जीवन की चुनौतियां और परिवार की जिम्मेदारियां—इन सभी के बीच वह परिवार की महत्वपूर्ण आधारशिला बनी रहीं।
उनका निधन ऐसे समय हुआ है जब हेमंत सोरेन खुद राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में मां का जाना मुख्यमंत्री और उनके परिवार के लिए भावनात्मक रूप से बेहद कठिन समय है।
झारखंड की सियासत में शोक का माहौल
रूपी सोरेन के निधन की खबर के बाद झारखंड के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में शोक का माहौल है। बड़ी संख्या में लोग सोरेन परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहे हैं।
आदिवासी समाज में भी रूपी सोरेन के निधन को एक बड़ी व्यक्तिगत क्षति के तौर पर देखा जा रहा है। शिबू सोरेन और हेमंत सोरेन के राजनीतिक जीवन से जुड़े लोगों ने परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट की हैं।
रूपी सोरेन की पहचान भले ही राजनीति के सक्रिय मंच पर किसी बड़े पद के रूप में न रही हो, लेकिन झारखंड की राजनीति के सबसे प्रभावशाली परिवारों में से एक की मातृशक्ति के तौर पर उनका महत्व हमेशा बना रहा।
मां की छांव उठी, पीछे रह गईं यादें
मां का जाना किसी भी व्यक्ति के जीवन की सबसे बड़ी व्यक्तिगत त्रासदियों में से एक होता है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके परिवार के लिए भी यह समय गहरे दुख का है।
रूपी सोरेन ने 78 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कहा, लेकिन अपने पीछे परिवार, शुभचिंतकों और चाहने वालों की ऐसी यादें छोड़ गईं जिन्हें भुलाया नहीं जा सकेगा।
झारखंड की राजनीति में शिबू सोरेन परिवार का सफर लंबा और संघर्षपूर्ण रहा है। इस सफर में रूपी सोरेन की मौजूदगी परिवार के लिए एक मजबूत भावनात्मक आधार रही होगी। अब उनके निधन के बाद सोरेन परिवार ने उस छांव को खो दिया है, जिसकी जगह कोई नहीं ले सकता।
रूपी सोरेन को श्रद्धांजलि देते हुए झारखंड की राजनीतिक और सामाजिक दुनिया एक ही प्रार्थना कर रही है—ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहने की शक्ति दें।















