नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने चुनाव 2026 के मद्देनज़र सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित भ्रामक तथा गैरकानूनी सामग्री के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने निर्देश दिया है कि ऐसी किसी भी सामग्री पर पोस्ट होने के 3 घंटे के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
आयोग के अनुसार, राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और उनके प्रचार से जुड़े व्यक्तियों को यह स्पष्ट रूप से बताना अनिवार्य होगा कि यदि कोई सामग्री कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के माध्यम से तैयार या संशोधित की गई है, तो उसे “AI-generated” के रूप में चिह्नित किया जाए। साथ ही, उस सामग्री के स्रोत की जानकारी देना भी आवश्यक होगा, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और मतदाताओं को गुमराह होने से बचाया जा सके।
सोशल मीडिया पर निगरानी तेज
आयोग ने कहा है कि असम, केरल, तमिलनाडु, पुदुचेरी और पश्चिम बंगाल में जारी विधानसभा चुनावों के दौरान सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री की निगरानी की जा रही है।
विशेष रूप से निम्न प्रकार की सामग्री पर कार्रवाई की जा रही है:
आदर्श आचार संहिता (MCC) का उल्लंघन
कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाली पोस्ट
मतदान प्रक्रिया या मशीनरी के संबंध में भ्रामक जानकारी
सामाजिक तनाव बढ़ाने वाली सामग्री
11 हजार से अधिक पोस्ट पर कार्रवाई
ECI के मुताबिक, 15 मार्च 2026 को चुनावों की घोषणा के बाद से अब तक 11,000 से अधिक सोशल मीडिया पोस्ट/यूआरएल की पहचान कर उन पर कार्रवाई की गई है। इसमें सामग्री हटाने, प्राथमिकी दर्ज करने, स्पष्टीकरण मांगने और खंडन जारी करने जैसे कदम शामिल हैं।
कानूनी प्रावधानों का पालन अनिवार्य
आयोग ने सभी संबंधित पक्षों को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000, आईटी नियम 2021 तथा आदर्श आचार संहिता के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 126 के तहत मतदान से पहले 48 घंटे के ‘साइलेंस पीरियड’ के दौरान किसी भी प्रकार के चुनाव प्रचार पर रोक लागू रहेगी।
C-Vigil ऐप के जरिए शिकायत
आयोग ने नागरिकों, राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को ECINET के C-Vigil मॉड्यूल के माध्यम से आदर्श आचार संहिता उल्लंघन की शिकायत दर्ज करने की सुविधा दी है।
15 मार्च से 19 अप्रैल 2026 के बीच:
3,23,099 शिकायतें दर्ज की गईं
इनमें से 96.01% शिकायतों का निपटारा
तय 100 मिनट की समय-सीमा के भीतर किया गया
निर्वाचन आयोग के इन निर्देशों का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखना और सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं पर समय रहते नियंत्रण करना है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित पक्षों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।














