Thursday, May 14, 2026
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“दिल्ली में BRICS, बीजिंग में ट्रंप-जिनपिंग मुलाकात” — वैश्विक संकट के बीच दुनिया की दो बड़ी बैठकों पर टिकी नजरें

नई दिल्ली/बीजिंग। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, वैश्विक ऊर्जा संकट और बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच दुनिया की नजरें इस समय दो अहम कूटनीतिक घटनाओं पर टिकी हुई हैं। एक ओर नई दिल्ली में BRICS देशों के विदेश मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक शुरू हो रही है, वहीं दूसरी ओर बीजिंग में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump और चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping के बीच बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय वार्ता हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन दोनों बैठकों का असर आने वाले महीनों में वैश्विक राजनीति, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और युद्ध कूटनीति पर पड़ सकता है।

दिल्ली में BRICS विदेश मंत्रियों की अहम बैठक

भारत सितंबर में होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन से पहले विदेश मंत्रियों की इस अहम बैठक की मेजबानी कर रहा है। बैठक की अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar करेंगे।

14 और 15 मई को आयोजित इस बैठक में रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov, ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi समेत कई देशों के शीर्ष प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।

बैठक का आयोजन नई दिल्ली स्थित Bharat Mandapam में किया जा रहा है, जहां पूरे दिन कई अहम सत्र होने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री Narendra Modi भी एक संयुक्त कॉन्फ्रेंस सत्र में शामिल हो सकते हैं।

क्या रहेगा बैठक का एजेंडा?

विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक का मुख्य फोकस नवाचार, स्वास्थ्य सहयोग, सतत विकास और सदस्य देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना है।

हालांकि, सबसे अधिक चर्चा पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और उसके वैश्विक प्रभाव पर होने की संभावना है। विशेष रूप से ईरान से जुड़े युद्ध और उसके कारण ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ रहे असर को लेकर सदस्य देशों के बीच गहन बातचीत हो सकती है।

सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में लिए जाने वाले फैसले सितंबर 2026 में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन का एजेंडा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

बीजिंग में ट्रंप-जिनपिंग की मुलाकात क्यों अहम?

उधर बीजिंग में दुनिया की दो सबसे बड़ी आर्थिक और रणनीतिक शक्तियों के बीच अहम वार्ता हुई है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नौ साल बाद चीन पहुंचे हैं। इससे पहले उन्होंने 2017 में चीन का दौरा किया था।

ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक को अमेरिका-चीन संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। व्यापार, तकनीक, इंडो-पैसिफिक रणनीति और पश्चिम एशिया संकट जैसे मुद्दों पर दोनों नेताओं के बीच चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान और पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध का असर इस मुलाकात पर भी पड़ सकता है, क्योंकि वैश्विक तेल बाजार और व्यापार मार्गों पर इसका सीधा प्रभाव दिखाई दे रहा है।

ईरान संकट बना वैश्विक चिंता का केंद्र

रक्षा मामलों के जानकारों के अनुसार, ईरान में जारी संघर्ष को 70 दिनों से अधिक समय हो चुका है और इसे रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बातचीत हो रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची की BRICS बैठक में मौजूदगी को भी इसी संदर्भ में बेहद अहम माना जा रहा है। संभावना है कि वे भारत समेत कई देशों के नेताओं से अलग-अलग मुलाकात कर क्षेत्रीय हालात पर चर्चा करेंगे।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मंच?

भारत इस समय बेहद संतुलित कूटनीति अपनाने की कोशिश कर रहा है। एक ओर वह अमेरिका के साथ अपने रणनीतिक और व्यापारिक संबंध मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरान के साथ भी संबंध बनाए रखना चाहता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान संकट का समाधान भारत के लिए सिर्फ ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह चाबहार बंदरगाह परियोजना से भी जुड़ा है, जिसे भारत अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक व्यापारिक पहुंच के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानता है।

क्या है BRICS और क्यों बढ़ रहा इसका प्रभाव?

BRICS दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जिसमें शुरुआत में ब्राजील, रूस, भारत और चीन शामिल थे। बाद में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद इसका नाम BRICS हो गया।

यह समूह वैश्विक आबादी के लगभग 49.5 प्रतिशत और दुनिया की GDP के करीब 40 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।

हाल के वर्षों में BRICS का तेजी से विस्तार हुआ है। 1 जनवरी 2024 को ईरान, मिस्र, इथियोपिया, सऊदी अरब और UAE इसमें शामिल हुए, जबकि 2025 में इंडोनेशिया भी इसका सदस्य बना।

विशेषज्ञों का मानना है कि BRICS आने वाले समय में “ग्लोबल साउथ” की आवाज के रूप में और अधिक प्रभावशाली भूमिका निभा सकता है।

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VIKAS TRIPATHI
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VIKAS TRIPATHI भारत देश की सभी छोटी और बड़ी खबरों को सामने दिखाने के लिए "पर्दाफास न्यूज" चैनल को लेके आए हैं। जिसके लोगो के बीच में करप्शन को कम कर सके। हम देश में समान व्यवहार के साथ काम करेंगे। देश की प्रगति को बढ़ाएंगे।
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