बिहार की राजनीति में महिला आरक्षण को लेकर एक बार फिर उबाल देखने को मिल रहा है। संजय सरावगी ने दावा किया है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के संसद में पारित नहीं होने से राज्य की “आधी आबादी” खुद को निराश और अपमानित महसूस कर रही है। इसी आक्रोश को आवाज देने के लिए आज पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में एक विशाल महिला रैली आयोजित की जा रही है।
लाखों महिलाओं के जुटने का दावा
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश नेतृत्व के अनुसार, इस रैली में बिहार के सभी जिलों से बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल होंगी। इसमें एनडीए की महिला कार्यकर्ताओं के साथ-साथ आम महिलाएं भी हिस्सा लेंगी। आयोजनकर्ताओं का कहना है कि यह सिर्फ राजनीतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकारों की आवाज है।
विपक्ष पर सीधा हमला
संजय सरावगी ने विपक्षी दलों—खासतौर पर आरजेडी और कांग्रेस—पर निशाना साधते हुए कहा कि संसद में इस विधेयक को पारित होने से रोकने के लिए विपक्ष जिम्मेदार है। रैली में शामिल महिलाएं इन दलों से जवाब मांगेंगी कि जब उनके परिवार की महिलाएं संसद तक पहुंच सकती हैं, तो ग्रामीण और आम महिलाओं को इस अवसर से वंचित क्यों रखा जा रहा है।
बड़े नेताओं का संबोधन
रैली को संबोधित करने के लिए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सहित एनडीए के कई वरिष्ठ नेता मंच पर मौजूद रहेंगे। इसके लिए गांधी मैदान में भव्य मंच और व्यापक इंतजाम किए गए हैं।
तैयारियां पूरी, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
प्रशासन और पार्टी संगठन दोनों स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है, ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
राजनीतिक संदेश क्या?
यह रैली केवल विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि आने वाले चुनावों से पहले महिलाओं के मुद्दों को केंद्र में लाने की रणनीति के रूप में भी देखी जा रही है। महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर जनता के बीच समर्थन जुटाने की कोशिश साफ नजर आ रही है।
कुल मिलाकर, आज का यह प्रदर्शन बिहार की राजनीति में महिला सशक्तिकरण के मुद्दे को नई दिशा दे सकता है। अब देखना होगा कि इस आक्रोश का राजनीतिक असर कितना गहरा होता है।














