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जब मेहनतकशों के चेहरों पर जले खुशियों के दीप, सेक्टर-105 की दीपावली बनी इंसानियत की मिसाल

“सफाईकर्मियों से लेकर सुरक्षा गार्डों तक को उपहार देकर आरडब्ल्यूए ने जताया आभार, कहा—इनके परिश्रम से ही रोशन और व्यवस्थित रहता है हमारा सेक्टर”

नोएडा, 6 नवंबर। दीपावली पर घरों में दीप जलते हैं, बाजार रोशनी से सजते हैं और लोग एक-दूसरे को मिठाइयां बांटकर त्योहार की खुशियां मनाते हैं। लेकिन किसी भी शहर और आवासीय क्षेत्र की असली रौनक उन लोगों की मेहनत से कायम रहती है, जो खुद दूसरों की खुशियों और सुविधाओं के लिए दिन-रात काम करते हैं। ऐसे में यदि त्योहार की खुशियों में उन मेहनतकश लोगों को भी बराबर का भागीदार बनाया जाए, तो उत्सव का अर्थ और भी व्यापक हो जाता है। इसी सोच के साथ नोएडा के सेक्टर-105 में आरडब्ल्यूए कार्यकारिणी समिति ने दीपावली का पर्व अपने क्षेत्र की व्यवस्थाओं को संभालने वाले कर्मचारियों के साथ मनाकर सामाजिक सरोकार और मानवीय संवेदना की एक सराहनीय मिसाल पेश की।

सेक्टर-105 में आयोजित इस विशेष दीपावली कार्यक्रम में सफाई कर्मचारियों, सुरक्षा गार्डों, उद्यान विभाग के कर्मचारियों तथा जल एवं सीवर विभाग से जुड़े कर्मियों को आमंत्रित कर सम्मानपूर्वक दीपावली उपहार भेंट किए गए। आयोजन का उद्देश्य केवल त्योहार के अवसर पर उपहार बांटना नहीं, बल्कि उन लोगों के प्रति आभार व्यक्त करना था, जिनके अथक परिश्रम से सेक्टर की साफ-सफाई, सुरक्षा, हरियाली और बुनियादी सुविधाएं लगातार सुचारू बनी रहती हैं।

आमतौर पर त्योहारों के दौरान समाज का ध्यान सजावट, खरीदारी और उत्सव की तैयारियों पर रहता है, लेकिन इन तैयारियों के पीछे काम करने वाले कर्मचारियों की भूमिका अक्सर चर्चा से दूर रह जाती है। सेक्टर-105 की आरडब्ल्यूए ने इसी दूरी को कम करने का प्रयास किया। कार्यक्रम में जब कर्मचारियों को आत्मीयता के साथ उपहार दिए गए, तो उनके चेहरों पर दिखाई देने वाली खुशी और संतुष्टि ने आयोजन को खास बना दिया। यह दृश्य इस बात का प्रतीक था कि सम्मान और अपनत्व का भाव किसी भी महंगे उपहार से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होता है।

आरडब्ल्यूए अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय ने इस अवसर पर कहा कि दीपावली केवल अपने घरों को रोशन करने का पर्व नहीं है, बल्कि दूसरों के जीवन में भी खुशियों का उजाला पहुंचाने का अवसर है। उन्होंने कहा कि सेक्टर की स्वच्छता बनाए रखने वाले सफाई कर्मचारी हों, दिन-रात सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाले गार्ड हों या जल, सीवर और उद्यान व्यवस्था को संभालने वाले कर्मचारी, सभी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। कड़ाके की ठंड, भीषण गर्मी और प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद ये कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं। इनके परिश्रम के कारण ही निवासियों को बेहतर और व्यवस्थित वातावरण मिल पाता है।

उन्होंने कहा कि इन कर्मयोगियों के साथ त्योहार की खुशियां साझा करना आरडब्ल्यूए के लिए केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब मेहनत करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान और बराबरी का स्थान मिले। दीपावली की सार्थकता भी तभी है, जब खुशियों का प्रकाश समाज के हर वर्ग तक पहुंचे और कोई भी व्यक्ति अपने आपको उपेक्षित महसूस न करे।

कार्यक्रम में उपस्थित आरडब्ल्यूए की उपाध्यक्ष श्रीमती रानी गौतम ने कहा कि इन कर्मचारियों की निष्ठा, मेहनत और सेवाभाव के सामने कोई भी उपहार बड़ा नहीं हो सकता। वे पूरे समर्पण के साथ अपने दायित्व निभाते हैं और उनके इसी योगदान से सेक्टर की व्यवस्थाएं बेहतर बनी रहती हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के चेहरों पर दिखाई देने वाली प्रसन्नता ही इस आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। ऐसे अवसर समाज के विभिन्न वर्गों के बीच आपसी सम्मान, विश्वास और आत्मीयता को मजबूत करते हैं।

आरडब्ल्यूए महासचिव राजीव दुबलिश ने कहा कि सेक्टर-105 का आरडब्ल्यूए परिवार इन सभी कर्मचारियों को केवल कर्मचारी के रूप में नहीं देखता, बल्कि उन्हें अपने परिवार का अभिन्न हिस्सा मानता है। उन्होंने कहा कि किसी भी आवासीय क्षेत्र की पहचान केवल उसकी इमारतों, सड़कों और सुविधाओं से नहीं होती, बल्कि वहां रहने वाले लोगों और उन व्यवस्थाओं को संचालित करने वाले कर्मचारियों के बीच आपसी संबंधों से भी होती है। जब कर्मचारी और निवासी एक-दूसरे के प्रति सम्मान और सहयोग का भाव रखते हैं, तभी एक बेहतर सामाजिक वातावरण तैयार होता है।

कोषाध्यक्ष सुरेश बंसल और संयुक्त सचिव अनिल भदौरिया ने भी कर्मचारियों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि किसी भी सेक्टर को व्यवस्थित और आदर्श आवासीय क्षेत्र बनाने में इन मेहनतकश साथियों की भूमिका सबसे अहम होती है। सफाई व्यवस्था से लेकर सुरक्षा, हरियाली और बुनियादी सुविधाओं तक, प्रत्येक स्तर पर इनका योगदान दिखाई देता है। इनके बिना किसी भी आवासीय क्षेत्र की व्यवस्थाओं की कल्पना करना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि त्योहार के अवसर पर ऐसे साथियों को सम्मान देना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

कार्यकारिणी सदस्य उमेश माथुर, हरीश पालीवाल और महेश चौहान ने भी सभी कर्मचारियों को दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सेवा, समर्पण और सामाजिक सहभागिता का यह भाव आगे भी बना रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव केवल बड़ी घोषणाओं से नहीं, बल्कि ऐसे छोटे-छोटे प्रयासों से आते हैं, जिनमें दूसरे व्यक्ति की मेहनत और भावनाओं को महत्व दिया जाता है।

कार्यक्रम के दौरान कर्मचारियों ने भी आरडब्ल्यूए की इस पहल के प्रति खुशी जाहिर की। उनके लिए यह अवसर इसलिए भी खास रहा, क्योंकि रोजमर्रा की जिम्मेदारियों के बीच अक्सर उनके काम की सराहना नहीं हो पाती। त्योहार के मौके पर जब उन्हें सम्मानपूर्वक बुलाया गया, उनके साथ आत्मीयता से बातचीत की गई और उपहार देकर शुभकामनाएं दी गईं, तो उन्हें अपनेपन का एहसास हुआ।

दरअसल, शहरों की चमक-दमक के पीछे ऐसे हजारों हाथ होते हैं, जिनकी मेहनत आमतौर पर नजरों से ओझल रहती है। सुबह होने से पहले सफाई में जुट जाने वाले कर्मचारी, रातभर चौकसी करने वाले सुरक्षा गार्ड और पेयजल, सीवर तथा हरियाली जैसी जरूरी व्यवस्थाओं को संभालने वाले कर्मी शहर के दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण आधार हैं। उनके श्रम के बिना आधुनिक आवासीय क्षेत्रों की व्यवस्था लंबे समय तक कायम नहीं रह सकती। ऐसे में त्योहारों पर उनके योगदान को याद करना और उन्हें सम्मान देना सामाजिक जिम्मेदारी के साथ-साथ मानवीय संवेदना का भी परिचायक है।

सेक्टर-105 आरडब्ल्यूए की इस पहल ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि दीपावली की असली रोशनी केवल बिजली की झालरों और दीपों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उसका उजाला उन चेहरों तक भी पहुंचना चाहिए, जिनकी मेहनत से हमारे घर, सड़कें और आसपास का वातावरण बेहतर बना रहता है। आखिर त्योहार की खुशियां तभी पूरी होती हैं, जब उसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी हो।

सेक्टर-105 में आयोजित यह कार्यक्रम भले ही आकार में छोटा रहा हो, लेकिन इसका संदेश व्यापक है। यह पहल बताती है कि किसी व्यक्ति को सम्मान देने के लिए बड़े मंच या भव्य आयोजन की आवश्यकता नहीं होती। कभी-कभी आत्मीयता से दिया गया एक छोटा-सा उपहार और धन्यवाद के कुछ शब्द भी किसी के त्योहार को यादगार बना सकते हैं। यही वह भावना है, जो दीपावली को रोशनी के पर्व से आगे बढ़ाकर इंसानियत, सम्मान और सामाजिक एकजुटता का उत्सव बनाती है।

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VIKAS TRIPATHI
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