“महाराष्ट्र की पांच विधान परिषद सीटों पर महायुति और महाविकास अघाड़ी के बीच सीधा मुकाबला, कई सीटों पर बागियों ने बिगाड़े समीकरण; उत्तर प्रदेश की 11 सीटों की मतगणना भी आज, नतीजों से सामने आएगी राजनीतिक ताकत की तस्वीर”
मुंबई/लखनऊ, 27 अक्टूबर। महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में विधान परिषद चुनावों की मतगणना मंगलवार को राजनीतिक दलों के लिए अहम परीक्षा बनकर सामने है। महाराष्ट्र की पांच सीटों पर महायुति और महाविकास अघाड़ी के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई है, तो कई निर्वाचन क्षेत्रों में बागी उम्मीदवारों की मौजूदगी ने मुकाबले को और पेचीदा बना दिया है। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश की विधान परिषद की 11 सीटों के लिए भी मतगणना होनी है। इन नतीजों पर राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और उनके समर्थकों की निगाहें टिकी हैं।
महाराष्ट्र में पांच सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था। इनमें नागपुर, पुणे और छत्रपति संभाजीनगर की स्नातक निर्वाचन सीटें तथा पुणे और अमरावती की शिक्षक निर्वाचन सीटें शामिल हैं। चुनावी मैदान में कुल 182 उम्मीदवार उतरे थे और 10,68,072 मतदाताओं के लिए मतदान की व्यवस्था की गई थी। पांचों सीटों पर औसतन 72.96 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।
इन चुनावों का महत्व केवल पांच सीटों पर जीत-हार तक सीमित नहीं है। नतीजे यह संकेत भी देंगे कि संबंधित क्षेत्रों में सत्तारूढ़ महायुति और विपक्षी महाविकास अघाड़ी की राजनीतिक पकड़ कितनी मजबूत है। साथ ही, बागी उम्मीदवारों को मिलने वाले मतों से यह समझने में मदद मिलेगी कि गठबंधनों के भीतर असंतोष का चुनावी प्रदर्शन पर कितना असर पड़ा।
हालांकि, विधान परिषद चुनाव के परिणामों को राज्य या केंद्र की व्यापक राजनीतिक लोकप्रियता का अंतिम पैमाना मानना उचित नहीं होगा। स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों का मतदाता आधार सामान्य विधानसभा चुनावों से अलग होता है। इसलिए इन नतीजों का आकलन स्थानीय समीकरणों, उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पकड़ और संगठनात्मक ताकत को ध्यान में रखकर करना होगा।
पांच सीटें, कई राजनीतिक मोर्चे
महाराष्ट्र विधान परिषद की 78 सदस्यीय संरचना में इन पांच सीटों के लिए हो रहा चुनाव उन निर्वाचन क्षेत्रों में राजनीतिक प्रतिनिधित्व तय करेगा, जहां मतदाताओं का स्वरूप सामान्य विधानसभा क्षेत्रों से अलग है। इन सीटों पर मुकाबला द्विवार्षिक चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा है और संबंधित सदस्यों का कार्यकाल 6 दिसंबर 2026 को समाप्त होना निर्धारित है।
चुनाव में महायुति और महाविकास अघाड़ी के उम्मीदवारों के बीच मुकाबला प्रमुख है, लेकिन हर सीट पर राजनीतिक लड़ाई एक जैसी नहीं है। कहीं दलों के आधिकारिक उम्मीदवार आमने-सामने हैं, तो कहीं निर्दलीय प्रत्याशियों और बागियों ने समीकरणों को प्रभावित करने की संभावना पैदा की है।
राजनीतिक दलों के लिए चुनौती केवल अपने उम्मीदवार को जिताना नहीं, बल्कि समर्थक मतदाताओं को मतदान तक पहुंचाना और विरोधी खेमे में संभावित बिखराव का लाभ उठाना भी रही। अब मतगणना के दौरान यह स्पष्ट होगा कि चुनाव से पहले किए गए दावे मतों में कितने तब्दील हुए।
नागपुर स्नातक सीट: भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला
नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के सुधाकर कोहले और कांग्रेस के अभिजीत वंजारी के बीच प्रमुख मुकाबला है। इस सीट पर भाजपा के पूर्व विधायक अनिल सोले ने नाम वापस लेकर कोहले को समर्थन दिया था। ऐसे में भाजपा के सामने अपने समर्थक मतदाताओं को एकजुट रखने की चुनौती रही, जबकि कांग्रेस को अपने उम्मीदवार के पक्ष में पर्याप्त समर्थन जुटाने की उम्मीद होगी।
नागपुर का राजनीतिक महत्व देखते हुए इस सीट का परिणाम दोनों प्रमुख दलों के लिए अहम माना जा रहा है। हालांकि, केवल राजनीतिक दावों के आधार पर किसी उम्मीदवार की बढ़त या जीत का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी। अंतिम तस्वीर मतगणना के बाद ही सामने आएगी।
पुणे स्नातक सीट: उम्मीदवारों की पकड़ और गठबंधन का गणित
पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा की डॉ. स्मिता जाधव और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की हर्षदा जाधव-देशमुख प्रमुख उम्मीदवारों में शामिल हैं। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सुनील मोदी समेत अन्य प्रत्याशी भी चुनाव मैदान में हैं।
यहां मुकाबले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि कई उम्मीदवारों की मौजूदगी मतों के वितरण को प्रभावित कर सकती है। स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं की पसंद, उम्मीदवारों का स्थानीय संपर्क और दलों का संगठनात्मक नेटवर्क परिणाम तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
पुणे सीट का नतीजा यह भी दिखाएगा कि संबंधित दल अपने पारंपरिक समर्थन को बनाए रखने में कितने सफल रहे। हालांकि, मतों के अंतिम आंकड़े सामने आने से पहले किसी भी संभावित परिणाम को निर्णायक मानना उचित नहीं होगा।
छत्रपति संभाजीनगर: राष्ट्रवादी कांग्रेस के दोनों गुटों की प्रतिष्ठा
छत्रपति संभाजीनगर स्नातक सीट पर अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सतीश चव्हाण और शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट के उम्मीदवार के बीच मुकाबला है। इस कारण यह निर्वाचन क्षेत्र राष्ट्रवादी कांग्रेस के दोनों धड़ों के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बन गया है।
दोनों गुटों के बीच मुकाबला केवल उम्मीदवारों की व्यक्तिगत जीत तक सीमित नहीं है। नतीजे उनके संगठनात्मक आधार और समर्थकों पर पकड़ के बारे में भी संकेत दे सकते हैं। हालांकि, किसी एक सीट के परिणाम से पूरे राज्य में किसी गुट की स्थिति का निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।
इस निर्वाचन क्षेत्र में मतदान का प्रतिशत पांचों सीटों में सबसे कम रहा। यहां 59.12 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। अब देखना होगा कि मतगणना में किस उम्मीदवार को प्राथमिकता वाले मतों और अन्य वैध मतों का अधिक समर्थन मिलता है।
पुणे शिक्षक सीट: महायुति के भीतर मतभेद भी परीक्षा में
पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के कौस्तुभ गावड़े और कांग्रेस के जयंत आसगांवकर प्रमुख उम्मीदवार हैं। इसके अलावा निर्दलीय प्रत्याशी सचिन सानप को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का समर्थन मिलने की बात सामने आई थी। इससे महायुति के भीतर चुनावी रणनीति और समर्थन के तालमेल पर सवाल उठे।
यहां मुकाबले का नतीजा केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच मतों की तुलना तक सीमित नहीं रहेगा। निर्दलीय उम्मीदवार को मिलने वाला समर्थन भी राजनीतिक विश्लेषण का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। यदि किसी बागी या निर्दलीय प्रत्याशी को उल्लेखनीय मत मिलते हैं, तो उससे गठबंधन के भीतर समर्थन के बंटवारे का संकेत मिल सकता है।
पुणे शिक्षक सीट पर 85.86 प्रतिशत मतदान हुआ। यह भागीदारी इस निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं की सक्रियता को दर्शाती है, लेकिन अधिक मतदान अपने आप में किसी एक दल या उम्मीदवार के पक्ष में परिणाम की गारंटी नहीं देता।
अमरावती शिक्षक सीट: सबसे अधिक मतदान, मुकाबले पर सबकी नजर
अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के किरण सरनाईक और कांग्रेस की अदिति पोहरे के बीच प्रमुख मुकाबला है। भाजपा की बागी उम्मीदवार संगीता शिंदे समेत अन्य प्रत्याशियों की मौजूदगी ने इस सीट को भी चर्चा में रखा।
अमरावती में पांचों निर्वाचन क्षेत्रों में सबसे अधिक 92.25 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इस उच्च मतदान प्रतिशत के कारण यहां के परिणाम पर विशेष ध्यान रहेगा। लेकिन मतदान की अधिक भागीदारी को किसी एक पक्ष के समर्थन के रूप में देखना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा। वास्तविक स्थिति मतगणना और उम्मीदवारवार मतों के आंकड़े सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
इस सीट पर यह भी देखा जाएगा कि बागी उम्मीदवारों ने कितना समर्थन हासिल किया और उसका प्रमुख प्रत्याशियों के प्रदर्शन पर क्या प्रभाव पड़ा।
मतदान के आंकड़े क्या बताते हैं?
महाराष्ट्र की पांच सीटों पर मतदान का प्रतिशत इस प्रकार रहा:
- नागपुर स्नातक सीट: 64.82 प्रतिशत
- पुणे स्नातक सीट: 62.76 प्रतिशत
- छत्रपति संभाजीनगर स्नातक सीट: 59.12 प्रतिशत
- पुणे शिक्षक सीट: 85.86 प्रतिशत
- अमरावती शिक्षक सीट: 92.25 प्रतिशत
इन आंकड़ों में स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के बीच स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान अपेक्षाकृत अधिक रहा, जबकि स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में भागीदारी कम दर्ज की गई। हालांकि, इन दोनों श्रेणियों के मतदाता आधार और चुनावी परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए केवल मतदान प्रतिशत के आधार पर उम्मीदवारों की जीत-हार का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
मतगणना के दौरान वैध मतों, प्राथमिकता के क्रम और लागू मतगणना नियमों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। इसलिए शुरुआती रुझानों और अंतिम परिणामों के बीच अंतर संभव है। उम्मीदवारों की जीत की पुष्टि संबंधित निर्वाचन प्रक्रिया के आधिकारिक परिणाम से ही होगी।
उत्तर प्रदेश में 11 सीटों की मतगणना
महाराष्ट्र के साथ उत्तर प्रदेश में भी मंगलवार को विधान परिषद के द्विवार्षिक चुनावों की मतगणना होनी है। इन चुनावों में पांच स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा की ओर से सोमवार को जारी बयान के अनुसार, मतगणना सुबह आठ बजे शुरू होनी निर्धारित है।
मतगणना सात शहरों—लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ, झांसी, बरेली और गोरखपुर—में कराई जाएगी। इसके लिए निर्धारित केंद्रों पर मतगणना की व्यवस्था की गई है।
लखनऊ में रमाबाई रैली ग्राउंड, वाराणसी में स्टेट वेयरहाउस कॉरपोरेशन, आगरा में टूंडला रोड स्थित नवीन कृषि उत्पादन मंडी समिति और मेरठ में मोदीपुरम स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की गांधी हॉल बिल्डिंग में मतगणना होनी है।
इसी तरह झांसी में बुंदेलखंड डिग्री कॉलेज के कोठारी हॉल, बरेली में संजय कम्युनिटी हॉल और गोरखपुर में पंडित दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कॉमर्स बिल्डिंग को मतगणना केंद्र निर्धारित किया गया है।
उत्तर प्रदेश के चुनाव परिणामों से संबंधित स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवारों की स्थिति स्पष्ट होगी। इन सीटों पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर सक्रिय उम्मीदवारों की प्रतिष्ठा भी दांव पर है। हालांकि, महाराष्ट्र की तरह यहां भी परिणामों का मूल्यांकन संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों के संदर्भ में करना जरूरी होगा।
आज के नतीजों से क्या होगा स्पष्ट?
महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में विधान परिषद चुनावों की मतगणना कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है। पहला, इससे दोनों राज्यों के संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवारों की वास्तविक स्थिति सामने आएगी। दूसरा, यह स्पष्ट होगा कि प्रमुख दल अपने समर्थक मतदाताओं को कितनी प्रभावी ढंग से अपने पक्ष में लामबंद कर सके। तीसरा, जहां बागी और निर्दलीय उम्मीदवार मुकाबले में हैं, वहां उनके प्रदर्शन से राजनीतिक दलों के भीतर समर्थन के बंटवारे का आकलन किया जा सकेगा।
महाराष्ट्र में महायुति और महाविकास अघाड़ी के लिए ये नतीजे राजनीतिक संदेश देने का अवसर भी हैं। लेकिन किसी गठबंधन की व्यापक सफलता या विफलता का आकलन केवल पांच सीटों के आधार पर करना उचित नहीं होगा। इसी तरह उत्तर प्रदेश की 11 सीटों के नतीजों को भी उनके विशिष्ट मतदाता आधार और निर्वाचन परिस्थितियों के साथ समझना होगा।
फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि चुनावी दावों और राजनीतिक रणनीतियों को मतदाताओं का कितना समर्थन मिला। महाराष्ट्र में पांच सीटों और उत्तर प्रदेश में 11 सीटों की मतगणना पूरी होने के साथ तस्वीर साफ होगी। जब तक आधिकारिक नतीजे घोषित नहीं होते, तब तक जीत-हार, बढ़त और राजनीतिक प्रभाव को लेकर किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।















