इटावा में पिता की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा करने का दावा किया है। पुलिस के मुताबिक, प्रेम संबंधों को लेकर पारिवारिक विवाद के बीच पिता की हत्या की कथित साजिश रची गई। मामले में मृतक की नाबालिग बेटी और उसके कथित प्रेमी को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने घटना में इस्तेमाल किए जाने का दावा किया गया सिलबट्टे का बट्टा, एक चाकू और खून से सने कपड़े बरामद किए हैं। शव को बक्से में छिपाने और मृतक का मोबाइल फोन नाले में फेंकने की बात भी पुलिस की जांच में सामने आने का दावा किया गया है।
इटावा में सामने आए इस मामले ने पारिवारिक रिश्तों, आपसी विश्वास और घरेलू विवादों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस के अनुसार, मृतक की बेटी के लापता होने और पिता का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने के बाद मामले की जांच शुरू की गई थी। एसओजी, सर्विलांस और थाना सिविल लाइन पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए अगले दिन दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।
हालांकि, पुलिस की ओर से सामने रखे गए घटनाक्रम और आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान साक्ष्यों के आधार पर होगी। फिलहाल पुलिस बरामद वस्तुओं और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ा रही है।
दो-तीन दिन से पिता और बहन से नहीं हो पा रहा था संपर्क
पुलिस के मुताबिक, 25 अक्टूबर 2026 को काजल पत्नी अजय कठेरिया, निवासी ग्राम भीकनपुर, थाना जसवंतनगर, जनपद इटावा ने थाना सिविल लाइन में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने बताया कि उनके पिता श्यामसुन्दर कठेरिया और बहन पूजा काशीराम कॉलोनी स्थित टीबीटी अस्पताल में रहते थे।
काजल के अनुसार, पिछले दो से तीन दिनों से उनका अपने पिता और बहन से संपर्क नहीं हो पा रहा था। लगातार फोन करने के बावजूद संपर्क स्थापित नहीं होने पर उन्हें अनहोनी की आशंका हुई। इसके बाद वह अपने ससुर के साथ संबंधित कमरे पर पहुंचीं।
वहां पहुंचने पर पिता का शव संदिग्ध परिस्थितियों में पड़ा मिला, जबकि उनकी बहन पूजा वहां मौजूद नहीं थी। पिता की मौत और बहन के नहीं मिलने से मामला गंभीर हो गया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई।
थाना सिविल लाइन, जनपद इटावा में मुकदमा अपराध संख्या 181/2026 पंजीकृत किया गया। पुलिस प्रेस नोट के अनुसार, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) और 238 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
शुरुआती जांच में पुलिस ने घटनास्थल की परिस्थितियों, मृतक की मौत के कारणों और उनकी बेटी के लापता होने से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखते हुए पड़ताल शुरू की।
अगले ही दिन पुलिस ने दो आरोपियों को दबोचा
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में एसओजी, सर्विलांस और थाना सिविल लाइन पुलिस की संयुक्त टीमें सक्रिय की गईं। पुलिस संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान 26 अक्टूबर 2026 को पुलिस को सूचना मिली कि हत्या की घटना में शामिल बताया जा रहा एक आरोपी ग्राम सराय एसआर में मौजूद है।
सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने कार्रवाई की और ग्राम सराय एसआर चेकपोस्ट के पास से अभिलाष सिंह उर्फ छोटू उर्फ माचो तथा मृतक की नाबालिग बेटी को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस का दावा है कि संदिग्धों से पूछताछ और जांच में मिले तथ्यों के आधार पर मामले की कड़ियां जुड़ीं और दोनों आरोपियों तक पहुंचने में सफलता मिली। पुलिस ने गिरफ्तारी के साथ ही घटना से संबंधित बताए गए सामान की बरामदगी की जानकारी भी दी है।
हालांकि, गिरफ्तारी अपने आप में अपराध सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। आरोपियों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों का निर्धारण न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।
प्रेम संबंधों का विरोध बना विवाद की वजह? पुलिस ने बताई यह कहानी
पुलिस प्रेस नोट में हत्या के पीछे प्रेम संबंधों को लेकर पारिवारिक विरोध की बात कही गई है। पुलिस के अनुसार, मृतक की नाबालिग बेटी और अभिलाष सिंह उर्फ छोटू उर्फ माचो के बीच कथित प्रेम संबंध थे। बताया गया है कि जब पिता को इस संबंध की जानकारी हुई तो उन्होंने इसका विरोध किया।
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में आरोपियों की ओर से कथित तौर पर यह बात सामने आई कि पिता इस रिश्ते के खिलाफ थे और इस मुद्दे पर विवाद होता था। प्रेस नोट में पिता द्वारा मारपीट किए जाने की बात का भी उल्लेख है, जिसे आरोपियों के कथित बयान का हिस्सा बताया गया है।
पुलिस का दावा है कि इसी पारिवारिक विवाद के चलते दोनों ने कथित तौर पर पिता की हत्या की योजना बनाई। जांच में सामने आए बताए गए घटनाक्रम के अनुसार, आरोपियों ने पहले चाय में नींद की गोली देकर पिता को सुलाने की बात कही। इसके बाद उन्हें चारपाई से बांधने और सिलबट्टे के बट्टे से प्रहार करने का आरोप है।
पुलिस की ओर से जारी विवरण में इस घटनाक्रम को पूछताछ में सामने आए कथित बयान के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसलिए इसे अंतिम रूप से स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। घटना की वास्तविक परिस्थितियों का निर्धारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक जांच, घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों और अन्य उपलब्ध तथ्यों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगा।
हत्या के बाद शव बक्से में छिपाने का दावा
पुलिस के प्रेस नोट में कथित तौर पर हत्या के बाद साक्ष्य छिपाने की कोशिश का भी उल्लेख किया गया है। पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान यह बात सामने आई कि मृतक के शव को कंबल में लपेटकर एक बक्से में छिपा दिया गया था।
इसके अलावा मृतक का मोबाइल फोन नाले में फेंकने की बात भी पुलिस ने बताई है। पुलिस के मुताबिक, मृतक का मोबाइल फोन उनकी बेटी अपने कथित प्रेमी से बातचीत करने के लिए इस्तेमाल करती थी। प्रेस नोट में फोन को नाले में फेंकने के पीछे साक्ष्य छिपाने की मंशा होने का दावा किया गया है।
हालांकि, उपलब्ध पुलिस विवरण में मोबाइल फोन की बरामदगी की पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में फोन कहां है, उसे बरामद किया गया है या नहीं और उससे संबंधित डिजिटल साक्ष्य जांच में सामने आए हैं या नहीं, इन सवालों पर आधिकारिक जानकारी का इंतजार रहेगा।
मामले में शव की स्थिति, घटनास्थल से प्राप्त साक्ष्य और कथित रूप से इस्तेमाल की गई वस्तुओं की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पुलिस की जांच में इन पहलुओं का सत्यापन आगे की कार्रवाई के लिए अहम होगा।
सिलबट्टे का बट्टा, चाकू और खून से सने कपड़े बरामद
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान तीन प्रकार की वस्तुओं की बरामदगी का उल्लेख किया है। प्रेस नोट के अनुसार, एक सिलबट्टे का बट्टा, एक चाकू और रक्तरंजित कपड़े बरामद किए गए हैं।
पुलिस ने सिलबट्टे के बट्टे को कथित हत्या में इस्तेमाल किया गया सामान बताया है। वहीं, उपलब्ध विवरण में चाकू की भूमिका को स्पष्ट रूप से अलग करके नहीं बताया गया है। बरामद कपड़ों पर लगे रक्त के स्रोत और इन वस्तुओं का घटना से संबंध फोरेंसिक जांच के जरिए स्थापित किया जाना महत्वपूर्ण होगा।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी और बरामदगी के संबंध में पहले से दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 181/2026 में भारतीय न्याय संहिता की धारा 3(5) भी जोड़ी गई है। यह प्रावधान एक से अधिक व्यक्तियों द्वारा साझा मंशा के तहत किए गए कृत्य से संबंधित है।
बरामद वस्तुओं को जांच के दौरान साक्ष्य के रूप में परखा जाएगा। इनकी वैज्ञानिक जांच से घटना के संबंध में उपलब्ध दावों की पुष्टि या खंडन करने में मदद मिल सकती है।
#Etawahpolice
#Goodwork
गिरफ्तारी एवं बरामदगी के संबंध में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक इटावा @BrijeshS_211 द्वारा दी गयी बाइट । https://t.co/mE3AWaUR9U— ETAWAH POLICE (@etawahpolice) October 26, 2026
गिरफ्तार आरोपी की पहचान सार्वजनिक, नाबालिग की पहचान गोपनीय
पुलिस प्रेस नोट में गिरफ्तार आरोपियों का विवरण इस प्रकार दिया गया है।
पहला आरोपी: अभिलाष सिंह उर्फ छोटू उर्फ माचो, पुत्र सोबरन सिंह, निवासी मातनटोला, अहेरीपुर, थाना बकेवर, जनपद इटावा। उसकी उम्र लगभग 21 वर्ष बताई गई है।
दूसरी आरोपी: मृतक की नाबालिग बेटी, जिसे पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार किया है। नाबालिग होने के कारण उसकी पहचान और अन्य व्यक्तिगत विवरण सार्वजनिक नहीं किए जा रहे हैं।
पुलिस के मुताबिक, दोनों को ग्राम सराय एसआर चेकपोस्ट के पास से गिरफ्तार किया गया। उपलब्ध प्रेस नोट में आरोपियों की न्यायालय में पेशी, रिमांड और आगे की न्यायिक कार्रवाई के संबंध में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।
नाबालिग से जुड़े मामले में किशोर न्याय से संबंधित कानूनी प्रावधानों और गोपनीयता के नियमों का पालन महत्वपूर्ण है। साथ ही, आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगा।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में हुई कार्रवाई
इटावा पुलिस की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, इस कार्रवाई को अपर पुलिस महानिदेशक, कानपुर जोन, कानपुर तथा पुलिस उपमहानिरीक्षक, कानपुर परिक्षेत्र, कानपुर के निर्देशों के क्रम में अंजाम दिया गया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक इटावा बृजेश कुमार श्रीवास्तव के पर्यवेक्षण, अपर पुलिस अधीक्षक नगर इटावा कुमारी शिवानी सिंह के मार्गदर्शन और क्षेत्राधिकारी नगर अवनीश सिंह के नेतृत्व में एसओजी, सर्विलांस तथा थाना सिविल लाइन पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की।
पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की गई और अगले दिन संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने गिरफ्तारी, बरामदगी और मुकदमे में अतिरिक्त धारा जोड़े जाने को कार्रवाई की प्रमुख उपलब्धियों के रूप में बताया है।
कई सवालों के जवाब जांच से मिलने बाकी
पुलिस ने भले ही मामले में गिरफ्तारी और बरामदगी का दावा किया है, लेकिन कई महत्वपूर्ण पहलुओं का सत्यापन अभी जांच का हिस्सा है। मृतक की मौत से जुड़े चिकित्सकीय निष्कर्ष, कथित रूप से इस्तेमाल किए गए सामान की फोरेंसिक जांच, मोबाइल फोन की स्थिति और घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों का परीक्षण मामले की आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगा।
इसी तरह, पुलिस द्वारा बताए गए कथित घटनाक्रम और आरोपियों के बयानों को अन्य स्वतंत्र साक्ष्यों से मिलान करना भी आवश्यक होगा। किसी भी आपराधिक मामले में केवल आरोप या कथित स्वीकारोक्ति को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई पुलिस की जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायालय के समक्ष होने वाली कार्यवाही के अनुसार होगी।
निष्कर्ष: इटावा हत्याकांड में पुलिस के दावों की अब होगी साक्ष्यों की कसौटी पर जांच
श्यामसुन्दर कठेरिया की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में इटावा पुलिस ने उनकी नाबालिग बेटी और उसके कथित प्रेमी को गिरफ्तार करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार, प्रेम संबंधों को लेकर पारिवारिक विवाद हत्या की कथित वजह बना। मामले में सिलबट्टे का बट्टा, चाकू और रक्तरंजित कपड़े बरामद किए जाने की जानकारी भी दी गई है।
25 अक्टूबर को शिकायत मिलने के बाद शुरू हुई जांच में 26 अक्टूबर को गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई। पुलिस ने शव को बक्से में छिपाने और मोबाइल फोन नाले में फेंकने से संबंधित कथित घटनाक्रम का भी उल्लेख किया है।
अब मामले में बरामद वस्तुओं की वैज्ञानिक जांच, अन्य साक्ष्यों का सत्यापन और न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण रहेगी। पुलिस के आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायालय में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी।
पर्दाफाश न्यूज़ इस मामले में पुलिस की ओर से जारी प्रेस नोट के आधार पर समाचार प्रस्तुत कर रहा है। जांच से जुड़े नए आधिकारिक तथ्य सामने आने पर ही घटनाक्रम के अन्य पहलुओं की पुष्टि की जा सकेगी।
मुकदमा विवरण: अपराध संख्या 181/2026, थाना सिविल लाइन, जनपद इटावा।
दर्ज धाराएं: पुलिस प्रेस नोट के अनुसार, भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) और 238; बाद में धारा 3(5) बीएनएस की बढ़ोतरी।
पुलिस के अनुसार बरामदगी: एक सिलबट्टे का बट्टा, एक चाकू और रक्तरंजित कपड़े।
गिरफ्तार आरोपी: अभिलाष सिंह उर्फ छोटू उर्फ माचो और मृतक की नाबालिग बेटी।















