“17 और 24 अक्टूबर को बूथ पर पहुंचे नागरिकों के फॉर्म-6 और संशोधन संबंधी कार्य नहीं हो सके पूरे; सेक्टर-105 आरडब्ल्यूए अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय ने जिलाधिकारी मेघा रूपम को पत्र भेजकर व्यवस्था दुरुस्त करने की अपील की”
नोएडा | 24 अक्टूबर 2026
लोकतंत्र में मतदान का अधिकार केवल चुनाव के दिन मतदान केंद्र तक पहुंचने तक सीमित नहीं है। इस अधिकार की वास्तविक शुरुआत मतदाता सूची में नाम दर्ज होने, विवरण सही रहने और निर्धारित प्रक्रिया के तहत समय पर पंजीकरण एवं संशोधन की सुविधा मिलने से होती है। लेकिन जब मतदाता सूची से जुड़ा काम कराने के लिए नागरिक निर्धारित तारीखों पर मतदान केंद्र पहुंचें और संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की अनुपस्थिति के कारण उन्हें बिना काम कराए लौटना पड़े, तो यह स्थिति प्रशासनिक व्यवस्था की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। नोएडा के सेक्टर-105 में मतदाता पुनरीक्षण से जुड़ी ऐसी ही व्यावहारिक परेशानी सामने आई है, जिसे लेकर सेक्टर-105 रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) ने जिला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया है।
सेक्टर-105 आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय ने जिलाधिकारी मेघा रूपम को पत्र भेजकर सेक्टर-105 स्थित मतदान केंद्र के बूथ संख्या 791 और 792 पर बीएलओ की उपलब्धता सुनिश्चित कराने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि शासन द्वारा निर्धारित विशेष तिथियों 17 अक्टूबर और 24 अक्टूबर को क्षेत्र के अनेक नागरिक मतदाता सूची में नाम जुड़वाने और अपने विवरण में संशोधन कराने के उद्देश्य से बूथ पर पहुंचे थे। इनमें बुजुर्ग, युवा और अपने व्यस्त दैनिक कार्यक्रम से समय निकालकर आए अन्य नागरिक भी शामिल थे। हालांकि, उनके अनुसार, बीएलओ की अनुपस्थिति के कारण फॉर्म-6 तथा संशोधन से संबंधित कार्य पूरे नहीं हो सके।
यह मामला केवल कुछ नागरिकों के एक दिन के काम में आई बाधा का नहीं है। मतदाता पंजीकरण जैसी बुनियादी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में नागरिकों की भागीदारी तभी प्रभावी बनती है, जब प्रशासन द्वारा निर्धारित सुविधाएं व्यवहार में भी उपलब्ध हों। यदि लोगों को तय तारीख पर बूथ तक पहुंचने के बाद भी संबंधित अधिकारी नहीं मिलता, तो उनका समय और प्रयास व्यर्थ होता है। इसके साथ ही, समयसीमा के भीतर आवेदन पूरा करने, जरूरी दस्तावेज जमा करने और मतदाता सूची में सही विवरण सुनिश्चित करने को लेकर अनिश्चितता भी पैदा होती है। ऐसे में सेक्टर-105 के निवासियों की शिकायत को एक स्थानीय असुविधा मानकर नजरअंदाज करने के बजाय उसका तथ्यात्मक परीक्षण और व्यावहारिक समाधान आवश्यक है।
निर्धारित तारीखों पर नागरिक पहुंचे, लेकिन काम पूरा नहीं हुआ
आरडब्ल्यूए अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय की ओर से उठाया गया प्रमुख मुद्दा यह है कि नागरिकों ने प्रशासन द्वारा निर्धारित तिथियों को गंभीरता से लिया और मतदाता सूची से संबंधित अपना काम पूरा कराने के उद्देश्य से बूथ पर पहुंचे। 17 अक्टूबर और 24 अक्टूबर को पहुंचने वाले लोगों में ऐसे नागरिक भी हो सकते हैं, जिन्हें अपने कामकाज, पारिवारिक जिम्मेदारियों या अन्य आवश्यक कार्यों के बीच से समय निकालना पड़ा हो। बुजुर्गों के लिए मतदान केंद्र तक पहुंचना अतिरिक्त प्रयास की मांग कर सकता है। ऐसे में संबंधित अधिकारी की अनुपलब्धता के कारण कार्य पूरा न होना नागरिकों के लिए स्वाभाविक रूप से निराशाजनक स्थिति है।
मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए फॉर्म-6 का उपयोग किया जाता है, जबकि नाम, पते अथवा अन्य विवरणों में सुधार के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन किया जा सकता है। मतदाता सूची में सही प्रविष्टि का महत्व इसलिए भी अधिक है, क्योंकि चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने के लिए पात्र नागरिक का नाम सूची में होना जरूरी है। इस लिहाज से पंजीकरण और संशोधन संबंधी सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना चुनावी प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
हालांकि, बीएलओ की अनुपस्थिति के कारणों, संबंधित अधिकारियों को दिए गए निर्देशों, उनकी ड्यूटी की स्थिति और उस दिन की वास्तविक परिस्थितियों के बारे में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना आवश्यक है। उपलब्ध शिकायत के आधार पर अनुपस्थिति के पीछे किसी व्यक्ति की मंशा, लापरवाही की श्रेणी या किसी व्यापक प्रशासनिक विफलता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। फिर भी, यदि निर्धारित विशेष तिथियों पर बूथों पर अपेक्षित सेवाएं उपलब्ध नहीं थीं, तो यह जानना जरूरी है कि ऐसा क्यों हुआ और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
आरडब्ल्यूए की पहल: टकराव नहीं, व्यवस्था सुधारने की मांग
सेक्टर-105 आरडब्ल्यूए अध्यक्ष ने इस विषय को उठाते हुए जिला प्रशासन से सीधे संवाद का रास्ता अपनाया है। जिलाधिकारी मेघा रूपम को भेजे गए निवेदन में उन्होंने बूथ संख्या 791 और 792 पर बीएलओ की उपस्थिति सुनिश्चित कराने तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक मार्गदर्शन देने की अपील की है। यह पहल इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि नागरिकों की समस्या को औपचारिक रूप से प्रशासन तक पहुंचाकर उसका समाधान खोजने का प्रयास किया गया है।
दिव्य कृष्णात्रेय ने जिलाधिकारी की कार्यशैली में विश्वास व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई है कि प्रशासन इस विषय पर संवेदनशीलता के साथ विचार करेगा। उनकी मांग का मूल उद्देश्य मतदाता सूची से संबंधित कार्यों को अधिक सुगम बनाना और क्षेत्र के नागरिकों को अनावश्यक परेशानी से बचाना है। इस मांग को किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध आरोप के रूप में देखने के बजाय नागरिक सुविधा, जवाबदेही और प्रशासनिक समन्वय के प्रश्न के रूप में देखा जाना चाहिए।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में आरडब्ल्यूए जैसी स्थानीय संस्थाओं की भूमिका केवल क्षेत्र की सड़क, सफाई, सुरक्षा और नागरिक सुविधाओं तक सीमित नहीं रहती। वे प्रशासन और निवासियों के बीच संवाद का माध्यम बनकर स्थानीय समस्याओं को व्यवस्थित ढंग से सामने रख सकती हैं। मतदाता पुनरीक्षण से जुड़ी इस पहल में भी यही भूमिका दिखाई देती है। जब नागरिकों को किसी सार्वजनिक सेवा में कठिनाई का सामना करना पड़ता है, तो शिकायत को तथ्यात्मक आधार पर संबंधित प्राधिकारी तक पहुंचाना और उसके समाधान के लिए प्रयास करना जिम्मेदार नागरिक भागीदारी का हिस्सा है।
जिलाधिकारी के सामने अब व्यवस्था दुरुस्त करने की चुनौती
इस प्रकरण में जिला प्रशासन से सबसे महत्वपूर्ण अपेक्षा यह है कि शिकायत की वास्तविक स्थिति का शीघ्र सत्यापन किया जाए। बूथ संख्या 791 और 792 पर 17 अक्टूबर तथा 24 अक्टूबर को बीएलओ की ड्यूटी, उपस्थिति और उपलब्धता से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जा सकती है। यदि निर्धारित समय पर अधिकारी अनुपस्थित थे या मतदाताओं को सेवाएं उपलब्ध नहीं हो सकीं, तो इसके कारणों का पता लगाकर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए।
प्रशासन के स्तर पर कुछ व्यावहारिक उपाय नागरिकों की परेशानी कम कर सकते हैं। इनमें संबंधित बूथों पर बीएलओ की उपलब्धता और कार्यसमय की स्पष्ट सूचना देना, विशेष पुनरीक्षण तिथियों से पहले व्यवस्था की पुष्टि करना, जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक संपर्क अधिकारी की जानकारी उपलब्ध कराना तथा लंबित आवेदनों के निस्तारण के लिए उचित मार्गदर्शन देना शामिल है। यदि किसी कारणवश निर्धारित दिन पर अधिकारी उपलब्ध नहीं हो पाता, तो नागरिकों को समय रहते सूचना देने और उन्हें अगली उपलब्ध तारीख या वैकल्पिक प्रक्रिया बताने की व्यवस्था भी उपयोगी हो सकती है।
इसके अतिरिक्त, मतदाताओं को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि फॉर्म-6 और संशोधन संबंधी आवेदन किस माध्यम से, किन दस्तावेजों के साथ तथा किस समयसीमा में जमा किए जा सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन या अन्य अधिकृत विकल्प उपलब्ध होने की स्थिति में उनकी सही जानकारी भी साझा की जानी चाहिए, ताकि नागरिक केवल एक ही माध्यम पर निर्भर न रहें। हालांकि, किसी भी वैकल्पिक व्यवस्था की जानकारी संबंधित निर्वाचन प्राधिकारी के आधिकारिक निर्देशों के अनुरूप ही दी जानी चाहिए।
इन उपायों का उद्देश्य किसी अधिकारी पर बिना जांच दोषारोपण करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि निर्धारित सार्वजनिक सेवाओं का लाभ नागरिकों तक पहुंचे। प्रशासनिक जवाबदेही का वास्तविक अर्थ भी यही है कि शिकायत मिलने पर उसकी जांच हो, तथ्य स्पष्ट किए जाएं और जहां सुधार की आवश्यकता हो, वहां प्रभावी कदम उठाए जाएं।
मतदाता सूची की शुद्धता से जुड़ा है नागरिकों का भरोसा
मतदाता सूची किसी भी चुनाव की बुनियादी प्रशासनिक कड़ी है। इसमें पात्र नागरिकों का नाम दर्ज होना, विवरण का सही होना और निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करने की सुविधा मिलना चुनावी भागीदारी के लिए आवश्यक है। यदि नागरिकों को पंजीकरण या संशोधन के लिए बार-बार प्रयास करना पड़े, तो उनके सामने समय, जानकारी और प्रक्रिया से जुड़ी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इसलिए मतदाता पुनरीक्षण की प्रक्रिया को केवल औपचारिक प्रशासनिक कार्य मानना पर्याप्त नहीं है; इसे नागरिकों की सुविधा और चुनावी व्यवस्था में विश्वास से जोड़कर देखना चाहिए।
सेक्टर-105 का मामला इसी व्यापक जरूरत की ओर ध्यान दिलाता है। यहां उठाई गई शिकायत की जांच के बाद यदि यह स्पष्ट होता है कि निर्धारित तिथियों पर बूथों पर अपेक्षित व्यवस्था नहीं थी, तो उसे सुधारने के लिए ठोस कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, यदि अनुपस्थिति के पीछे कोई अपरिहार्य या तकनीकी कारण रहा हो, तो नागरिकों को वास्तविक स्थिति बताकर उनके कार्य पूरे कराने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। दोनों ही परिस्थितियों में प्राथमिकता नागरिकों के लंबित कार्यों को पूरा कराने और भविष्य की असुविधा रोकने की होनी चाहिए।
यह भी जरूरी है कि नागरिकों को अपने आवेदन की स्थिति जानने और आवश्यकता पड़ने पर सहायता प्राप्त करने का स्पष्ट माध्यम मिले। ऐसी व्यवस्था से न केवल लोगों का समय बचेगा, बल्कि प्रशासन और नागरिकों के बीच संवाद भी अधिक प्रभावी होगा। समय पर जानकारी और स्पष्ट जवाबदेही किसी भी सार्वजनिक सेवा को बेहतर बनाने के दो महत्वपूर्ण आधार हैं।
सवाल स्पष्ट हैं, जवाब और समाधान का इंतजार
सेक्टर-105 आरडब्ल्यूए की ओर से जिलाधिकारी को भेजा गया पत्र जिला प्रशासन के सामने कुछ सीधे सवाल रखता है। क्या बूथ संख्या 791 और 792 पर निर्धारित तिथियों में बीएलओ की उपस्थिति सुनिश्चित थी? यदि अधिकारी उपलब्ध नहीं थे, तो इसके कारण क्या रहे? जिन नागरिकों के फॉर्म-6 या संशोधन संबंधी कार्य पूरे नहीं हो सके, उन्हें अब किस माध्यम से सहायता मिलेगी? और आगे की निर्धारित तिथियों पर ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या व्यवस्था की जाएगी?
इन सवालों के जवाब तथ्यों, रिकॉर्ड और प्रशासनिक कार्रवाई के आधार पर सामने आने चाहिए। अभी उपलब्ध विवरण के आधार पर किसी अधिकारी के विरुद्ध निष्कर्ष निकालना या जानबूझकर अनुपस्थित रहने का आरोप लगाना उचित नहीं होगा। लेकिन नागरिकों की ओर से उठाई गई शिकायत का समयबद्ध परीक्षण और उस पर स्पष्ट प्रतिक्रिया अपेक्षित है।
दिव्य कृष्णात्रेय की पहल का सार भी यही है कि मतदाता सूची से जुड़ा काम कराने आने वाले नागरिकों को अनावश्यक रूप से परेशान न होना पड़े। जिलाधिकारी और संबंधित निर्वाचन अधिकारियों के समक्ष अब अवसर है कि वे शिकायत का परीक्षण कर बूथों पर आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करें और नागरिकों को उनके आवेदन पूरे कराने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दें।
लोकतंत्र की मजबूती केवल मतदान प्रतिशत बढ़ाने के अभियानों से नहीं आती; वह उन छोटी लेकिन महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं से भी बनती है, जो प्रत्येक पात्र नागरिक को मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने और अपने अधिकार का उपयोग करने में मदद करती हैं। सेक्टर-105 के नागरिकों की परेशानी का समाधान इसी कसौटी पर परखा जाएगा। अब निगाहें जिला प्रशासन के रुख पर हैं—क्या संबंधित बूथों पर व्यवस्था की स्थिति स्पष्ट होगी, नागरिकों के लंबित कार्य पूरे कराने में मदद मिलेगी और भविष्य के लिए ऐसी शिकायतों की पुनरावृत्ति रोकने के ठोस कदम उठाए जाएंगे?
इन प्रश्नों का समयबद्ध और व्यावहारिक समाधान ही नागरिकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने तथा लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भरोसा मजबूत करने की दिशा में सबसे प्रभावी कदम होगा।
मुख्य मांग: सेक्टर-105 के बूथ संख्या 791 और 792 पर बीएलओ की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, निर्धारित तिथियों पर सामने आई शिकायत की जांच हो तथा प्रभावित नागरिकों को मतदाता पंजीकरण एवं संशोधन संबंधी कार्य पूरे कराने के लिए स्पष्ट और सुगम व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।
संपादकीय टिप्पणी: यह समाचार आरडब्ल्यूए अध्यक्ष द्वारा उपलब्ध कराए गए विवरण पर आधारित है। बीएलओ की अनुपस्थिति के कारणों और संबंधित प्रशासनिक पक्ष की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। जिलाधिकारी कार्यालय अथवा संबंधित निर्वाचन अधिकारियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाना चाहिए।















