80% आपदा प्रभावित लोगों को पहले मिली चेतावनी, फिर भी 36% लोग सुरक्षा के लिए नहीं उठा सके जरूरी कदम; गरीबी, सुरक्षित ठिकानों और परिवहन की कमी बनी बड़ी चुनौती
पर्दाफाश न्यूज़ | अंतरराष्ट्रीय डेस्क
बाढ़, चक्रवात और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए समय पर चेतावनी मिलना बेहद जरूरी है। आज मोबाइल फोन, टीवी, रेडियो और इंटरनेट के जरिए खतरे की जानकारी तेजी से लोगों तक पहुंचाई जा सकती है। लेकिन सवाल यह है कि जब लोगों को पहले ही अलर्ट मिल जाता है, तो इसके बावजूद वे आपदा की चपेट में क्यों आ जाते हैं?
लॉयड्स रजिस्टर फाउंडेशन की वर्ल्ड रिस्क पोल 2026 रिपोर्ट इस सवाल का अहम जवाब देती है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में आपदा का सामना करने वाले लगभग 80 प्रतिशत लोगों को पहले से कम से कम एक चेतावनी मिली थी। इसके बावजूद चेतावनी पाने वाले 36 प्रतिशत लोग अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम नहीं उठा सके।
यह आंकड़ा बताता है कि केवल चेतावनी जारी कर देना पर्याप्त नहीं है। लोगों के पास सुरक्षित स्थान तक पहुंचने के साधन और संसाधन होना भी उतना ही जरूरी है।
36% लोग अलर्ट मिलने के बाद भी क्यों नहीं उठा पाए कदम?
मान लीजिए किसी इलाके में बाढ़ आने की चेतावनी जारी होती है। प्रशासन लोगों को घर खाली करने की सलाह देता है, लेकिन किसी परिवार के पास किराया देने के पैसे नहीं हैं, वाहन उपलब्ध नहीं है या आसपास कोई सुरक्षित स्थान नहीं है। ऐसी स्थिति में चेतावनी मिलने के बावजूद वहां से निकलना आसान नहीं होता।
रिपोर्ट के निष्कर्षों के अनुसार, आपदा से बचाव में आर्थिक स्थिति, सुरक्षित आश्रय, परिवहन और पहले से की गई तैयारी की अहम भूमिका होती है। यही कारण है कि तकनीक से अलर्ट मिलने के बावजूद हर व्यक्ति समय पर सुरक्षित नहीं हो पाता।
रिपोर्ट के पांच अहम आंकड़े
- 80%: आपदा का सामना करने वाले लोगों को पिछले पांच वर्षों में पहले से कम से कम एक चेतावनी मिली।
- 36%: चेतावनी पाने के बावजूद लोग सुरक्षा के लिए जरूरी कदम नहीं उठा सके।
- 20%: आपदा प्रभावित लोगों में लगभग इतने लोगों को पहले से कोई चेतावनी नहीं मिली।
- 31% बनाम 16%: कम आय वाले देशों में 31 प्रतिशत वयस्कों ने आपदा का सामना किया, जबकि अमीर देशों में यह आंकड़ा 16 प्रतिशत था।
- 64% बनाम 84%: कम आय वाले देशों में प्रभावित लोगों को चेतावनी मिलने की दर 64 प्रतिशत रही, जबकि उच्च और उच्च-मध्यम आय वाले देशों में यह 84 प्रतिशत थी।
ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि आपदा का जोखिम और उससे बचने के संसाधन सभी देशों में समान नहीं हैं।
एक नहीं, कई माध्यमों से अलर्ट मिले तो बढ़ती है सुरक्षा
रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि अलग-अलग माध्यमों से चेतावनी मिलने पर लोगों के सुरक्षात्मक कदम उठाने की संभावना बढ़ती दिखाई देती है।
- एक माध्यम से चेतावनी मिलने पर 37 प्रतिशत लोगों ने सुरक्षा के लिए कदम उठाए।
- दो माध्यमों से चेतावनी मिलने पर यह आंकड़ा 51 प्रतिशत रहा।
- तीन माध्यमों से चेतावनी मिलने पर 64 प्रतिशत लोगों ने जरूरी कार्रवाई की।
उदाहरण के लिए, मोबाइल पर संदेश मिलने के साथ टीवी या रेडियो पर चेतावनी सुनना और स्थानीय प्रशासन से सूचना मिलना लोगों को खतरे को बेहतर ढंग से समझने में मदद कर सकता है।
गरीब देशों में ज्यादा जोखिम, लेकिन मदद के साधन कम
रिपोर्ट के मुताबिक, कम आय वाले देशों में आपदा प्रभावित लोगों के लिए सुरक्षा संबंधी कदम उठाना अधिक कठिन रहा। वहां चेतावनी मिलने के बाद कार्रवाई कर पाने वालों का अनुपात कम रहा, जबकि उच्च और उच्च-मध्यम आय वाले देशों में यह अपेक्षाकृत अधिक था।
इस अंतर के पीछे सुरक्षित आवास, परिवहन, आर्थिक संसाधन और आपदा प्रबंधन की उपलब्धता जैसे कारक महत्वपूर्ण हो सकते हैं। आपदा की चेतावनी तभी प्रभावी बनती है, जब लोगों को यह भी पता हो कि उन्हें कहां जाना है और वहां तक कैसे पहुंचना है।
बाढ़ बनी सबसे बड़ी चुनौती
रिपोर्ट में बाढ़, भारी बारिश और बारिश से जुड़े तूफानों को पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक असर डालने वाली आपदाओं में प्रमुख बताया गया है। आपदा प्रभावित लोगों में 39 प्रतिशत ने इन घटनाओं का उल्लेख किया। इसके बाद 19 प्रतिशत लोगों ने चक्रवात, हरिकेन और टाइफून जैसे तूफानों का, जबकि 10 प्रतिशत ने भूकंप का जिक्र किया।
बाढ़ जैसी आपदाओं में समय पर निकासी, सुरक्षित आश्रय और स्थानीय स्तर पर स्पष्ट निर्देश लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
आपदा से बचाव के लिए क्या करना जरूरी है?
विशेषज्ञों की सलाह के अनुरूप आपदा प्रबंधन में कुछ कदम विशेष रूप से उपयोगी हो सकते हैं:
- समय पर अलर्ट: मोबाइल SMS, टीवी, रेडियो और स्थानीय प्रशासन के जरिए चेतावनी पहुंचाई जाए।
- सुरक्षित आश्रय: प्रभावित लोगों को नजदीकी सुरक्षित स्थानों की जानकारी और वहां पहुंचने की सुविधा मिले।
- निकासी की तैयारी: परिवहन, जरूरी दवाइयों, दस्तावेजों और आपातकालीन सामान की पहले से व्यवस्था हो।
- कमजोर वर्गों पर ध्यान: बुजुर्गों, दिव्यांग लोगों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को विशेष सहायता दी जाए।
- स्पष्ट निर्देश: लोगों को बताया जाए कि खतरे के समय क्या करना है, कहां जाना है और मदद कैसे प्राप्त करनी है।
चेतावनी तभी कारगर, जब सुरक्षित निकलने का रास्ता भी हो
वर्ल्ड रिस्क पोल 2026 के निष्कर्षों से पता चलता है कि आपदा प्रबंधन की चुनौती सिर्फ लोगों तक चेतावनी पहुंचाने की नहीं है। असली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि चेतावनी मिलने के बाद हर व्यक्ति के पास अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए जरूरी साधन मौजूद हों।
समय पर अलर्ट, कई माध्यमों से सूचना, सुरक्षित आश्रय और प्रभावी निकासी व्यवस्था—इन सभी के साथ ही आपदा से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।















