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नोएडा से लापता बाउंसर की हत्या कर नाले में फेंका शव-चाकू से गोदकर मर्डर, दिल्ली के मयूर विहार-1 थाने में केस

 

पर्दाफाश न्यूज़ की तरफ से विशेष रिपोर्ट

नोएडा/दिल्ली: नोएडा सेक्टर-71 से 24 सितंबर की रात संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हुए बाउंसर अजय चौधरी की हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। अजय का शव दिल्ली के लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल की मोर्चरी से बरामद हुआ। शव की जांच में शरीर और गर्दन पर चाकू से गोदने के दर्जनों निशान मिले हैं। परिस्थितियां इस ओर इशारा कर रही हैं कि अजय की बेरहमी से हत्या करने के बाद शव को गाजीपुर फूल मंडी के पास नाले में फेंक दिया गया था।

मामले में दिल्ली के मयूर विहार फेज-1 थाने की पुलिस ने हत्या के आरोप में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस घटना ने नोएडा से लेकर दिल्ली तक सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं।

24 सितंबर की रात से गायब था अजय

परिजनों के अनुसार अजय चौधरी 24 सितंबर की रात सेक्टर-71 से निकला था। परिवार को उम्मीद थी कि वह रात में घर लौट आएगा, लेकिन देर रात तक उसके वापस नहीं आने पर चिंता बढ़ने लगी।

परिजनों ने बताया कि घटना वाली रात करीब आठ बजे अजय ने अपनी पत्नी को फोन किया था और रात नौ बजे तक घर पहुंचने की बात कही थी। इसके बाद रात करीब 11:22 बजे उसने पत्नी को ऑटो की फोटो भेजी। लगभग 11:30 बजे उसने पान की दुकान की फोटो भी पत्नी को भेजी और इसके बाद उसका मोबाइल फोन बंद हो गया।

यही वह समय था, जब परिवार को अनहोनी की आशंका सताने लगी।

पत्नी को ऑटो की नंबर प्लेट की फोटो भेजी थी

पूर्वी दिल्ली के चिल्ला निवासी प्रवेश चौधरी ने बताया कि उनके बेटे अजय चौधरी नोएडा सेक्टर-121 में एक बिजनेसमैन के ड्राइवर और बाउंसर थे। परिवार के मुताबिक 24 सितंबर की रात वह रैपिडो बाइक से सेक्टर-71 से आनंद विहार की ओर गए थे।

परिवार को आशंका है कि रास्ते में किसी व्यक्ति से उनका विवाद हुआ था। अजय ने अपने परिवार को ऑटो की नंबर प्लेट की फोटो और एक दुकान की फोटो भेजी थी। आनंद विहार स्थित एक दुकान से उसने करीब 150 रुपये का कुछ सामान खरीदा और उसकी पेमेंट की थी। दुकानदार ने भी परिवार को फोटो भेजी थी। अजय ने साथ ही यह भी कहा था कि वह इसी ऑटो में जा रहे हैं और इसमें उसके साथ कुछ अनहोनी हो सकती है।

कुछ देर बाद उसका मोबाइल नंबर बंद आने लगा।

परिजन दिल्ली के मयूर विहार फेज-1 थाने पहुंचे और तत्काल पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने नोएडा फेज-3 थाना पुलिस से बातचीत भी की, लेकिन परिवार का आरोप है कि युवक की तत्काल तलाश नहीं की गई।

मोबाइल की लोकेशन डासना में मिली

परिवार वालों ने उसी दिन अजय का मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगवाया। जांच में रात करीब 2 बजकर 35 मिनट पर गाजियाबाद के डासना में फोन चालू होने की लोकेशन मिली। इसके बाद मोबाइल के संबंध में कोई और जानकारी नहीं मिल सकी।

परिवार के लिए यह सबसे बड़ा सवाल था कि आखिर अजय का मोबाइल डासना में कैसे पहुंचा और उसके बाद फोन कहां चला गया।

ऑटो पर चार लाख तीन हजार रुपये का चालान

जांच के दौरान जिस ऑटो का इस्तेमाल अजय कर रहा था, उसके बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई। पुलिस को पता चला कि ऑटो पर 4 लाख 3 हजार 200 रुपये का चालान है और उसकी समय सीमा भी पूरी हो चुकी है।

पुलिस जब ऑटो मालिक तक पहुंची तो जानकारी मिली कि यह ऑटो करीब तीन दिन पहले किसी व्यक्ति ने किराये पर लिया था और वह व्यक्ति भी अब गायब है। इससे मामले की जांच का दायरा और बढ़ गया है।

ऑटो की नंबर प्लेट की फोटो अजय ने अपनी पत्नी को भेजी थी। इसी वजह से ऑटो अब पुलिस जांच का अहम हिस्सा बन गया है।

26 सितंबर को दर्ज कराई गई गुमशुदगी

पुलिस के मुताबिक परिवार ने 26 सितंबर की दोपहर करीब 11 बजे अजय की गुमशुदगी दर्ज कराई। जांच में सामने आया कि अजय सेक्टर-71 से रैपिडो बाइक के जरिए हैबतपुर गया था। वहां उसने अपने एक दोस्त के साथ करीब एक घंटा बिताया।

इसके बाद वह दूसरी रैपिडो बाइक से घर जाने लगा। छिजारसी के पास अजय का रैपिडो चालक से विवाद हो गया। इसके बाद वह ऑटो लेकर आनंद विहार पहुंचा।

आनंद विहार में उसने एक दुकान से पानी की बोतल खरीदी। इसके बाद ऑटो और दुकान की फोटो खींचकर पत्नी को भेजी। इन्हीं तस्वीरों के आधार पर परिवार अजय की गतिविधियों को जोड़ने की कोशिश करता रहा।

आनंद विहार की दुकान से पानी की बोतल खरीदी

पुलिस के अनुसार अजय ने आनंद विहार की दुकान से पानी की बोतल खरीदी थी और दुकान की फोटो पत्नी को भेजी थी। इसके बाद उसकी गतिविधियों का सिलसिला अचानक टूट गया।

परिवार का कहना है कि अजय की आखिरी गतिविधियों और मोबाइल लोकेशन से जुड़े तथ्यों को समय रहते गंभीरता से लिया जाता तो शायद मामले में कुछ और सुराग मिल सकते थे।

गाजीपुर फूल मंडी के नाले में मिला शव

गुरुवार रात करीब आठ बजे आनंद विहार पुलिस ने पीड़ित परिवार को सूचना दी कि दिल्ली के लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल में एक शव रखा हुआ है। अस्पताल कर्मियों ने परिवार को बताया कि शव अजय चौधरी का है।

अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार शव 26 सितंबर को दिल्ली पुलिस द्वारा अस्पताल पहुंचाया गया था। बताया गया कि शव गाजीपुर फूल मंडी के नाले में मिला था।

दिल्ली पुलिस ने शव मिलने की जानकारी आसपास के थानों तक भी पहुंचाई थी। बाद में शव की पहचान अजय चौधरी के रूप में हुई।

पोस्टमार्टम में शरीर और गर्दन पर चाकू के निशान

शव मिलने के बाद शुक्रवार को पोस्टमार्टम कराया गया। शरीर और गर्दन पर चाकू से गोदने के दर्जनों निशान पाए गए। इन निशानों ने घटना को सामान्य मौत के बजाय निर्मम हत्या की ओर स्पष्ट रूप से मोड़ दिया।

पोस्टमार्टम के दौरान परिजनों ने विरोध प्रदर्शन भी किया। इसके बाद दिल्ली के मयूर विहार फेज-1 थाना पुलिस ने हत्या के आरोप में मुकदमा दर्ज किया।

हत्या के बाद शव नाले में फेंककर भाग निकले आरोपी

पुलिस के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अजय की हत्या किसने की, हत्या का वास्तविक कारण क्या था और शव को गाजीपुर फूल मंडी के नाले तक कौन लेकर गया।

परिवार को पुलिस की ओर से शव मिलने की सूचना दिए जाने के बाद मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। जिस ऑटो की फोटो अजय ने पत्नी को भेजी थी, उसकी भूमिका भी जांच के केंद्र में है। ऑटो चालक, उसे किराये पर लेने वाले व्यक्ति और अजय की अंतिम गतिविधियों के बीच संबंध तलाशा जा रहा है।

परिवार ने जिस तरह अजय के फोन, ऑटो की तस्वीर और दुकान की तस्वीर के आधार पर उसकी गतिविधियों को जोड़ने की कोशिश की, उससे यह मामला कई अहम सवाल खड़े करता है।

पर्दाफाश न्यूज़ की पड़ताल के मुताबिक इस पूरे घटनाक्रम में 24 सितंबर की रात से लेकर 26 सितंबर को गुमशुदगी दर्ज होने और फिर शव की पहचान होने तक कई कड़ियां जुड़ी हुई हैं। पुलिस अब मोबाइल लोकेशन, ऑटो, रैपिडो यात्राओं, दुकानों के आसपास लगे संभावित सीसीटीवी कैमरों और अजय के संपर्क में आए लोगों की जानकारी जुटाकर हत्या की गुत्थी सुलझाने की कोशिश कर रही है।

फिलहाल परिवार अपने बेटे की हत्या के आरोपियों की गिरफ्तारी और पूरे मामले का सच सामने आने का इंतजार कर रहा है। चाकू से गोदकर की गई इस निर्मम हत्या ने नोएडा और दिल्ली के बीच सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

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VIKAS TRIPATHI
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