“राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में मेगा स्वास्थ्य परीक्षण शिविर, थैलेसीमिया कैरियर स्क्रीनिंग और CPR प्रशिक्षण; युवाओं को दिया स्वास्थ्य के साथ जीवन बचाने का संदेश”
नौएडा, 26 सितंबर 2026: पर्दाफाश न्यूज़
स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता की बातें अक्सर मंचों और अभियानों तक सीमित रह जाती हैं, लेकिन जब स्वास्थ्य जांच, आनुवंशिक बीमारी की रोकथाम और आपातकालीन स्थिति में जीवन बचाने की ट्रेनिंग एक ही मंच पर आ जाए, तो उसका असर कहीं व्यापक हो सकता है। इसी सोच के साथ इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी, जिला शाखा गौतम बुद्ध नगर ने “सेवा संकल्प अभियान-2026” के अंतर्गत राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नौएडा में मेगा स्वास्थ्य जांच एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया।
कार्यक्रम का केंद्र केवल स्वास्थ्य परीक्षण नहीं रहा, बल्कि थैलेसीमिया की रोकथाम, कैरियर स्क्रीनिंग और CPR जैसे जीवनरक्षक कौशलों को युवाओं और आम नागरिकों तक पहुंचाने का प्रयास भी रहा। आयोजन के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चुनौतियों से निपटने के लिए बीमारी सामने आने के बाद उपचार से आगे बढ़कर जागरूकता, समय पर जांच और आवश्यक प्रशिक्षण पर भी जोर देना जरूरी है।
थैलेसीमिया पर फोकस, जागरूकता से रोकथाम की दिशा में कदम
कार्यक्रम में थैलेसीमिया को विशेष रूप से जागरूकता के केंद्र में रखा गया। थैलेसीमिया एक आनुवंशिक रक्त संबंधी बीमारी है और इसकी रोकथाम के लिए बीमारी तथा कैरियर स्थिति के बारे में समय रहते जानकारी होना महत्वपूर्ण माना जाता है।
इसी उद्देश्य से प्रतिभागियों को थैलेसीमिया के कारण, रोकथाम, कैरियर स्क्रीनिंग और इससे संबंधित आवश्यक सावधानियों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में प्रोफेसर सुनीता जेटली ने थैलेसीमिया से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर जानकारी साझा की।
यहां सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या समाज में आनुवंशिक बीमारियों को लेकर पर्याप्त जागरूकता है? क्या युवा वर्ग को समय रहते यह जानकारी मिल रही है कि कैरियर स्क्रीनिंग क्यों महत्वपूर्ण हो सकती है? ऐसे सवालों के बीच इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम स्वास्थ्य संवाद को शैक्षणिक संस्थानों तक ले जाने का माध्यम बनते हैं।
रेडक्रॉस की ओर से आयोजित इस पहल का उद्देश्य इसी जागरूकता को व्यापक स्तर तक पहुंचाना बताया गया।
मुख्य अतिथि ने स्वास्थ्य जांच और जीवनरक्षक कौशल को बताया जरूरी
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कैप्टन विकास गुप्ता, अध्यक्ष, कृषि अनुसंधान परिषद, उत्तर प्रदेश एवं दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री रहे। उन्होंने कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए स्वास्थ्य जागरूकता, समय पर स्वास्थ्य जांच और जीवनरक्षक कौशलों के महत्व पर प्रकाश डाला।
अपने संबोधन में उन्होंने थैलेसीमिया जैसी आनुवंशिक बीमारी की रोकथाम के लिए जागरूकता और कैरियर स्क्रीनिंग को व्यापक स्तर तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट था—स्वास्थ्य के क्षेत्र में केवल इलाज की व्यवस्था पर्याप्त नहीं, बल्कि बीमारी से पहले जागरूकता और समय पर जांच की संस्कृति भी जरूरी है।
युवाओं के बीच इस संदेश की प्रासंगिकता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कॉलेज और विश्वविद्यालय ऐसे स्थान हैं जहां बड़ी संख्या में युवा एक साथ जुड़ते हैं और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता का संदेश व्यापक सामाजिक दायरे तक पहुंच सकता है।
CPR प्रशिक्षण ने कार्यक्रम को बनाया और महत्वपूर्ण
कार्यक्रम की एक अहम कड़ी रही CPR यानी Cardiopulmonary Resuscitation का प्रशिक्षण और व्यावहारिक प्रदर्शन।
विशेषज्ञ डा. रेनु शुक्ला ने प्रतिभागियों को CPR का प्रशिक्षण दिया और इसका व्यावहारिक प्रदर्शन किया। उद्देश्य यह रहा कि आपातकालीन परिस्थिति में प्राथमिक जीवनरक्षक सहायता देने के लिए अधिक से अधिक लोग सक्षम बन सकें।
अचानक किसी व्यक्ति के गिर जाने, सांस रुकने या हृदय संबंधी आपात स्थिति उत्पन्न होने पर शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। ऐसी स्थिति में प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा दी गई प्राथमिक सहायता और समय पर चिकित्सा सहायता के लिए प्रयास महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इसीलिए CPR प्रशिक्षण को केवल एक औपचारिक कार्यक्रम मानने के बजाय जीवनरक्षा से जुड़ी व्यावहारिक क्षमता विकसित करने की दिशा में एक कदम के तौर पर देखा गया।
कॉलेज परिसर में स्वास्थ्य और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में प्राचार्या प्रोफेसर अनीता मिश्रा सहित महाविद्यालय के शिक्षकगण, छात्र-छात्राएं तथा इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी की जिला शाखा के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में रेडक्रॉस जिला शाखा से डॉक्टर पी.एस. जैन, संजय त्रिपाठी, चक्रधर मिश्रा, बी.पी. सिंह, गरिमा त्रिपाठी सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
कॉलेज परिसर में इस प्रकार का कार्यक्रम आयोजित किए जाने का एक व्यापक उद्देश्य युवाओं को स्वास्थ्य के साथ-साथ सामाजिक सेवा और मानवीय जिम्मेदारी से जोड़ना भी रहा।
युवा केवल स्वास्थ्य जागरूकता के लाभार्थी ही नहीं, बल्कि जागरूकता अभियान के वाहक भी बन सकते हैं। यदि किसी छात्र को थैलेसीमिया कैरियर स्क्रीनिंग की उपयोगिता समझ आती है या वह CPR जैसी जीवनरक्षक तकनीक सीखता है, तो उसका प्रभाव केवल उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। वह अपने परिवार, मित्रों और समाज में भी यह जानकारी पहुंचा सकता है।
सवाल सिर्फ शिविर का नहीं, जागरूकता की निरंतरता का भी
किसी भी स्वास्थ्य जागरूकता अभियान की सफलता केवल एक दिन के आयोजन से तय नहीं होती। असली चुनौती यह होती है कि कार्यक्रम के बाद जागरूकता कितने लोगों तक पहुंचे और कितने लोग स्वास्थ्य जांच एवं आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श को गंभीरता से लें।
यही वजह है कि थैलेसीमिया कैरियर स्क्रीनिंग और CPR जैसे विषयों को लगातार जनजागरूकता से जोड़ने की आवश्यकता सामने आती है।
रेडक्रॉस द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम इसी दिशा में एक पहल के रूप में सामने आया है। अब इस तरह की गतिविधियों की निरंतरता और उनका विस्तार ही यह तय करेगा कि स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश कितनी दूर तक पहुंचता है।
‘सेवा’ को सिर्फ शब्द नहीं, व्यवहार से जोड़ने की कोशिश
इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी का मूल कार्य मानव सेवा और जरूरत के समय सहायता से जुड़ा है। “सेवा संकल्प अभियान-2026” के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में भी स्वास्थ्य और जीवनरक्षा को सेवा की अवधारणा से जोड़ने का प्रयास दिखाई दिया।
स्वास्थ्य जांच शिविर से लोगों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और जांच का अवसर मिलता है, जबकि थैलेसीमिया जागरूकता भविष्य में बीमारी की रोकथाम से जुड़े निर्णयों के लिए जानकारी उपलब्ध कराने का माध्यम बन सकती है। दूसरी ओर CPR प्रशिक्षण किसी आपात स्थिति में तत्काल सहायता देने की क्षमता विकसित कर सकता है।
इन तीनों पहलुओं को एक साथ जोड़कर कार्यक्रम ने स्वास्थ्य सेवा को केवल अस्पताल और डॉक्टर तक सीमित रखने के बजाय जागरूक नागरिक और प्रशिक्षित समाज की अवधारणा पर जोर दिया।
युवाओं के बीच पहुंचा जीवन बचाने का संदेश
आज के समय में युवाओं को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देना केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य तक सीमित विषय नहीं है। दुर्घटना, अचानक स्वास्थ्य संकट या किसी आपातकालीन परिस्थिति में आसपास मौजूद व्यक्ति की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण हो सकती है।
इसी संदर्भ में CPR प्रशिक्षण का महत्व सामने आता है। यदि अधिक संख्या में नागरिक प्राथमिक जीवनरक्षक तकनीकों की जानकारी रखते हों, तो वे आपातकालीन चिकित्सा सहायता पहुंचने तक आवश्यक प्राथमिक कदम उठाने के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकते हैं।
कार्यक्रम में व्यावहारिक प्रशिक्षण के जरिए इसी क्षमता को बढ़ाने का प्रयास किया गया।
रेडक्रॉस ने दोहराई सामाजिक जिम्मेदारी की प्रतिबद्धता
कार्यक्रम के अंत में इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी, जिला शाखा गौतम बुद्ध नगर की ओर से स्वास्थ्य जांच और जन-जागरूकता को समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाने तथा युवाओं को मानव सेवा एवं जीवन रक्षा के प्रति जागरूक करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
यह आयोजन एक संदेश के साथ समाप्त हुआ कि स्वास्थ्य के प्रति सजग समाज केवल बीमारी का इलाज करने वाला समाज नहीं होता, बल्कि बीमारी की रोकथाम, समय पर जांच और आपात स्थिति में जीवन बचाने की क्षमता रखने वाला समाज भी होता है।
पर्दाफाश न्यूज़ का सवाल
स्वास्थ्य जागरूकता के ऐसे अभियानों की असली ताकत तभी सामने आती है जब उनका प्रभाव आयोजन स्थल से बाहर निकलकर परिवारों, शैक्षणिक संस्थानों और समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचे। थैलेसीमिया जैसी आनुवंशिक बीमारी को लेकर कैरियर स्क्रीनिंग की जानकारी हो या CPR जैसी जीवनरक्षक तकनीक—दोनों ही मामलों में जागरूकता को निरंतरता की जरूरत है।
“सेवा संकल्प अभियान-2026” के तहत नौएडा में आयोजित यह कार्यक्रम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है। अब जरूरत इस बात की है कि जागरूकता एक कार्यक्रम तक सीमित न रहे, बल्कि नियमित स्वास्थ्य संवाद और जीवनरक्षक प्रशिक्षण की स्थायी संस्कृति का हिस्सा बने।
स्वास्थ्य के मोर्चे पर सबसे बड़ा बदलाव तब आता है जब नागरिक केवल अपने स्वास्थ्य के प्रति ही नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में दूसरों की जान बचाने की जिम्मेदारी के प्रति भी सजग होते हैं। यही भावना इस आयोजन के केंद्र में रही—जांच से जागरूकता, जागरूकता से रोकथाम और प्रशिक्षण से जीवनरक्षा तक।















