“भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ ने कुछ ही मिनटों में उजाड़ दिए घर, सड़कें और हाइड्रोपावर परियोजनाएं; सैकड़ों पर्यटकों के लापता होने की आशंका, भारत में भी अलर्ट”
काठमांडू/रसुवा: नेपाल में बुधवार को प्रकृति ने ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि लोगों को संभलने और सुरक्षित जगह पहुंचने तक का मौका नहीं मिला। तिब्बत की ओर से अचानक आई बाढ़ का पानी भोटेकोशी नदी में पहुंचा तो देखते ही देखते नदी ने विकराल रूप धारण कर लिया। पहाड़ों के बीच संकरी घाटियों से गुजरता तेज बहाव कुछ ही पलों में तबाही का सैलाब बन गया। घर, दुकानें, सड़कें, पुल और पनबिजली परियोजनाएं पानी और मलबे की चपेट में आ गईं। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, अब तक 98 लोगों की मौत हो चुकी है और मृतकों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
सबसे ज्यादा तबाही नेपाल के रसुवा जिले में बताई जा रही है। यहां टिमुरे और स्याब्रुबेसी समेत कई इलाकों में बाढ़ ने भारी नुकसान पहुंचाया है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों और विदेशी नागरिकों के भी लापता होने की खबर है। राहत और बचाव दल मलबे में जिंदगी तलाश रहे हैं, जबकि दुर्गम पहाड़ी इलाकों तक पहुंचना अब भी सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।
कुछ मिनटों में नदी बनी मौत का सैलाब
तिब्बत की ओर से आया पानी अचानक भोटेकोशी नदी में पहुंचा। इसके बाद जलस्तर इतनी तेजी से बढ़ा कि नदी के आसपास रहने वाले लोगों को संभलने का अवसर तक नहीं मिला। पहाड़ी इलाकों में सामान्य तौर पर नदियों का बहाव तेज होता है, लेकिन इस बार अचानक बढ़े जलस्तर और मलबे के साथ आए सैलाब ने हालात को भयावह बना दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के मुताबिक, देखते ही देखते पानी ने रिहायशी इलाकों को घेर लिया। कई जगहों पर लोग जान बचाने के लिए ऊंचे स्थानों की ओर भागे, जबकि अनेक लोगों के लिए भागने का रास्ता ही नहीं बचा। सड़क किनारे खड़ी गाड़ियां बह गईं और दुकानों तथा मकानों में पानी और मलबा घुस गया।
नेपाल ट्रेकिंग एजेंसी से जुड़े सागर पांडे के अनुसार, प्रभावित इलाके में हालात बेहद गंभीर हैं। उनका कहना है कि लॉज, होटल, वाहन और हाइड्रोपावर परियोजनाओं तक को भारी नुकसान पहुंचा है। कई स्थानों पर यह पता लगाना भी मुश्किल हो रहा है कि सड़क कहां थी और नदी का पुराना रास्ता कौन सा था।
1000 से ज्यादा लोगों के बहने की आशंका ने बढ़ाई चिंता
इस आपदा ने सबसे बड़ी चिंता लापता लोगों को लेकर पैदा कर दी है। शुरुआती अनुमानों में 1000 से ज्यादा लोगों के बह जाने की आशंका जताई जा रही है। रसुवा में बड़ी संख्या में पर्यटकों के लापता होने की खबर है। इनमें विदेशी नागरिकों के साथ भारतीय नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं।
हालांकि लापता लोगों और मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं और अंतिम स्थिति राहत एवं बचाव अभियान पूरा होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। यही वजह है कि प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता अब मलबे में फंसे लोगों तक पहुंचना और लापता लोगों की तलाश करना है।
13 हाइड्रोपावर परियोजनाओं पर पड़ा कहर
बाढ़ ने नेपाल के बुनियादी ढांचे को भी गहरी चोट पहुंचाई है। शुरुआती जानकारी के अनुसार करीब 13 हाइड्रोपावर परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। नेपाल के लिए यह नुकसान केवल संपत्ति के लिहाज से ही बड़ा नहीं है, बल्कि ऊर्जा उत्पादन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर पड़ सकता है।
टिमुरे और स्याब्रुबेसी में कई मकानों के बहने की खबर है। बिजली परियोजनाओं के आसपास जमा मलबे ने राहत कार्य को और मुश्किल बना दिया है। कई स्थानों पर भारी मशीनरी और बचाव दलों को पहुंचाना चुनौती बन गया है।
पुल बहा, कई जिलों से संपर्क टूटा
बाढ़ की रफ्तार का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि धादिंग में मलेखु के पास एक महत्वपूर्ण पुल भी नदी के तेज बहाव में बह गया। यह पुल धादिंगबेसी को जोड़ने वाले प्रमुख मार्ग का हिस्सा था। पुल के टूटने से आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
स्थानीय पत्रकार अशोक अधिकारी के मुताबिक, रसुवा, नुवाकोट, सिंधुपालचोक और चितवन तक बाढ़ और मलबे का असर दिखाई दे रहा है। कई क्षेत्रों में सड़क और संचार व्यवस्था बाधित हुई है। अनुमान है कि 10 से 12 जिलों का नेटवर्क प्रभावित हुआ है। ऐसे में राहत सामग्री पहुंचाना और लापता लोगों की जानकारी जुटाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
12 हेलीकॉप्टर उतरे राहत अभियान में
तबाही के बीच नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस ने राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है। दुर्गम पहाड़ी इलाकों में सड़कें क्षतिग्रस्त होने के कारण हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। करीब 12 हेलीकॉप्टरों की मदद से प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालने का प्रयास जारी है।
काठमांडू से विशेष रेस्क्यू और मेडिकल टीमें भी प्रभावित क्षेत्रों में भेजी गई हैं। मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश के लिए बचावकर्मी जोखिम उठाकर अभियान चला रहे हैं। कई लोगों को सुरक्षित निकालकर एयरलिफ्ट किया गया है।
मलबे में जिंदगी की तलाश
तबाही के बाद सबसे भावुक तस्वीरें उन इलाकों से सामने आ रही हैं, जहां बचावकर्मी मलबे के बीच जिंदगी तलाश रहे हैं। कहीं टूटे मकानों के नीचे लोग दबे होने की आशंका है तो कहीं बाढ़ अपने साथ लोगों और वाहनों को बहाकर ले गई है।
हर गुजरते घंटे के साथ परिजनों की चिंता बढ़ रही है। किसी को अपने परिवार के सदस्य की तलाश है तो कोई अपने परिचित पर्यटक की खबर का इंतजार कर रहा है। राहत दलों के सामने चुनौती केवल लोगों को बचाने की नहीं, बल्कि उनकी पहचान करने और उन्हें परिवारों तक पहुंचाने की भी है।
तीन थ्योरी, आखिर क्यों आई इतनी भयावह बाढ़?
नेपाल की इस आपदा ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—आखिर भोटेकोशी नदी में पानी इतनी तेजी से कैसे बढ़ा? इसके पीछे कई संभावनाओं पर चर्चा हो रही है।
पहली संभावना अचानक आई फ्लैश फ्लड की है। पहाड़ी क्षेत्रों में कम समय में अत्यधिक पानी पहुंचने पर नदियां बेहद तेजी से उफान पर आ सकती हैं। संकरी घाटियों में इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
दूसरी आशंका ग्लेशियल झील या ऊंचाई वाले इलाके में पानी जमा होने और अचानक उसके बहाव में आने की हो सकती है। ऐसी घटनाओं में भारी मात्रा में पानी और मलबा एक साथ नीचे की ओर आता है और रास्ते में मौजूद संरचनाओं को तबाह कर देता है।
तीसरी वजह अत्यधिक बारिश या ऊपरी इलाकों में मौसम के अचानक बदलने से जुड़ी हो सकती है। पहाड़ों में मौसम तेजी से बदलता है और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हुई भारी वर्षा का असर नीचे बहने वाली नदियों पर अचानक दिखाई दे सकता है।
इनमें से वास्तविक कारण की पुष्टि विस्तृत वैज्ञानिक और प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी। लेकिन इतना स्पष्ट है कि जिस तेजी से जलस्तर बढ़ा, उसने सामान्य बाढ़ को कुछ ही समय में विनाशकारी फ्लैश फ्लड में बदल दिया।
भारत में भी बढ़ी चिंता, PM मोदी ने दिया मदद का भरोसा
नेपाल की इस भीषण आपदा के बाद भारत में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। दोनों देशों के बीच नदियों और पहाड़ी इलाकों की भौगोलिक निकटता को देखते हुए नेपाल की स्थिति पर भारतीय एजेंसियों की नजर है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बातचीत कर इस त्रासदी पर दुख जताया और हरसंभव मानवीय सहायता का भरोसा दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि मुश्किल की इस घड़ी में भारत नेपाल के लोगों के साथ खड़ा है और राहत एवं बचाव कार्यों में आवश्यक सहयोग देने के लिए तैयार है।
एक आपदा, जिसने पूरे हिमालयी क्षेत्र को चेताया
नेपाल की यह त्रासदी सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा की कहानी नहीं है। यह हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते प्राकृतिक जोखिमों की गंभीर चेतावनी भी है। पहाड़ों में बेतरतीब निर्माण, नदियों के प्राकृतिक रास्तों के आसपास बढ़ती गतिविधियां, जलवायु परिवर्तन और अचानक आने वाली अत्यधिक मौसमीय घटनाएं भविष्य की चुनौतियों को और गंभीर बना सकती हैं।
भोटेकोशी की लहरों ने कुछ ही मिनटों में वर्षों की मेहनत को मिटा दिया। जिन जगहों पर कल तक होटल, दुकानें, सड़कें और बिजली परियोजनाएं थीं, वहां आज मलबा और तबाही दिखाई दे रही है।
नेपाल इस वक्त अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। राहतकर्मियों की निगाहें मलबे के हर ढेर पर हैं और हजारों परिवार अपनों की सलामती की दुआ कर रहे हैं। मृतकों की बढ़ती संख्या और लापता लोगों की खबर ने पूरे देश को सदमे में डाल दिया है।
यह सैलाब केवल नेपाल की त्रासदी नहीं, बल्कि हिमालयी क्षेत्र के लिए एक चेतावनी है—कुदरत के संकेतों को नजरअंदाज किया गया तो आने वाले समय में ऐसी आपदाएं और भी ज्यादा विनाशकारी हो सकती हैं।














