“रीवा एयरपोर्ट के कार्यक्रम में एथनॉल नीति के बचाव में दिया विवादित बयान, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल”
रीवा/भोपाल: पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण को लेकर देशभर में चल रही बहस के बीच मध्यप्रदेश के रीवा से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद जनार्दन मिश्रा एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। रविवार को रीवा एयरपोर्ट पर दो नई हवाई सेवाओं के शुभारंभ कार्यक्रम में उन्होंने एथनॉल मिश्रित पेट्रोल का विरोध करने वालों पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “शुद्ध पेट्रोल तुम्हारे बाप के घर से आएगा? शुद्ध पेट्रोल है ही नहीं देश में तो कहां से आएगा?” उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर बहस छिड़ गई है।
कार्यक्रम में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री समेत कई जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। सांसद का यह बयान ऐसे समय आया है जब केंद्र सरकार पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण बढ़ाने की अपनी नीति को ऊर्जा आत्मनिर्भरता और विदेशी तेल आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बता रही है।
एथनॉल विरोधियों को दिया जवाब
अपने संबोधन के दौरान सांसद जनार्दन मिश्रा ने कहा कि कुछ लोग एथनॉल मिश्रित पेट्रोल का विरोध कर रहे हैं और शुद्ध पेट्रोल की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में शुद्ध पेट्रोल की मांग करना व्यावहारिक नहीं है।
मिश्रा ने कहा कि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में देश को ऊर्जा सुरक्षा के लिए वैकल्पिक ईंधनों और एथनॉल मिश्रण जैसी योजनाओं को अपनाना होगा। उन्होंने अपने खास अंदाज में कहा कि जो लोग एथनॉल का विरोध कर रहे हैं, उन्हें पहले यह समझना चाहिए कि आज देश में पूरी तरह शुद्ध पेट्रोल उपलब्ध ही नहीं है।
उनकी यह टिप्पणी भले ही एथनॉल नीति के समर्थन में थी, लेकिन इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
रीवा एयरपोर्ट कार्यक्रम में दिया गया बयान
रीवा एयरपोर्ट पर आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य क्षेत्र में हवाई संपर्क को मजबूत करना था। इस अवसर पर नई उड़ान सेवाओं का शुभारंभ किया गया। मंच पर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि भी मौजूद थे।
कार्यक्रम के दौरान विकास और बुनियादी ढांचे के मुद्दों पर चर्चा करते हुए सांसद ने ऊर्जा क्षेत्र का विषय उठाया और एथनॉल मिश्रण नीति का समर्थन किया। इसी दौरान उन्होंने विरोध करने वालों पर निशाना साधते हुए विवादित टिप्पणी कर दी।
बयान सामने आने के बाद कार्यक्रम की चर्चा विकास परियोजनाओं से ज्यादा सांसद की भाषा और उनके अंदाज को लेकर होने लगी।
भारत की तेल निर्भरता का दिया हवाला
सांसद जनार्दन मिश्रा ने अपने भाषण में कहा कि भारत में केवल लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल का उत्पादन होता है, जबकि करीब 80 प्रतिशत तेल विदेशों से आयात करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और भू-राजनीतिक तनावों के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित होती रहती है।
उन्होंने बताया कि कई बार तेल लाने वाले जहाजों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे लागत बढ़ती है और देश पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। ऐसे में सरकार द्वारा एथनॉल मिश्रण को बढ़ावा देना एक दूरदर्शी कदम है।
मिश्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक एथनॉल मिश्रण का लक्ष्य रखा है, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और किसानों को भी लाभ मिलेगा।
“एथनॉल नहीं बनेगा तो पेट्रोल कहां से आएगा?”
अपने भाषण में सांसद ने कहा कि एथनॉल केवल एक वैकल्पिक ईंधन नहीं बल्कि भविष्य की ऊर्जा आवश्यकता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि एथनॉल का उत्पादन नहीं होगा तो पेट्रोल और डीजल की बढ़ती मांग को पूरा करना मुश्किल हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि देश में गन्ने और अन्य कृषि उत्पादों से एथनॉल बनाया जा सकता है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलती है। सरकार की यह नीति किसानों, उद्योगों और उपभोक्ताओं तीनों के हित में है।
मिश्रा ने कहा कि कुछ लोग बिना तथ्य जाने केवल राजनीतिक कारणों से एथनॉल का विरोध कर रहे हैं, जबकि दुनिया के कई देशों में इसका व्यापक उपयोग हो रहा है।
ब्राजील का उदाहरण देकर किया बचाव
एथनॉल मिश्रण के समर्थन में सांसद ने ब्राजील का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि ब्राजील दुनिया में एथनॉल उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी देशों में शामिल है और वहां बड़ी संख्या में वाहन पूरी तरह एथनॉल पर चलते हैं।
उन्होंने कहा कि ब्राजील में 100 प्रतिशत एथनॉल से वाहन संचालित होने के बावजूद किसी प्रकार की बड़ी तकनीकी समस्या सामने नहीं आती। यही कारण है कि भारत भी इस दिशा में आगे बढ़ रहा है।
सांसद के अनुसार, यदि भारत एथनॉल उत्पादन को बढ़ावा देता है तो इससे न केवल ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती मिलेगी बल्कि किसानों के लिए भी नए अवसर पैदा होंगे।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
जनार्दन मिश्रा का बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे उनकी बेबाक शैली बता रहे हैं, जबकि कई लोगों ने सार्वजनिक मंच से इस तरह की भाषा के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि एथनॉल नीति पर चर्चा अपनी जगह है, लेकिन जनप्रतिनिधियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली भाषा भी लोकतांत्रिक विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। यही कारण है कि बयान के राजनीतिक अर्थों के साथ-साथ उसकी शब्दावली पर भी बहस हो रही है।
विपक्षी दलों के कुछ नेताओं ने भी बयान को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा है, जबकि पार्टी समर्थक इसे एथनॉल नीति के पक्ष में दिया गया एक भावनात्मक वक्तव्य बता रहे हैं।
पहले भी विवादों में रह चुके हैं जनार्दन मिश्रा
यह पहला मौका नहीं है जब रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा अपने बयानों के कारण चर्चा में आए हों। इससे पहले भी वे कई बार अपनी बेबाक टिप्पणियों और अनोखे अंदाज को लेकर सुर्खियां बटोर चुके हैं। उनके कई बयान राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जनार्दन मिश्रा अपनी स्पष्टवादिता और स्थानीय भाषा के प्रयोग के लिए जाने जाते हैं, लेकिन कई बार यही शैली विवाद का कारण भी बन जाती है।
एथनॉल पर बहस के बीच नया राजनीतिक विवाद
देश में ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आय और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों के बीच एथनॉल मिश्रण की नीति को सरकार एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में पेश कर रही है। वहीं, इसके विरोध और समर्थन में लगातार बहस जारी है।
ऐसे समय में रीवा सांसद का यह बयान एथनॉल की तकनीकी या आर्थिक बहस से आगे बढ़कर राजनीतिक विवाद का रूप लेता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बयान पर राजनीतिक दलों और जनता की प्रतिक्रिया किस दिशा में जाती है, लेकिन फिलहाल इतना तय है कि “शुद्ध पेट्रोल तुम्हारे बाप के घर से आएगा?” वाली टिप्पणी ने एथनॉल पर चल रही बहस को एक नया और विवादित मोड़ दे दिया है।














