Friday, August 7, 2026
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CBI की चार्जशीट में बड़ा खुलासा: शुभेंदु अधिकारी के करीबी चंद्रनाथ रथ हत्याकांड की साजिश 5 महीने पहले रची गई, 11 आरोपी नामजद

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति को झकझोर देने वाले चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपनी जांच को निर्णायक मोड़ पर पहुंचाते हुए अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। चार्जशीट में कुल 11 आरोपियों को नामजद किया गया है, जिनमें दो बीजेपी कार्यकर्ता भी शामिल हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि रथ की हत्या कोई अचानक हुई वारदात नहीं थी, बल्कि इसकी साजिश दिसंबर 2025 से ही रची जा रही थी। कई बार तारीख तय हुई, लेकिन अलग-अलग कारणों से हत्या की योजना टलती रही। आखिरकार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के दो दिन बाद 6 मई को इस सनसनीखेज हत्याकांड को अंजाम दिया गया।

सीबीआई की चार्जशीट में सामने आए तथ्यों ने न केवल हत्या की पूरी साजिश का खाका पेश किया है, बल्कि इस मामले में राजनीतिक और आपराधिक गठजोड़ की आशंकाओं को भी मजबूत किया है। एजेंसी अब एक अन्य राजनीतिक दल के पदाधिकारी की भूमिका की भी जांच कर रही है।

11 आरोपी, दो बीजेपी कार्यकर्ता भी चार्जशीट में शामिल

सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार मामले में कुल 11 आरोपी हैं। इनमें हाल ही में गिरफ्तार किए गए बीजेपी कार्यकर्ता सागर सोनकर और उसके भाई साहिब सोनकर प्रमुख हैं। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने उत्तर प्रदेश के शूटरों को चंद्रनाथ रथ की हत्या की सुपारी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जांच एजेंसी का कहना है कि सागर सोनकर चंद्रनाथ रथ के कार्यालय में कार्यरत था और उसे रथ की गतिविधियों, दिनचर्या और सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जानकारी थी। इसी जानकारी का इस्तेमाल कथित तौर पर हत्या की योजना बनाने में किया गया।

दिसंबर 2025 से रची जा रही थी हत्या की साजिश

सीबीआई की जांच में यह तथ्य सामने आया है कि चंद्रनाथ रथ की हत्या की योजना दिसंबर 2025 से बनाई जा रही थी। जांच अधिकारियों के मुताबिक कई बार हत्या की तारीख तय की गई, लेकिन परिस्थितियां अनुकूल न होने के कारण योजना को टाल दिया गया।

चार्जशीट के अनुसार आरोपियों ने लगातार रथ की गतिविधियों पर नजर रखी। उनकी आवाजाही, कार्यक्रमों और सुरक्षा इंतजामों का अध्ययन किया गया ताकि वारदात को बिना किसी बाधा के अंजाम दिया जा सके। जांच एजेंसी का मानना है कि यह पूरी तरह योजनाबद्ध और पेशेवर तरीके से तैयार किया गया आपराधिक षड्यंत्र था।

चुनाव परिणाम के दो दिन बाद हत्या

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के दो दिन बाद, 6 मई को उत्तर 24 परगना जिले के मध्यग्राम में चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना ने पूरे राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया था।

रथ को शुभेंदु अधिकारी का बेहद करीबी माना जाता था। वे भवानीपुर विधानसभा सीट पर शुभेंदु अधिकारी के चुनाव प्रचार अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। उनकी राजनीतिक सक्रियता और संगठनात्मक क्षमता के कारण वे बीजेपी के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते थे।

हत्या के बाद विपक्ष ने कानून-व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए थे, जबकि मामले की गंभीरता को देखते हुए बाद में इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी गई।

उत्तर प्रदेश से बुलाए गए थे शूटर

सीबीआई के मुताबिक हत्या को अंजाम देने के लिए उत्तर प्रदेश से पेशेवर शूटर बुलाए गए थे। अब तक छह शूटरों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

गिरफ्तार शूटरों में मोनू सिंह, राज सिंह, गोलू सिंह, मयंक राज मिश्रा, विक्की मौर्य और नवीन कुमार सिंह शामिल हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि इन सभी ने अलग-अलग स्तर पर हत्या की साजिश और उसके क्रियान्वयन में भूमिका निभाई।

सीबीआई के अनुसार इन शूटरों को स्थानीय स्तर पर पूरी सहायता उपलब्ध कराई गई थी, जिससे वे बिना किसी संदेह के पश्चिम बंगाल पहुंच सके और वारदात को अंजाम देकर भागने की योजना बना सकें।

बिचौलियों का भी खुलासा

जांच में यह भी सामने आया है कि हत्या की सुपारी दिलाने के लिए कई बिचौलियों का इस्तेमाल किया गया। सीबीआई ने विनय राय, संजय राय और विकास मिश्रा को भी गिरफ्तार किया है।

एजेंसी का आरोप है कि इन्हीं लोगों ने सुपारी देने वालों और शूटरों के बीच संपर्क स्थापित कराया। भुगतान, ठिकाने और अन्य व्यवस्थाओं का समन्वय भी इन्हीं के माध्यम से किया गया।

चार्जशीट में इनकी भूमिका को हत्या की साजिश का अहम हिस्सा बताया गया है।

एक आरोपी अब भी फरार

सीबीआई अधिकारियों के मुताबिक मामले का एक आरोपी अभी भी फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। एजेंसी को उम्मीद है कि जल्द ही उसे भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

जांच एजेंसी फरार आरोपी के मोबाइल रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन और संपर्कों की भी गहन जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।

एक अन्य राजनीतिक दल के नेता की भूमिका जांच के घेरे में

सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में संकेत दिया है कि मामले में राज्य के एक अन्य राजनीतिक दल के पदाधिकारी की भूमिका भी संदिग्ध है। फिलहाल एजेंसी इस पहलू पर जांच जारी रखे हुए है।

अधिकारियों का कहना है कि अभी इस संबंध में पर्याप्त साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। यदि जांच में ठोस प्रमाण मिलते हैं तो आगे पूरक चार्जशीट दाखिल की जा सकती है।

इस खुलासे के बाद राजनीतिक हलकों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

सागर सोनकर के राजनीतिक अतीत की भी जांच

सीबीआई जांच में यह भी सामने आया है कि सागर सोनकर वर्ष 2020 तक एक प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दल के विधायक के साथ काम करता था। बाद में वह बीजेपी में शामिल हुआ और चंद्रनाथ रथ के कार्यालय में कार्य करने लगा।

एजेंसी अब यह भी जांच कर रही है कि उसके राजनीतिक संपर्कों का इस हत्या की साजिश से कोई संबंध था या नहीं। जांचकर्ताओं का मानना है कि इस कड़ी से कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

राज्य सरकार के अनुरोध पर सीबीआई को मिली थी जांच

चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद पश्चिम बंगाल सरकार के अनुरोध पर यह मामला सीबीआई को सौंपा गया था। एजेंसी ने राज्य पुलिस से केस अपने हाथ में लेकर घटनास्थल, फोरेंसिक साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल डेटा और कॉल डिटेल रिकॉर्ड का व्यापक विश्लेषण किया।

कई राज्यों में छापेमारी और पूछताछ के बाद सीबीआई ने पूरे षड्यंत्र की परतें खोलने का दावा किया है।

राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल

चार्जशीट दाखिल होने के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। विपक्ष जहां मामले में निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है, वहीं बीजेपी का कहना है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए।

दूसरी ओर, जांच एजेंसी का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्कर्ष तक पहुंचना है और जांच अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। यदि आगे नए तथ्य सामने आते हैं तो पूरक चार्जशीट दाखिल की जाएगी।

जांच अभी जारी, और खुलासों की उम्मीद

सीबीआई की चार्जशीट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चंद्रनाथ रथ की हत्या एक सुनियोजित सुपारी किलिंग थी, जिसकी तैयारी कई महीनों तक चली। अब तक 11 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई, शूटरों और बिचौलियों की गिरफ्तारी तथा राजनीतिक कड़ियों की जांच इस मामले को और गंभीर बना रही है।

फिलहाल एक आरोपी की तलाश जारी है और एक अन्य राजनीतिक दल के पदाधिकारी की भूमिका भी जांच के घेरे में है। ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड में और भी महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। अदालत में दाखिल चार्जशीट के बाद अब सबकी नजर आगामी न्यायिक प्रक्रिया और सीबीआई की आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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VIKAS TRIPATHI
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