ग्रेटर नोएडा:लगातार हो रही बारिश ने एक बार फिर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की मानसून पूर्व तैयारियों की हकीकत उजागर कर दी। शहर की मुख्य सड़कें, सर्विस रोड, चौराहे, आवासीय सेक्टर और औद्योगिक क्षेत्र जलमग्न हो गए। हालात इतने खराब हो गए कि जहां आम नागरिकों को जलभराव से जूझना पड़ा, वहीं सरकारी कार्यालय भी इससे अछूते नहीं रहे। सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों और वीडियो में थाना सूरजपुर क्षेत्र की पुलिस चौकी कसबा सूरजपुर तक बारिश के पानी से घिरी नजर आई। चौकी परिसर में कई इंच तक पानी भर गया, जिससे यह सवाल उठने लगे कि जब कानून-व्यवस्था संभालने वाली चौकी ही जलभराव से नहीं बच सकी तो आम लोगों की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
पुलिस चौकी परिसर में भरा पानी बना चर्चा का विषय
बारिश के दौरान पुलिस चौकी का परिसर पूरी तरह जलमग्न दिखाई दिया। चौकी के बाहर खड़ी मोटरसाइकिलें पानी में खड़ी नजर आईं, जबकि परिसर में पानी जमा होने से पुलिसकर्मियों और फरियादियों दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ा। यह दृश्य शहर की जल निकासी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को बयां करने के लिए काफी था। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकारी संस्थानों तक में जलभराव की समस्या बनी हुई है तो शहर के अन्य हिस्सों की हालत का अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है।
मुख्य सड़कों पर लगा लंबा जाम
लगातार बारिश के कारण ग्रेटर नोएडा की कई प्रमुख सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं। जगह-जगह पानी भरने से घंटों तक यातायात प्रभावित रहा। कई वाहन पानी में बंद हो गए और वाहन चालकों को धक्का लगाकर उन्हें बाहर निकालना पड़ा। ई-रिक्शा चालक भी अपने वाहनों को पानी से निकालने के लिए संघर्ष करते दिखाई दिए। ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों, छात्रों और व्यापारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
महिलाएं और बच्चे पानी में उतरने को हुए मजबूर
कई आवासीय सेक्टरों में जलभराव इतना अधिक था कि लोगों को कमर तक पानी में उतरकर अपने घरों और कार्यस्थलों तक पहुंचना पड़ा। महिलाएं, बुजुर्ग और स्कूली बच्चे सबसे अधिक प्रभावित नजर आए। कई स्थानों पर सड़क और नाले का अंतर तक दिखाई नहीं दे रहा था, जिससे दुर्घटना का खतरा लगातार बना रहा।
औद्योगिक इकाइयों में घुसा बारिश का पानी
ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में भी बारिश ने भारी नुकसान पहुंचाया। कई फैक्ट्रियों और औद्योगिक इकाइयों में पानी घुसने से मशीनें, कच्चा माल और तैयार उत्पाद प्रभावित हुए। उद्योग संचालकों ने लाखों रुपये के नुकसान की आशंका जताई है। उनका कहना है कि यदि जल निकासी व्यवस्था समय पर दुरुस्त की जाती तो इस तरह की स्थिति से बचा जा सकता था।
ओवरफ्लो नालियां और खुले बिजली के तार बने खतरा
बारिश के दौरान कई स्थानों पर नालियां ओवरफ्लो होती दिखाई दीं। गंदा पानी सड़कों पर बहता रहा और कुछ इलाकों में खुले नालों के ऊपर बिजली के तार भी पड़े मिले। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती है। बारिश के बीच बिजली और पानी का संपर्क गंभीर दुर्घटना की आशंका को बढ़ा रहा है।
बारिश के बीच चलती रही नालों की सफाई
सबसे हैरानी की बात यह रही कि जिन नालों की सफाई मानसून शुरू होने से पहले पूरी हो जानी चाहिए थी, उनकी सफाई बारिश के बीच भारी मशीनों और जेसीबी की मदद से कराई जाती रही। कई स्थानों पर कर्मचारी गाद निकालते दिखाई दिए। इससे साफ संकेत मिलता है कि मानसून पूर्व तैयारियां समय पर पूरी नहीं हो सकीं।
करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद नहीं मिली राहत
हर वर्ष ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण नालों की सफाई, सीवेज व्यवस्था और जल निकासी सुधार पर करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करता है। इसके बावजूद पहली ही तेज बारिश में शहर जलमग्न हो गया। इससे कार्यों की गुणवत्ता, निगरानी और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर गुणवत्तापूर्ण कार्य किए गए होते तो शहर को इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।
@OfficialGNIDA ग्रेटर नोएडा: मानसून की पहली बारिश में ही प्राधिकरण की तैयारियों की खुली पोल
लगातार हो रही बारिश ने एक बार फिर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मानसून पूर्व दावों की हकीकत सामने ला दी। शहर की सड़कें, सर्विस रोड, चौराहे, सेक्टर और औद्योगिक क्षेत्र जलभराव की चपेट में हैं।… pic.twitter.com/Y2zfz7a814
— PARDAPHAAS NEWS (@pardaphaas) July 9, 2026
सीईओ से सार्वजनिक रिपोर्ट जारी करने की मांग
शहरवासियों की मांग है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) मानसून पूर्व तैयारियों, जलभराव के कारणों और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर उसे सार्वजनिक करें। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन क्षेत्रों में कार्य अधूरे रहे और जलभराव की वास्तविक वजह क्या रही।
ठेकेदारों और अधिकारियों की जवाबदेही तय हो
लोगों का कहना है कि जल निकासी और नालों की सफाई के लिए जिन कंपनियों को ठेके दिए गए हैं, उनके नाम, कार्यों का विवरण, भुगतान की स्थिति और संबंधित अधिकारियों की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। यदि किसी एजेंसी की लापरवाही सामने आती है तो उसे तत्काल ब्लैकलिस्ट किया जाए। साथ ही जिन अधिकारियों पर इन कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी थी, उनके विरुद्ध भी विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
स्थायी समाधान की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि हर वर्ष बारिश के बाद अस्थायी उपाय करने के बजाय स्थायी जल निकासी व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है। शहर के संवेदनशील क्षेत्रों का वैज्ञानिक सर्वे कराया जाए, सीवर नेटवर्क को मजबूत किया जाए और नालों की सफाई मानसून शुरू होने से काफी पहले पूरी की जाए।
अब आश्वासन नहीं, जमीन पर कार्रवाई चाहिए
ग्रेटर नोएडा उत्तर प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक और आधुनिक शहरों में गिना जाता है। लेकिन हर मानसून में सामने आने वाली जलभराव की तस्वीरें विकास के दावों पर प्रश्नचिह्न लगा रही हैं। कासना पुलिस चौकी तक में पानी भरने की घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि समस्या केवल आम सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी संस्थान भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में अब आवश्यकता केवल दावों और निरीक्षणों की नहीं, बल्कि पारदर्शी कार्यप्रणाली, जवाबदेही तय करने और स्थायी समाधान लागू करने की है, ताकि भविष्य में पहली ही बारिश के साथ पूरे शहर की रफ्तार ठहरने की नौबत दोबारा न आए।














