बेंगलुरु/अयोध्या: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब केवल प्रशासनिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने राष्ट्रीय राजनीति में भी तीखी बहस छेड़ दी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले द्वारा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग किए जाने के बाद कांग्रेस ने इसे मुद्दा बनाते हुए संघ पर सीधे सवाल दाग दिए हैं। कर्नाटक सरकार के मंत्री प्रियांक खरगे ने RSS की नैतिकता पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए कहा कि यदि कथित गड़बड़ी करने वाले लोग उसी विचारधारा से जुड़े थे तो अब कार्रवाई की मांग करने का नैतिक अधिकार संघ को कैसे मिल गया।
वहीं कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने इस पूरे विवाद के बीच “कांग्रेस स्वयंसेवक संघ (CSS)” को फिर से सक्रिय और मजबूत बनाने की वकालत करते हुए RSS पर समाज में विभाजन की राजनीति करने का आरोप लगाया। दूसरी ओर RSS ने स्पष्ट किया है कि मंदिर और श्रद्धालुओं की आस्था सर्वोपरि है तथा किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाना चाहिए।
होसबाले के बयान के बाद तेज हुई राजनीतिक प्रतिक्रिया
पूरे विवाद की शुरुआत उस समय तेज हुई जब RSS के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने सार्वजनिक रूप से कहा कि अयोध्या राम मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितता के मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्थाओं की व्यापक समीक्षा करने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी सुधार लागू करने का आग्रह किया।
होसबाले ने कहा कि करोड़ों रामभक्तों की आस्था मंदिर से जुड़ी हुई है। ऐसे में ट्रस्ट की जिम्मेदारी है कि वह पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन के सर्वोच्च मानकों का पालन करे। उन्होंने विश्वास जताया कि ट्रस्ट इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक सुधार करेगा।
‘इतनी देर से क्यों बोले?’—प्रियांक खरगे का बड़ा सवाल
RSS के इस बयान के कुछ ही समय बाद कर्नाटक सरकार के मंत्री प्रियांक खरगे ने कलबुर्गी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कथित वित्तीय गड़बड़ी हुई है तो दोषियों को सजा मिलनी ही चाहिए, लेकिन यह सवाल भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि RSS नेतृत्व ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देने में इतनी देर क्यों की।
खरगे ने कहा कि जब फंड एकत्र करने वाले लोगों पर ही सवाल उठ रहे हैं तो केवल कार्रवाई की मांग करना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि धन संग्रह और उसके प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका रही।
उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही, मिलीभगत या वित्तीय अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े किसी भी संस्थान में पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने उठाई CSS को मजबूत करने की मांग
इस विवाद के बीच कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने राजनीतिक बहस को नया मोड़ देते हुए कहा कि अब “कांग्रेस स्वयंसेवक संघ (CSS)” को राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय करने का समय आ गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि RSS समाज को धर्म और जाति के आधार पर विभाजित करने का काम करता है और भारतीय जनता पार्टी के चुनावी हितों के लिए कार्य करता है। इसके विपरीत उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस का स्वयंसेवी संगठन स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत से जुड़ा रहा है और उसका उद्देश्य राष्ट्र सेवा रहा है।
मल्लू रवि ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में सामाजिक सद्भाव और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए कांग्रेस के स्वयंसेवी नेटवर्क को मजबूत किया जाना चाहिए ताकि समाज में सकारात्मक संवाद स्थापित किया जा सके।
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RSS ने दोहराया—दोषी कोई भी हो, कार्रवाई जरूरी
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच RSS ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था का बचाव करना नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था की रक्षा करना है।
दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि यदि जांच में कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना को एक असाधारण मामला मानते हुए ट्रस्ट को अपने वित्तीय प्रबंधन, ऑडिट प्रणाली, प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्थाओं को और अधिक मजबूत बनाना चाहिए।
उन्होंने भरोसा जताया कि ट्रस्ट पारदर्शी वित्तीय व्यवस्था और प्रभावी प्रशासन के माध्यम से श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखेगा।
आस्था के साथ पारदर्शिता की भी परीक्षा
अयोध्या राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं और विश्वास का केंद्र है। ऐसे में मंदिर के चढ़ावे से जुड़े किसी भी विवाद का प्रभाव केवल प्रशासनिक स्तर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका व्यापक सामाजिक और राजनीतिक असर भी देखने को मिलता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े धार्मिक संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता, नियमित ऑडिट, डिजिटल रिकॉर्ड और जवाबदेही की मजबूत व्यवस्था श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है। यही कारण है कि इस मामले में उठे सवालों ने राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है।
जांच और ट्रस्ट के फैसलों पर टिकी निगाहें
फिलहाल इस पूरे मामले में सभी पक्ष अपनी-अपनी राजनीतिक और वैचारिक दलीलें सामने रख रहे हैं। विपक्ष RSS और उससे जुड़े संगठनों की भूमिका पर सवाल उठा रहा है, जबकि RSS स्वयं दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और प्रशासनिक सुधार की मांग कर रहा है।
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है, कथित अनियमितताओं के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाता है और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट वित्तीय पारदर्शिता तथा प्रशासनिक सुधार को लेकर कौन-कौन से ठोस कदम उठाता है। करोड़ों श्रद्धालुओं की निगाहें अब इन्हीं फैसलों पर टिकी हैं, क्योंकि उनके लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता मंदिर की गरिमा, व्यवस्था और आस्था का अक्षुण्ण बने रहना है।














