Tuesday, June 23, 2026
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आंध्र प्रदेश बनने जा रहा है भारत का नया गोल्ड हब: जोन्नागिरी गोल्ड प्रोजेक्ट से आत्मनिर्भरता, रोजगार और आर्थिक विकास को मिलेगी नई दिशा

भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में से एक है, लेकिन अपनी घरेलू जरूरतों का अधिकांश हिस्सा आज भी आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे समय में आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले के तुग्गली मंडल स्थित जोन्नागिरी गोल्ड माइनिंग प्रोजेक्ट का तेजी से आगे बढ़ना देश की खनिज नीति, आर्थिक आत्मनिर्भरता और रणनीतिक संसाधन सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू स्वयं इस परियोजना की नियमित समीक्षा कर रहे हैं, जिससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि यह केवल एक औद्योगिक परियोजना नहीं, बल्कि राज्य सरकार की दीर्घकालिक आर्थिक विकास रणनीति का प्रमुख हिस्सा है।

स्वतंत्र भारत का पहला बड़े पैमाने का निजी गोल्ड माइनिंग प्रोजेक्ट

जोन्नागिरी गोल्ड फील्ड्स परियोजना को विकसित करने वाली कंपनी “Geomysore Services India Private Limited” ने लगभग 598 हेक्टेयर क्षेत्र में इस महत्वाकांक्षी परियोजना की नींव रखी है। स्वतंत्रता के बाद भारत में यह पहला बड़ा निजी क्षेत्र का गोल्ड माइनिंग प्रोजेक्ट माना जा रहा है, जो देश के खनन क्षेत्र में निजी निवेश के नए अध्याय की शुरुआत कर सकता है।

राज्य सरकार ने परियोजना के लिए लगभग 1,500 एकड़ भूमि आवंटित की है। पहले चरण में 600 एकड़ क्षेत्र में खनन कार्य शुरू होगा, जबकि बाद के चरणों में इसका विस्तार पूरे क्षेत्र तक किया जाएगा। आवश्यक प्रोसेसिंग प्लांट पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे उत्पादन शुरू होने का मार्ग लगभग साफ हो चुका है।

सोने के आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम

भारत हर वर्ष बड़ी मात्रा में सोने का आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है। जोन्नागिरी परियोजना का लक्ष्य प्रतिवर्ष 800 से 1,000 किलोग्राम रिफाइंड सोने का उत्पादन करना है। यदि यह लक्ष्य हासिल होता है, तो यह घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने और आयात निर्भरता कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी।

सरकार के अनुमान के अनुसार पहले वर्ष में लगभग 400 किलोग्राम और दूसरे वर्ष में 900 किलोग्राम तक सोने का उत्पादन संभव है। उत्पादन क्षमता के पूर्ण विकास के बाद वार्षिक उत्पादन 2 टन तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

विशाल स्वर्ण भंडार: भविष्य की संभावनाओं का संकेत

जोन्नागिरी क्षेत्र में लगभग 50 टन (50,000 किलोग्राम) सोने के भंडार होने का अनुमान है। इनमें से प्रारंभिक 500 एकड़ क्षेत्र में ही लगभग 13 टन सोने की पुष्टि हो चुकी है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि यह क्षेत्र भविष्य में देश के प्रमुख स्वर्ण उत्पादन केंद्रों में शामिल हो सकता है।

हालांकि, खनन विशेषज्ञों के अनुसार यहां एक टन अयस्क से औसतन लगभग 1 ग्राम सोना प्राप्त होता है। यह अनुपात वैश्विक मानकों की तुलना में सीमित माना जाता है, इसलिए परियोजना की आर्थिक सफलता आधुनिक तकनीक, कुशल प्रसंस्करण और लागत नियंत्रण पर निर्भर करेगी।

रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा लाभ

यह परियोजना केवल खनन तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय विकास का भी माध्यम बनेगी। अनुमान है कि इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 700 लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके अलावा परिवहन, मशीनरी, निर्माण, सेवा क्षेत्र और छोटे व्यवसायों को भी नई संभावनाएं प्राप्त होंगी।

खनन परियोजनाओं के कारण आसपास के क्षेत्रों में सड़क, बिजली, जल आपूर्ति और अन्य बुनियादी ढांचे के विकास को भी गति मिलने की संभावना है।

राज्य सरकार के लिए राजस्व का नया स्रोत

आंध्र प्रदेश सरकार को उत्पादित सोने के मूल्य पर 4 प्रतिशत रॉयल्टी प्राप्त होगी। वर्तमान अनुमानों के अनुसार 400 किलोग्राम उत्पादन पर लगभग 57 करोड़ रुपये और 900 किलोग्राम उत्पादन पर लगभग 144 करोड़ रुपये की रॉयल्टी मिलने की उम्मीद है।

यह अतिरिक्त राजस्व राज्य के विकास कार्यों, बुनियादी ढांचे और सामाजिक योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय संसाधन उपलब्ध करा सकता है।

केवल खनन परियोजना नहीं, बल्कि रणनीतिक आर्थिक पहल

जोन्नागिरी गोल्ड प्रोजेक्ट को केवल एक खदान के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। यह परियोजना भारत की खनिज सुरक्षा, विदेशी मुद्रा बचत, औद्योगिक निवेश, रोजगार सृजन और संसाधन आत्मनिर्भरता से जुड़ा हुआ एक रणनीतिक प्रयास है। यदि यह परियोजना अपेक्षित सफलता प्राप्त करती है, तो आंध्र प्रदेश देश के नए “गोल्ड हब” के रूप में उभर सकता है और भारत में खनन क्षेत्र में निजी निवेश के लिए एक मॉडल भी बन सकता है।

इस परियोजना की सफलता आने वाले वर्षों में न केवल आंध्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति दे सकती है, बल्कि भारत को स्वर्ण उत्पादन के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।

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VIKAS TRIPATHI
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